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Kanpur: बिना अनुमति जेई का बड़ा खेल, 64 बीघा जमीन भूस्वामियों के नाम दर्ज की, डीएम ने 10 मामलों की भेजी रिपोर्ट

Sat, 01 Aug 2026 02:25 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Sat, 01 Aug 2026 02:25 PM IST
सार

Kanpur News: कानपुर के नगर भूमि सीलिंग विभाग में तैनात रहे जेई अशोक कुमार मिश्र पर 64 बीघा से अधिक सरकारी जमीन (कीमत 500 करोड़ से ज्यादा) को बिना अनुमति सील मुक्त कर भूस्वामियों के नाम दर्ज करने का बड़ा आरोप लगा है। वर्तमान जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने मामले की जांच रिपोर्ट प्रमुख सचिव को भेजकर जमीन को दोबारा सरकारी खाते में दर्ज करने की बात कही है।

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Kanpur JE unauthorized maneuver 64 bighas of land registered in the names of landowners DM submits report
सांकेतिक - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में रानी घाट स्थित नगर भूमि सीलिंग विभाग में 64 बीघे से अधिक सरकारी जमीन को नियमों की अनदेखी कर सील से मुक्त कराकर भूमि स्वामियों के नाम दर्ज कर दिया। 500 करोड़ से अधिक की सरकारी जमीन को वहां पर तैनात जेई अशोक कुमार मिश्रा ने निजी हाथों में सौंपने के खेल में सिर्फ अधिकारियों को अंधेरे में नहीं रखा गया, बल्कि दो जिलाधिकारियों की कार्रवाई संबंधी रिपोर्ट को भी शासन तक पहुंचने से रोकता रहा।

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जेई नगर भूमि सीलिंग विभाग में 34 वर्ष की सेवा देने के बाद सेवानिवृत्त हो गया अब आवास विकास परिषद मुख्यालय लखनऊ में संविदा में रहकर फाइलों को निपटा रहा है। हालांकि वर्तमान जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने 10 मामलों की जांच रिपोर्ट प्रमुख सचिव, आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को भेजने के साथ-साथ जमीन को दोबारा सरकारी खाते में दर्ज कर सील करने की बात कही है।

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एनओसी जारी कर भूमि स्वामियों के नाम दर्ज कर दी जमीन
बता दें कि अर्बन सीलिंग कार्यालय में जेई अशोक कुमार मिश्र वर्ष 1992 से 2021 तक तैनात रहा। आरोप था कि इसी दौरान लिपिक संजीव सक्सेना के साथ मिलकर मसवानपुर, बिनगवां क्षेत्र में सैकड़ों बीघे अर्बन सीलिंग की जमीन को जिलाधिकारी और अपर जिलाधिकारी की अनुमति के बिना स्वयं अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी कर वापस भूमि स्वामियों के नाम दर्ज कर दी।

जमीन पर नियम विरुद्ध आदेश पारित किया
इसको लेकर वर्ष 2023 से शिकायतें शुरू हो गईं थी जिसमें बताया गया कि 10 मामलों में 1,62,335.72 वर्गमीटर (करीब 64 बीघा) से अधिक सरकारी जमीन पर नियम विरुद्ध आदेश पारित किया गया है। इनमें सबसे बड़ी भूमि 42,505 वर्गमीटर (करीब 17 बीघा) और 37,465 वर्गमीटर (करीब 15 बीघा) है। आरोपों की जांच कराने पर पता चला कि जेई ने कई मामलों में वर्ष 1984, 1986 और 2000 में कब्जा लेने के नोटिस जारी होने के बावजूद वर्षों बाद नामांतरण कर दिया।

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पत्र भेजकर जांच और कार्रवाई की मांग
इसमें अधिकांश जमीन बाद में भूमाफिया को बेच दी गईं। इसके बाद जनवरी 2024 को तत्कालीन जिलाधिकारी विशाख जी ने मसवानपुर में एक ही दिन में चार बीघा जमीन सील से मुक्त किए जाने के मामले में रिपोर्ट भेजी थी जिसपर आजतक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद फिर शिकायतों का सिलसिला शुरू हुआ, तो तत्कालीन जिलाधिकारी राकेश सिंह ने जुलाई और सितंबर 2024 को प्रमुख सचिव को दो अलग-अलग पत्र भेजकर जांच और कार्रवाई की मांग की थी।

कई मूल अभिलेख और फाइलें गायब
यानी दो जिलाधिकारियों के पत्रों के बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। इसके बाद वर्तमान जिलाधिकारी को भी मामले की रिपोर्ट सौंपकर कार्रवाई की मांग की गई। जिलाधिकारी ने 10 मामलों की करीब 64 बीघा सील जमीन के वादों की रिपोर्ट जून में प्रमुख सचिव को भेजी थी। इसके बाद सेवानिवृत्त जेई अशोक कुमार मिश्र की जानकारी लेने पर पता चला कि अब वह संविदा पर तैनात होकर इन फाइलों और पत्रों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचने से रोक रहा है। यही नहीं कार्यालय से कई मूल अभिलेख और फाइलें गायब हैं।

इन जमीनों के 10 नए मामलों की भेजी रिपोर्ट

वाद                                           भूमि (वर्गमीटर)
सरकार बनाम राजेश कुमार             8,141.37
सरकार बनाम हरदीन                     5,214.05
सरकार बनाम राम सजीवन            26,960
सरकार बनाम होरीलाल                 42,505.34
सरकार बनाम दयाराम                 1,911.60
सरकार बनाम राम प्रसाद              9,447.60
सरकार बनाम सिद्धी                     9,970
सरकार बनाम धनीराम                 37,465.76
सरकार बनाम लल्लू                     20,720
सरकार बनाम एमवी पाइप            क्षेत्रफल अंकित नहीं

यह होती है सीलिंग की जमीन
सीलिंग की जमीन का मतलब उस अधिकतम कानूनी सीमा से अधिक तय की गई जमीन से है जिसे सरकार कानून के तहत किसी व्यक्ति या परिवार के पास रखने की अनुमति देती है। तय सीमा से ज्यादा निकलने वाली जमीन को सरकार अपने कब्जे में ले लेती है और भूमिहीन गरीबों या किसानों को खेती के लिए आवंटित करती है।

नियमों की अनदेखी कर जेई ने भूमि को सीलिंग से मुक्त कर वापस भूस्वामियों के नाम दर्ज कर दी। इसको लेकर शासन रिपोर्ट भेजी गई है। जल्द ही भूमि वापस सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होगी और फर्जीवाड़ा करने पर कार्रवाई होगी।  -डॉ. विवेक चतुर्वेदी, एडीएम वित्त

मामला तीन-चार साल पुराना है। इसकी रिपोर्ट पहले भी भेजी जा चुकी है। शासन से इसकी रिपोर्ट मांगी गई थी। वह जांच रिपोर्ट भेज दी गई है। शासन से अनुमति मिलते ही जमीन को सरकारी रिकाॅर्ड में फिर से दर्ज कराया जाएगा।  -जितेंद्र प्रताप सिंह, डीएम

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