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UP: 14 करोड़ का छात्रवृत्ति घोटाला, कागजों पर ही चल रहे थे स्कूल, EOW के हत्थे चढ़ा ‘लाल सिंह', ऐसे हुआ था खेल

Wed, 22 Jul 2026 06:18 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Wed, 22 Jul 2026 06:18 AM IST
सार

Kanpur News: करीब 16 साल पहले इटावा में सामने आए 14 करोड़ रुपये से अधिक के छात्रवृत्ति घोटाले में आर्थिक अपराध शाखा ने बड़ी कार्रवाई की है। ईओडब्ल्यू की टीम ने बिना विद्यालय चलाए कागजों के जरिए करीब एक करोड़ की छात्रवृत्ति हड़पने वाले फर्जी प्रबंधक लाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में तत्कालीन अधिकारियों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।

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Kanpur 14 crore Etawah scholarship scam EOW nabs fake manager school existed only on paper
करोड़ों का छात्रवृत्ति घोटाला - फोटो : amar ujala

विस्तार

करीब 16 वर्ष पूर्व इटावा में हुए एक करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले के आरोपी फर्जी स्कूल प्रबंधक को मंगलवार को ईओडब्ल्यू की टीम ने गिरफ्तार किया है। आरोपी प्रबंधक ने बिना विद्यालय के ही छात्रवृत्ति का मांग पत्र भेजा था, जिस पर विभागीय अधिकारियों ने भी मुहर लगा दी थी।

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ईओडब्ल्यू के एएसपी पवित्र मोहन त्रिपाठी ने बताया कि पकड़ा गया फर्जी प्रबंधक ने करीब एक करोड़ का छात्रवृत्ति घोटाला किया है।  इस पर ऐसे तीन और मुकदमे हैं, जिसकी जांच विभाग कर रहा है। बता दें कि वर्ष 2008-09 में इटावा में 65 विद्यालयों के खिलाफ 14 करोड़ से अधिक की छात्रवृत्ति घोटाले की चार एफआईआर अलग-अलग थानों में दर्ज की गई थीं।

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चारों मामले 2019 में ईओडब्ल्यू को सौंपे गए थे
इसके बाद सभी विद्यालयों के प्रबंधक, प्रधानाचार्य व उनके सहायकों के अलावा समाज कल्याण अधिकारी, समाज कल्याण पिछड़ा वर्ग और बेसिक शिक्षा अधिकारी भी नामजद किए गए थे।  उस वक्त मामला जिले में सुर्खियों में रहा था। एएसपी ने बताया कि चारों मामले 2019 में ईओडब्ल्यू को सौंपे गए थे।

60-65 छात्रों की छात्रवृत्ति के लिए मांग पत्र भरा था
इसके एक मामले की जांच के दौरान मंगलवार को लाल सिंह निवासी ज्ञानदीप कैंपस देसर मऊ रोड इटावा की गिरफ्तारी की गई है। लालसिंह पर आरोप है कि उसने इटावा के मनिकपुर मोड़ पर कागजों में संत बीडीएस पब्लिक स्कूल दिखाकर उसमें 60-65 छात्रों की छात्रवृत्ति के लिए मांग पत्र भरा था।

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मामले में 27 विद्यालयों के 11 और आरोपी भी शामिल
जिसे स्वीकृत भी कर दिया गया था। उक्त मामले में 27 विद्यालयों के 11 और आरोपी भी शामिल हैं, जिन्होंने मिलकर करीब एक करोड़ का घोटाला किया था। ईओडब्ल्यू की विवेचना के दौरान पांच और आरोपियों के नाम भी बढ़ाए गए हैं। फर्जी प्रबंधक ने एक करोड़ में से कितनी धनराशि हड़पी है, अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है।

ईओडब्ल्यू की टीम की ओर से बीते वर्ष जिन 65 विद्यालयों के प्रधानाचार्य, प्रबंधकों सहित जो भी जानकारी मांगी गई थी। वह टीम को उपलब्ध करवा दी गई थी। इसी के आधार पर टीम की ओर से गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई होगी। इस संबंध में टीम को विभाग की ओर से पूरा सहयोग किया जा रहा है।  -अतुल कुमार सिंह, डीआईओएस

जिम्मेदारों के भी गले की फांस बना घोटाला
करोड़ों का छात्रवृत्ति घोटाला 65 विद्यालयों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों के साथ- साथ तत्कालीन अधिकारियों के भी गले की फांस बना हुआ है। ईओडब्ल्यू के अधिकारियों की माने तो बिना जिम्मेदारों की मिलीभगत के बिना 14 करोड़ से अधिक की धनराशि का स्वीकृत होना संभव नहीं है।

आरोपी चाहे कोई भी हो, बख्सा नहीं जाएगा
इसमें प्रबंधकों और जिम्मेदारों ने मिलकर बंदरबांट किया है। तत्कालीन जिले के तीन बड़े अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई जा रही है। एएसपी के मुताबिक सभी 65 विद्यालयों की जांच भी जल्द पूरी हो जाएगी। इसके बाद आरोपी चाहे कोई भी हो, बख्सा नहीं जाएगा। फर्जी प्रबंधक लाल सिंह की तरह ही उसकी गिरफ्तारी भी की जाएगी।

सिर्फ कागजों पर ही चल रहे थे स्कूल
बता दें कि वर्ष 2008-09 के बहुचर्चित 14.61 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले में आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की कार्रवाई तेज हो गई है। इस घोटाले में कक्षा एक से लेकर पांच और 10 तक के कई ऐसे विद्यालय थे, जो सिर्फ कागजों पर ही चल रहे थे। वास्तविकता में उनका कोई अता-पता नहीं था।

प्रधानाचार्यों व प्रबंधकों का डाटा मांगा गया था
इसी क्रम में मंगलवार को इटावा के एक विद्यालय के तत्कालीन प्रबंधक को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के साथ ही लंबे समय से लंबित मामले की जांच एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। 23 जून 2025 को जांच टीम की ओर से डीआईओएस को पत्र भेजकर इन 65 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों व प्रबंधकों का डाटा मांगा गया था।

वांछित डाटा ईओडब्ल्यू की टीम को दे दिया गया
इसमें उनके नाम, पिता का नाम, वर्तमान पता, नियुक्ति अवधि तथा मोबाइल नंबर सहित सभी अभिलेख एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद डीआईओएस की ओर से वांछित डाटा ईओडब्ल्यू की टीम को दे दिया गया। इसी क्रम में टीम की ओर से गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई है।

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