शापित आंगन: '48 महीने और छह अर्थियां', एक-एक कर पिता-पांच बेटों की मौत, अब भरण-पोषण को भी मोहताज, पढ़ें कहानी
Kanpur Sikatiya Village Family Tragedy: सिकटिया गांव में पिछले चार वर्षों के भीतर एक ही परिवार के पिता और पांच बेटों की संदिग्ध परिस्थितियों व बीमारी में मौत हो गई है। इस भीषण त्रासदी ने परिवार को आर्थिक तंगी की कगार पर ला खड़ा किया है, जहां अंतिम संस्कार के लिए भी ग्रामीणों को चंदा जुटाना पड़ा।
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कानपुर में महाराजपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सिकटिया गांव से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां पर लोग भगवान से भी सवाल पूछते नजर आ रहे हैं कि भगवान आखिर किसी परिवार से इतना रुष्ठ कैसे हो सकते हैं। यहां मात्र चार वर्ष के भीतर लगातार छह मौतें हुईं हैं। इस घटना ने सबको झकझोर कर रख दिया है।
29 सितंबर 2022 की वो तारीख इस घर के लिए कयामत बनकर आई। उस दिन प्रेम कुमार गुप्ता पुत्र स्वर्गीय किशन कुमार गुप्ता की मौत हुई और यहीं से सिलसिला शुरू हुआ, जो चार साल में पूरे परिवार को उजाड़ गया। इसके बाद 17 नवंबर 2023 को सुधीर गुप्ता कानपुर में किराये के मकान में आग लगने से संदिग्ध हालात में चल बसे।
एक-एक कर पांच बेटों और पिता की मौत
10 अक्टूबर 2023 को किशन कुमार गुप्ता ने दुनिया को अलविदा कहा। 24 अक्टूबर 2024 को सोहन गुप्ता ने घर में फंदा लगाकर जान दे दी। फिर एक जुलाई 2026 को छोटू और 10 जुलाई को मोहन गुप्ता भी नहीं रहे। बीमारी और संदिग्ध हालातों ने एक-एक कर पांच बेटों और पिता को निगल लिया।
न सिर्फ रिश्ते छीने, घर की कमर भी तोड़ दी
हरे-भरे आंगन में कभी बच्चों की किलकारी गूंजती थी, आज वहां सिर्फ सिसकियों की आवाज है। मां रामजानकी की गोद सूनी हो गई है, अब घर में सिर्फ बड़ा बेटा शंकर, छोटी बेटी खुशी और बूढ़ी मां बची हैं। रो-रोकर तीनों का बुरा हाल है। लगातार मौतों ने न सिर्फ रिश्ते छीने, बल्कि घर की कमर भी तोड़ दी है।
अर्थी उठाने के लिए भी मोहताज होना पड़ा
आर्थिक हालात इतने बिगड़ गए कि 10 जुलाई को मोहन गुप्ता के अंतिम संस्कार का सामान तक घर में नहीं था। पड़ोसियों ने चंदा इकट्ठा कर अर्थी सजाई और दाह संस्कार की जिम्मेदारी उठाई। जिस घर में कभी शादियों के ढोल बजते थे, वहां अब अर्थी उठाने के लिए भी मोहताज होना पड़ा। गांव वाले कहते हैं कि भगवान आखिर इतना कैसे रूठ सकता है।
सवाल- टूटे परिवार को अब कौन सहारा देगा
चार साल में एक पिता और पांच बेटे चले गए। घर पर अब खाने के लाले हैं। कमाने वाला कोई नहीं बचा। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने राजस्व विभाग से मदद की गुहार लगाई है। एक साथ छह मौतों ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। हर आंख नम है और हर जुबान पर यही सवाल है कि इस टूटे परिवार को अब कौन सहारा देगा।
विभाग की तरफ से दिया जा सकता है पारिवारिक लाभ
डीडीओ आत्म प्रकाश रस्तोगी ने बताया कि इस तरह के मामलों में राजस्व विभाग की तरफ से पारिवारिक लाभ दिया जा सकता है। इसके साथ ही मृतकों की मां को विधवा पेंशन दी जा सकती है। इसके अतिरिक्त यदि कुछ सहयोग हो सकता है, तो जांच कर कराई जाएगी।