सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Kanpur Brains not a degree landed him an IIT job 12th grade graduate Nisarg becomes youngest Engineer

UP: डिग्री नहीं, दिमाग ने दिलाई IIT में नौकरी, 12वीं पास निसर्ग बने सबसे कम उम्र के थ्रेट इंटेलिजेंस इंजीनियर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Fri, 12 Jun 2026 08:20 AM IST
विज्ञापन
सार

Kanpur News: पश्चिम बंगाल के 12वीं पास निसर्ग अधिकारी (19) को सीबीएसई पोर्टल की सुरक्षा खामियां उजागर करने के लिए आईआईटी कानपुर ने थ्रेट इंटेलिजेंस इंजीनियर के पद पर नियुक्त किया है। यह नियुक्ति उनकी साइबर सुरक्षा में असाधारण प्रतिभा को देखते हुए की गई है।

Kanpur Brains not a degree landed him an IIT job 12th grade graduate Nisarg becomes youngest Engineer
आईआईटी कानपुर - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार

कानपुर में नौकरी के लिए लिखित परीक्षा, इंटरव्यू और संस्थानों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल के बारहवीं पास निसर्ग अधिकारी की कहानी बिल्कुल अलग है। उन्हें आईआईटी कानपुर के सीथ्रीआई हब में बिना इंजीनियरिंग किए थ्रेट इंटेलिजेंस इंजीनियर का पद मिला है।


नौकरी का प्रस्ताव उनके सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन पोर्टल की खामियों को उजागर करती हुई ब्लॉग पोस्ट को पढ़कर निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है। 19 वर्षीय निसर्ग अब तक सबसे कम उम्र के इंजीनियर हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

छात्र को नौकरी का प्रस्ताव दे दिया
सीबीएसई ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली को लांच किया था। निसर्ग अधिकारी ने इसकी संभावित गड़बड़ियों को उजागर करते हुए ब्लॉग पोस्ट की। पोस्ट को पढ़कर स्वयं प्रो. मणींद्र अग्रवाल प्रभावित हुए और छात्र को नौकरी का प्रस्ताव दे दिया।

साइबर सिक्योरिटी के क्षेत्र में है रुचि
निसर्ग ने हाल ही में 12वीं की परीक्षा पास की है। उनकी रुचि साइबर सिक्योरिटी के क्षेत्र में कार्य करना है। वह पहले भी बग की खोज कर चुके हैं। निसर्ग के माता-पिता वित्त क्षेत्र में कार्यरत हैं। परिवार में कोई भी साइबर सुरक्षा से जुड़ा नहीं है।

विज्ञापन

निसर्ग की 22 मई की लिखी पोस्ट पढ़कर प्रभावित हुआ। केवल 19 साल के छात्र ने काफी डिटेलिंग दे रखी थी, जिसके बाद ही उसको जॉब ऑफर की है। उनमें अपार संभावनाएं हैं। संस्थान से उसे काफी कुछ सीखने को मिलेगा।  -प्रो. मणींद्र अग्रवाल, निदेशक आईआईटी

ब्लॉग में यह लिखा
निसर्ग ने ब्लॉग में बताया है कि पोर्टल के फ्रंटएंड जावा स्कि्प्ट में एक हार्डकोडेड मास्टर पासवर्ड मौजूद था, जिसे इस्तेमाल करते ही ओटीपी अपने आप भर जाता था और बिना किसी सर्वर साइड वेरीफिकेशन के सीधे लॉगिन मिल जाता था।

सर्वर खुद ही ओटीपी को रिस्पांस में भेज रहा
ओटीपी सिस्टम भी पूरी तरह असुरक्षित था, क्योंकि सर्वर खुद ही ओटीपी को रिस्पांस में भेज रहा था। उसका वैलिडेशन ब्राउजर पर हो रहा था, जिससे कोई भी व्यक्ति ओटीपी देख या बायपास कर सकता था। सिस्टम में किसी भी तरह के रूट गार्ड नहीं थे।  इसके कारण डैशबोर्ड और अन्य इंटनरल पेज सीधे एक्सेस किए जा सकते थे।

साइबर अटैकर आंसर शीट देख सकता था
सबसे गंभीर खामी पासवर्ड चेंज फीचर में थी, जहां पुराना पासवर्ड वेरीफाई किए बिना ही किसी भी यूजर का पासवर्ड बदला जा सकता था। इन सभी खामियों को मिलाकर कोई भी साइबर अटैकर आंसर शीट देख सकता था और यहां तक कि छात्रों के नंबरों भी बदल सकता था। यह पूरी प्रक्रिया बेहद आसान थी और इसके लिए किसी एडवांस हैकिंग की जरूरत नहीं थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed