Kanpur: पिता का नाम रामपाल, रंग बहादुर का बेटा बन 29 साल की नौकरी, कॉलेज का चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बर्खास्त
Kanpur News: बिरहाना रोड स्थित इंटर कॉलेज में 29 साल से फर्जी तरीके से नौकरी कर रहे कर्मचारी शिवबहादुर को बर्खास्त कर दिया गया है। आरोपी ने खुद को दिवंगत कर्मचारी का बेटा बताकर सरकारी खजाने को चूना लगाया था।
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कानपुर में ज्ञान भारती एमएस इंटर काॅलेज बिरहाना रोड में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की हेराफेरी का बड़ा मामला सामने आया है। नौकरी के लालच में युवक ने दिवगंत कर्मचारी के फर्जी दस्तावेज तैयार किए और मृतक आश्रित में नौकरी पा ली। यही नहीं वह 29 साल तक वेतन भी लेता रहा। शिक्षक नेता की शिकायत पर मामले की जांच में आरोपी अपने साक्ष्य नहीं प्रस्तुत कर सका। डीआईओएस ने तत्काल प्रभाव ने कर्मचारी को बर्खास्त कर विधिक कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं।
कर्मचारी से रिकवरी की जाएगी। नौकरी पाने के लिए एक युवक कॉलेज के दिवंगत कर्मचारी रंग बहादुर का पुत्र बन गया। अफसरों ने बताया कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शिवबहादुर मूल रूप से अयोध्या का रहने वाला है, उसने अपने पिता का नाम रंग बहादुर दर्ज कराया है जबकि आठवीं की टीसी में पिता का नाम रामपाल लिखा है। नौवीं के दौरान इसी विद्यालय में दाखिला लेने के दौरान ही पिता का नाम फेरबदल कर रंग बहादुर कर दिया गया।
कोर्ट में दायर की थी याचिका
शिवबहादुर ने साल 1996 में विद्यालय के कर्मचारी रंग बहादुर यादव की मृत्यु होने के बाद खुद को उनका पुत्र बताकर फर्जी दस्तावेज तैयार कर नौकरी हासिल की थी। इसी नाम से 29 साल तक नौकरी करता रहा। विभाग का कहना है कि रंग बहादुर के परिवारजनों ने इसके खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की थी और जीत भी गए थे, लेकिन फिर मामला अपर जिला न्यायालय और हाईकोर्ट में चलता रहा। इसी का लाभ लेकर वह नौकरी करता रहा
बर्खास्तगी और रिकवरी करने के आदेश
बीते साल 20 सितंबर 2025 को उन्नाव के एक शिक्षक नेता ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की थी। जांच के लिए 26 सितंबर 2025 को सह जिला विद्यालय निरीक्षक प्रशांत द्विवेदी की अगुवाई में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई थी। जांच समिति ने रिपोर्ट जिला विद्यालय निरीक्षक डाॅ. संतोष कुमार राय को भेजी थी। जिला विद्यालय निरीक्षक ने बताया कि आरोपी ने आरोपों पर अपना पक्ष और साक्ष्य नहीं प्रस्तुत किए। जांच समिति की रिपोर्ट पर कर्मचारी को बर्खास्त करने और रिकवरी करने के आदेश प्रधानाचार्य को दिए हैं।
