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कानपुर में बच्चों के हक पर ‘डाका’: 69 आंगनबाड़ी केंद्रों की नींव तक नहीं खुदी, 148 का निर्माण अधूरा, ये है हाल

रजत यादव, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Thu, 23 Apr 2026 08:18 AM IST
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सार

Kanpur News: कानपुर में 173 में से 148 आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण अफसरों की लापरवाही और बजट के फेर में अधर में लटका है। सात करोड़ रुपये जारी होने के बावजूद 69 केंद्रों की नींव तक नहीं खुदी है, जिससे बच्चों को बेहतर शिक्षा देने की योजना कागजों तक सीमित रह गई है।

Kanpur Officials Fail to Even Dig Foundations for 69 Anganwadi Centers Construction of 148 centers incomplete
लापरवाही का ये है हाल - फोटो : amar ujala
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विस्तार

कानपुर में आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण योजना अफसरों की लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। तीन साल बीतने के बाद भी 148 केंद्रों का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। 69 केंद्रों की तो नींव भी नहीं खोदी जा सकी है। केवल 25 केंद्रों का निर्माण ही पूरा हो पाया है।

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बीते दो साल में 173 आंगनबाड़ी केंद्र बनाने के लिए सात करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट जारी हुआ था। इसका मकसद बच्चों को बेहतर शिक्षा, बैठने की व्यवस्था और खेलने के साधन उपलब्ध कराना था। एक केंद्र के निर्माण पर 12 लाख रुपये खर्च होने का प्रावधान है।

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मनरेगा विभाग को करना था मजदूरी का भुगतान
इसमें दो लाख रुपये बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को देने थे। दो लाख रुपये पंचायतीराज विभाग को और शेष आठ लाख रुपये मनरेगा से खर्च होने थे। दोनों विभागों ने धनराशि ग्राम पंचायतों को जारी कर दी थी, लेकिन मजदूरी का भुगतान मनरेगा विभाग को करना था।

कुल 25 केंद्रों का निर्माण ही पूरा हो सका
वर्ष 2023 में 58 केंद्रों के लिए पैसा जारी किया गया था, जिसमें से केवल 22 ही बन सके। इसके बाद वर्ष 2024-25 में 151 केंद्रों के लिए पैसा जारी हुआ, लेकिन इनमें से सिर्फ तीन ही बन पाए। इस प्रकार, तीन वर्षों में कुल 25 केंद्रों का निर्माण ही पूरा हो सका है। 69 केंद्रों की नींव आज तक नहीं भरी जा सकी है।

केंद्रों का निर्माण अभी और अधिक विलंबित होने की संभावना
निर्माण कार्यों की मासिक बैठकों में सचिव से लेकर बीडीओ तक को कई बार नोटिस जारी किए गए। हालांकि, केंद्रों का निर्माण कार्य फिर भी पूरा नहीं हो सका। जब जवाबदेही तय करने की बात आई, तो जिम्मेदार अफसरों ने मनरेगा से पैसा न मिलने को देरी का मुख्य कारण बताया। अब प्रधान भी अपने कार्यकाल समाप्त होने के कारण निर्माण कार्य कराने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इन केंद्रों का निर्माण अभी और अधिक विलंबित होने की संभावना है।

बाल विकास और पंचायती राज विभाग की तरफ से दी जाने वाली धनराशि ग्राम पंचायतों के खाते में भेज दी गई है। अभी तक 25 केंद्रों का ही सिर्फ निर्माण पूरा हो सका है। अन्य की भी कार्य प्रगति में है, जल्द वो भी निर्माण पूरे होंगे।  -प्रीती सिंहा, जिला कार्यक्रम अधिकारी

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