खास खबर: शेयर बाजार में कानपुर का दबदबा, हैदराबाद-जयपुर जैसे शहरों को पीछे छोड़ा, सेबी की रिपोर्ट में खुलासा
Kanpur News: सेबी की जून 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार, शेयर बाजार के कैश सेगमेंट में कानपुर ने हैदराबाद, वडोदरा और जयपुर जैसे बड़े शहरों को पीछे छोड़ दिया है। एनएसई में कानपुर की हिस्सेदारी 0.16 फीसदी और बीएसई में 0.04 फीसदी दर्ज की गई है।
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वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद कानपुर ने देश के प्रमुख निवेश केंद्रों में अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखी है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की जून 2026 तक की सिटी-वाइज डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ टर्नओवर ऑन कैश सेगमेंट्स रिपोर्ट के अनुसार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के नकद खंड में कानपुर की हिस्सेदारी 0.16 फीसदी रही।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में भी शहर की हिस्सेदारी 0.04 फीसदी दर्ज की गई। इस तरह शहर हैदराबाद, वडोदरा और जयपुर समेत कई शहरों से आगे निकल गया है। ये आंकड़ें शहर की निवेश गतिविधियों की स्थिरता का संकेत देते हैं। मौजूदा वित्त वर्ष में कानपुर के निवेशकों ने नकद खंड में करीब 220 करोड़ रुपये प्रतिदिन का कारोबार किया है।
कैश सेगमेंट्स में कानपुर की हिस्सेदारी
केश्री ब्रोकिंग के सह-संस्थापक राजीव सिंह ने बताया कि सेबी के आंकड़ों के अनुसार जून 2026 में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के कैश सेगमेंट्स में कानपुर की हिस्सेदारी हैदराबाद (0.06 फीसदी) से अधिक रही। वडोदरा (0.06 फीसदी), जयपुर (0.11 फीसदी), कोयंबटूर (0.02 फीसदी) और लुधियाना (0.02 फीसदी) की हिस्सेदारी भी कानपुर से कम थी।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में भी 0.04 फीसदी हिस्सेदारी
पुणे की हिस्सेदारी भी 0.16 फीसदी रही। इससे कानपुर इन बड़े औद्योगिक शहर के आगे खड़ा दिखाई देता है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में भी कानपुर की 0.04 फीसदी हिस्सेदारी एर्नाकुलम, कोयंबटूर, लुधियाना और गुवाहाटी जैसे शहरों से अधिक है। उन्होंने बताया कि बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद कानपुर की हिस्सेदारी 0.15 से 0.17 फीसदी के दायरे में बनी रही है।
वित्तीय जागरूकता और डिजिटल निवेश का विस्तार
यह शहर की मजबूत निवेश संस्कृति को दर्शाता है। वित्तीय जागरूकता और डिजिटल निवेश का विस्तार जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में कानपुर निवेश के प्रमुख केंद्रों में और मजबूत होकर उभरेगा। हालांकि मुंबई (61.47 फीसदी), अहमदाबाद (19.46 फीसदी), बंगलूरू (5.99 फीसदी), दिल्ली (1.37 फीसदी) और कोलकाता (1.12 फीसदी) जैसे बड़े वित्तीय केंद्र अभी भी कारोबार में सबसे आगे हैं।