पुरवामीर कांड: क्रूरता के शिकार मासूमों का मेडिकल टेस्ट, बंधुआ मजदूरी कराने पहुंचे ढोंगी समाजसेवी बेनकाब
Kanpur News: महाराजपुर के पुरवामीर में पीड़ित चार बच्चों का एसडीएम के निर्देश पर सरसौल सीएचसी की टीम ने मेडिकल परीक्षण किया। इस बीच, बच्चों को बहलाकर मजदूरी कराने की कोशिश करने वाले एक तथाकथित समाजसेवी को बच्चों ने ही बेनकाब कर दिया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कानपुर में महाराजपुर के पुरवामीर गांव में चाचा‑चाची की क्रूरता का शिकार बने चारों बच्चों का बुधवार को एसडीएम के निर्देश पर स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। सरसौल सीएचसी से पहुंचे डॉक्टर अरुणेंद्र ने बताया कि इस समय बच्चे मानसिक रूप से सबसे अधिक परेशान हैं।
उन्होंने कहा कि दवा के साथ खेलने‑कूदने की आज़ादी और खुला वातावरण बच्चों के लिए सबसे बड़ी ज़रूरत है। डॉक्टर ने समझाया कि बच्चों को प्रोत्साहन देना ही सबसे बड़ी दवा है। उन्होंने कहा कि एक समय भोजन न मिले तो भी हिम्मत और आत्मविश्वास बहुत जरूरी है।
चारों बच्चों का सैंपल लिया गया है
बच्चों को आम लोगों, अध्यापकों और डॉक्टरों से मिलाना चाहिए, ताकि उनका आत्मविश्वास बढ़े। इलाज के साथ खेलकूद और खुला वातावरण उन्हें क्रूरता भरे जीवन को पीछे छोड़ आगे बढ़ने की ताकत देगा। चारों बच्चों का सैंपल लिया गया है और खून सहित कई तरह की जांचें कराई गई हैं।
आपदा में अवसर तलाश रहे ढोंगी समाजसेवी
एक ओर जहां लोग मासूम बच्चों की मदद के लिए लगातार हाथ आगे बढ़ा रहे है। शासन-प्रशासन भी अपने स्तर पर बच्चों की मदद के लिए आवश्यक कदम उठा रहे हैं। वहीं, कुछ शहर से कुछ ऐसे भी समाजसेवी बच्चों के पास पहुंच रहे है, जो उनको बंधुआ मजदूरी कराना चाहते है और मजदूरी देकर काम कराना चाहते है।
महोदय मात्र सौ रुपये देते चलते बने
बुधवार को पहुंचे एक समाजसेवी ने सबसे बड़े किशोर से कहा कि हमारे घर चलो काम करना पांच हजार रुपये प्रतिमाह देंगे। जब किशोर ने अन्य तीन बच्चों का हवाला देते हुए कहा कि इनकी देखभाल कौन करेगा। इनको भी साथ लेते चले, तो महोदय बच्चों को मात्र सौ रुपये देते हुए वहां से चलते बने।