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कारगिल विजय दिवस: शहीद के माता-पिता को सरकार से तो मदद मिली पर बेटे के बाद बहू से मिली नाउम्मीदी
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 26 Jul 2019 03:30 AM IST
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कारगिल शहीद जगदीश यादव (फाइल फोटो) एवं घर पर मां तुलसीरानी
- फोटो : अमर उजाला
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कारगिल युद्ध में शहीद हुए जगदीश यादव के माता पिता मुफलिसी के दौर से गुजर रहे हैं। कहने को तो सरकार से सब कुछ मिला, लेकिन उनके हाथ कुछ नहीं आया।
जगदीश की शहादत के 15 दिन बाद पत्नी राजकुमारी सास-ससुर को छोड़कर मायके झांसी चली गई थी। सरकारी मदद राजकुमारी को ही मिली। बाद में उन्होंने दूसरी शादी कर ली और वहीं रहने लगीं।
शहीद के मां बाप बेचारे अकेले रह गए। कोतवाली क्षेत्र के ग्राम पचपहरा निवासी जगदीश यादव को 1990 में मराठा यूनिट में तैनाती मिली थी।
जगदीश की मां तुलसारानी बताती हैं कि नौ साल सेवा करने के बाद लांसनायक बने। वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध में उन्हें भेजा गया। वहां दुश्मन से लड़ते हुए वे शहीद हो गए।
भावुक होकर कहती हैं कि वक्त मुश्किलों भरा बीता लेकिन बेटे की शहादत पर गर्व है। शहीद के भाई दयाशंकर यादव कहते हैं कि माता-पिता के साथ वह भाभी को मनाने के लिए कई बार झांसी गए लेकिन वे नहीं मानीं।
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जगदीश की शहादत के 15 दिन बाद पत्नी राजकुमारी सास-ससुर को छोड़कर मायके झांसी चली गई थी। सरकारी मदद राजकुमारी को ही मिली। बाद में उन्होंने दूसरी शादी कर ली और वहीं रहने लगीं।
शहीद के मां बाप बेचारे अकेले रह गए। कोतवाली क्षेत्र के ग्राम पचपहरा निवासी जगदीश यादव को 1990 में मराठा यूनिट में तैनाती मिली थी।
जगदीश की मां तुलसारानी बताती हैं कि नौ साल सेवा करने के बाद लांसनायक बने। वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध में उन्हें भेजा गया। वहां दुश्मन से लड़ते हुए वे शहीद हो गए।
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भावुक होकर कहती हैं कि वक्त मुश्किलों भरा बीता लेकिन बेटे की शहादत पर गर्व है। शहीद के भाई दयाशंकर यादव कहते हैं कि माता-पिता के साथ वह भाभी को मनाने के लिए कई बार झांसी गए लेकिन वे नहीं मानीं।