Kanpur: युद्ध की आंच में तप रहीं रोजमर्रा की वस्तुएं, बार-बार बढ़ रही है कीमतें, दुकानदार और उपभोक्ता परेशान
Kanpur News: अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के चलते कानपुर में दैनिक उपयोग की वस्तुएं महंगी हो गई हैं। लॉजिस्टिक और कच्चे माल की लागत बढ़ने से शहर के आयात-निर्यात को करीब 2000 करोड़ का नुकसान हुआ है।
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अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच हो रहे युद्ध का असर पर दैनिक उपयोग में आने वाली चीजों पर आने लगा है। एफएमसीजी कंपनियां गिरगिट की तरह वस्तुओं के दाम बढ़ा रही हैं। हर दिन दाम में बदलाव होने से दुकानदार के अलावा उपभोक्ता परेशान हैं। एक नामी कंपनी का टूथ पाउडर का 20 दर्जन वाला गत्ता सोमवार तक 2180 रुपये का था, मंगलवार को कंपनी ने इसके दाम 2285 कर दिए हैं। इसी तरह 14 रुपये वाला सेविंग रेजर अब 18 रुपये का हो गया है। इसके अलावा नामी गिरामी चिप्स, नमकीन बनाने वाली कंपनियों ने उत्पाद का भार कम कर दिया है।
मंगलवार को नयागंज बाजार पहुंचे अलग-अलग फ्रेंचाइजी के लोगों ने व्यापारियों को माल देने के साथ यह भी बताया है कि आगे और दाम बढ़ने की संभावना है। बालों के कलर वाली फ्रेंचाइजी ने 80 पैकेट का एक गत्ता मंगलवार को 3900 रुपये का दिया, जबकि अभी तक यह 3700 रुपये में मिलता था। बैंडेड का 36 रुपये में मिलने वाला डिब्बा 39 रुपये का हो गया है। ठंडा तेल बनाने वाली फ्रेंचाइजी ने दाम में पांच प्रतिशत की वृद्धि की है। 65 रुपये में छह मिलने वाले 12 ब्रश के दाम अब 84 रुपये हो गए हैं। फ्रेंचाइजी का साफ कहना है कि हर दिन दाम में वृद्धि हो सकती है, क्योंकि कच्चा माल ही महंगा हो गया है।
पैकेजिंग सामग्री हो गई है महंगी
नयागंज मर्चेंट एसोसिएशन के महामंत्री रोशन लाल अरोड़ा ने बताया कि 10 रुपये में बिकने वाले टूथ पाउडर के दाम बढ़ाए गए हैं। प्रति दर्जन ब्रश में छह रुपये दाम बढ़ गए हैं। सेविंग रेजर, सेविंग ब्लेड, टंग क्लीनर, पैक्ड फूड आइटम के दाम बढ़ाए गए हैं। कुछ कंपनियों ने पैकेट का भार कम कर दिया है। कंपनियां हर दिन रेट भी बदल रही हैं। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (फियो) के संयोजक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि उत्पादों की लॉजिस्टिक कास्ट बढ़ने से कानपुर में आयातित होने वाले उत्पाद व वस्तुओं के दाम बढ़ गए हैं। कच्चे माल की कमी और कीमतों में वृद्धि का सीधा असर प्लास्टिक उद्योग पर पड़ा। इसके चलते पैकेजिंग सामग्री महंगी हो गई है।
निर्यातकों-आयातकों को दो हजार करोड़ का झटका
युद्ध पांच दिन के लिए भले ही टाल दिया गया हो लेकिन 28 फरवरी से चल रहे इस युद्ध ने शहर के निर्यातकों, उद्योगों को तगड़ा नुकसान पहुंचाया है। खाड़ी देशों को 700 करोड़ का निर्यात रुक गया है। नए निर्यात ऑर्डर भी नहीं मिल रहे हैं। कच्चे तेल के दामों में अनिश्चितता और आयात वस्तुओं के दाम बढ़ने से स्थितियां बिगड़ रही हैं। घरेलू उद्योगों के कच्चा माल का आयात भी रुक गया है। 1200-1300 करोड़ का आयात भी फंसा है। युद्ध से चमड़ा, केमिकल, कपड़ा, प्लास्टिक उद्योग पर गहरा संकट पड़ चुका है। प्लास्टिक से जुड़ा हर कच्चा माल महंगा होने से इससे जुड़ी हर चीज महंगी हो गई है।
घरेलू उद्योगों में 30-40 प्रतिशत उत्पादन घटा
कंपनियों का कहना है कि पैकेजिंग उत्पाद महंगा होने से आगे भी दाम और बढ़ सकते हैं। कारोबारियों का कहना है कि चमड़ा, केमिकल, प्लास्टिक, कपड़ा उद्योग का उत्पादन 40 प्रतिशत पर सिमट गया है। आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) के देशों में शामिल सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, कुवैत, कतर और बहरीन के अलावा इस्राइल, ईरान में निर्यात ठप हो गया है। 24 दिन के भीतर करीब 700 करोड़ का निर्यात प्रभावित हुआ है। इसमें 400 करोड़ का चमड़ा और चमड़ा का उत्पाद, 50 करोड़ से ज्यादा का किचन सब्जी मसाला, 200 करोड़ के करीब गारमेंट, टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वैलरी, इंजीनियरिंग आदि का निर्यात ठप हो गया है।
उत्पादन में देरी और लागत में वृद्धि हो रही है। कारोबार 40 प्रतिशत ही रह गया है। केमिकल और लेदर फैक्टरियों के उत्पादन खर्च बढ़ रहे हैं। आयातित कच्चा माल देर से पहुंच रहा है। इस्राइल, जीसीसी देशों में निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो चुका है। आने वाला समय बेहद चुनौतीपूर्ण है। नए निर्यात ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं। -यादवेंद्र सचान, क्षेत्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद
क्रूड ऑयल में आई तेजी की वजह से प्लास्टिक बारदाना के दाम बढ़ गए हैं। गेहूं और भूसे के भंडारण में प्रयोग होने वाले प्लास्टिक की छोटी- बड़ी बोरियों के दाम में 15 से 20 की तेजी आ गई है। युद्ध के पहले जो प्लास्टिक की बोरी 10 रुपये प्रति पीस बिक रही थी, अब 12-13 रुपये में मिल रही है। प्लास्टिक दाना महंगा होने से हर पैकेजिंग आइटम के दाम बढ़ गए हैं। -महेंद्र कुमार गुप्ता, अध्यक्ष बारदाना व्यापार मंडल कानपुर