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Kanpur: हैलट में दलालों का खेल, हेपेटाइटिस पॉजिटिव को दी फर्जी निगेटिव रिपोर्ट, परिजनों ने दिए लिखित बयान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Wed, 07 Jan 2026 11:29 AM IST
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सार

Kanpur News: हैलट अस्पताल में दलालों ने हेपेटाइटिस-सी पॉजिटिव मरीज की फर्जी निगेटिव रिपोर्ट तैयार कर दी। आधे घंटे में रिपोर्ट मिलने पर शक हुआ और जांच में दलालों के गिरोह का पर्दाफाश हो गया।

Kanpur Brokers racket exposed at Hallet Hospital fake negative reports given to hepatitis positive patients
हैलट अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हैलट में एक बार फिर दलालों के गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। अस्पताल में भर्ती हेपेटाइटिस सी पॉजिटिव रोगी को पैथोलॉजियों के दलाल ने फर्जी हेपेटाइटिस सी निगेटिव रिपोर्ट दे दी। ब्लड सैंपल लेने के आधे घंटे में दलाल ने फर्जी हेपेटाइटिस सी निगेटिव रिपोर्ट लाकर दे दी। एलाइजा जांच में तीन घंटे लगते हैं। मामले का खुलासा सर्जरी विभाग के एक प्रकरण की जांच में हुआ है। परिजनों ने इस संबंध में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की जांच टीम को लिखित बयान भी दिए हैं।

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सर्जरी विभाग में एक रोगी की सर्जरी होनी थी। एक सप्ताह पहले रात को ऑपरेशन के पहले रैपिड कार्ड से जांच की गई तो रिपोर्ट हेपेटाइटिस सी पॉजिटिव मिला। इस पर वायरल लोड आदि की जांच के लिए जूनियर डॉक्टर ने एलाइजा जांच के लिए कहा। इस पर जूनियर डॉक्टर पर आरोप लगा कि उसने बाहर से जांच कराने के लिए कहा। इस पर प्राचार्य ने जांच कमेटी गठित कर दी। मंगलवार को जांच रिपोर्ट मिलने पर खुलासा हुआ कि जूनियर डॉक्टर ने कॉलेज से जांच के लिए कहा था।

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एलाइजा जांच में समय लगता है
जूनियर डॉक्टर के पर्ची देते वक्त पैथोलॉजी के दलाल ने पता कर लिया। बाद में आकर रोगी का सैंपल और पैसा ले लिया। इसके आधे घंटे बाद फर्जी हेपेटाइटिस निगेटिव रिपोर्ट लाकर दे दी। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि सर्जरी के पहले हर रोगी की हेपेटाइटिस बी, सी और एचआईवी की रैपिड कार्ड से जांच कराई जाती है। पॉजिटिव आने पर दो-तीन बार जांच करके पुष्टि कर ली जाती है। इसे सत्यापित करने के लिए एलाइजा कराई जाती है। इस जांच में समय लगता है।

सख्ती के अधिकारियों को निर्देश दिए
सूत्रों का कहना है कि दलाल सैंपल लेकर जाते हैं और अपने मन से कंप्यूटर से रिपोर्ट बनाकर दे देते हैं। रोगियों और उनके परिजनों को तो पता नहीं होता। जल्दी रिपोर्ट मिलने के भ्रम में रहते हैं। प्राचार्य डॉ. काला का कहना है कि इससे रोगी और डॉक्टर दोनों को नुकसान होता है। परिजन अस्पताल में जांचों की भरपूर सुविधा है। तीमारदार किसी के झांसे में न आएं। बाहरी लोगों के आने पर सख्ती के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।

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