UP: कानपुर के नर्सिंगहोम में हुआ था किडनी ट्रांसप्लांट; दो का था प्लान पर एक हुआ, OT टेक्नीशियंस ने खोले राज
Kanpur News: कानपुर किडनी कांड में गिरफ्तार ओटी टेक्नीशियनों ने रेलवे क्रॉसिंग के पास स्थित एक नामी नर्सिंगहोम का नाम बताया है, जहां हाल ही में ट्रांसप्लांट हुआ था। पुलिस ने अस्पताल के दो कर्मचारियों को हिरासत में लिया है और फरार डॉक्टरों की तलाश तेज कर दी है।
विस्तार
कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट प्रकरण में शहर के बड़े और नामी नर्सिंगहोम का नाम सामने आया है। यहां कुछ दिन पहले ही गुर्दा प्रत्यारोपित हुआ था। यह जानकारी पुलिस को गुरुवार को गिरफ्तार हुए ओटी टेक्नीशियन कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार से पूछताछ में हुई है। दोनों ने अधिकारियों को बताया है कि यह नर्सिंगहोम रेलवे क्रॉसिंग के नजदीक बना हुआ है। रोजाना काफी संख्या में मरीज आते हैं।
कई छोटे-बड़े ऑपरेशन भी होते हैं। पुलिस ने नर्सिंगहोम के दो स्टाफ को हिरासत में लिया है। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार दोनों ओटी टेक्नीशियन हैं। राजेश कुमार का प्रमोशन हो गया है। उसे ओटी मैनेजर बना दिया गया है। उसका वेतन 70 हजार महीना है जबकि कुलदीप को 42 हजार रुपये मिलते हैं। दोनों डॉ. रोहित के संपर्क में थे। डॉ. रोहित एनेस्थीसिया के डॉक्टर हैं।
एनसीआर ही नहीं कई क्षेत्रों में फैला हुआ है नेटवर्क
उसका संबंध सर्जन डॉ. अली और डॉ. सैफ के साथ में है। दोनों ने पैरामेडिकल स्टाफ अखिलेश और शैलेश के बारे में भी बताया है। ये सभी गाजियाबाद के वैशाली क्षेत्र के बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल से जुड़े हुए हैं। ये कई बार शहर आ चुके हैं। पुलिस की कई टीमें आरोपियों की तलाश में लगा दी गई हैं। क्राइम ब्रांच और साइबर क्राइम ब्रांच की टीमें भी सक्रिय हैं। किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े आरोपियों का नेटवर्क सिर्फ एनसीआर ही नहीं कई क्षेत्रों में फैला हुआ है। इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।
डॉक्टरों की टीम करने आई थी दो ट्रांसप्लांट
डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि डॉक्टरों की दोनों टीम रविवार देर रात दो किडनी ट्रांसप्लांट करने के लिए आई थी, लेकिन एक ही करके चली गई थी। यह जानकारी दोनों ओटी टेक्नीशियन ने पूछताछ में दी है। दोनों ने झारखंड और नेपाल के दो डोनरों की जानकारी दी है। पुलिस की टीमें उनकी तलाश में लग गई हैं। जिस रोगी को किडनी लगानी थी, वह भी शहर के नर्सिंगहोम में उपचाराधीन है। शुक्रवार को उनके परिजनों से जानकारी जुटाई जाएगी।
मामले में दो ओटी टेक्नीशियन हुए हैं गिरफ्तार
आहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट करने के लिए एनसीआर क्षेत्र से यूरोलॉजिस्ट और दो ओटी टेक्नीशियन आए थे। रावतपुर पुलिस ने गुरुवार को गाजियाबाद के राजेश कुमार और हापुड़ के कुलदीप सिंह राघव को दहलन क्रॉसिंग से गिरफ्तार किया जबकि यूरोलॉजी के सर्जन की तलाश जारी है। राजेश कुमार नोएडा के सर्वोदय हॉस्पिटल और कुलदीप सिंह राघव गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित शांति गोपाल नर्सिंगहोम में ओटी टेक्नीशियन हैं।
आहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था
दोनों से टीम में शामिल डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की जानकारी की गई। दोनों को कोर्ट में पेश किया गया जहां से जेल भेज दिया गया। डीसीपी पश्चिम एमएम कासिम आबिदी ने बताया कि रविवार देर रात आहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था। यहां बिहार के बेगूसराय के आयुष की एक किडनी मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर को लगाई गई थी। सर्जरी के बाद एक टीम रेलबाजार क्षेत्र से बुक हुई किया कैरेंस कार से गाजियाबाद के वैशाली तक गई।
डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ की जानकारी जुटा रही है पुलिस
यहां यूरोलॉजी के सर्जन और दोनों ओटी टेक्नीशियन कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार को छोड़कर लौट आई। पुलिस ने जानकारी जुटाकर दोनों ओटी टेक्नीशियन को गिरफ्तार कर लिया। दूसरी टीम लखनऊ के ट्रांसपोर्टनगर तक गई। इसमें भी डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ सवार थे। सभी ने चेहरे पर मास्क लगा रखा था जबकि आपस में किसी अन्य सर्जरी पर विचार विमर्श कर रहे थे। उनके बीच कुछ दिन पहले दमन और दीव की यात्रा को लेकर भी बातचीत हुई। पुलिस उस टीम के डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ की जानकारी जुटा रही है।
लेते थे 40 से 50 हजार रुपये
पांचों शहर से बुक हुई अर्टिगा कार से लखनऊ गए थे। पुलिस ने कार चालक से पूछताछ की। उसने पांचों के वाया हवाई जहाज दूसरे शहरों में जाने को लेकर बातचीत होने की जानकारी दी। गाजियाबाद के डॉक्टर और दोनों ओटी टेक्नीशियन भी रविवार को दिल्ली से कानपुर आने वाली फ्लाइट से शहर पहुंचे थे। ओटी टेक्नीशियन राजेश कुमार और कुलदीप सिंह राघव हर केस के 40 से 50 हजार रुपये लेते थे। उनकी जिम्मेदारी गुर्दा प्रत्यारोपण से पहले संसाधन मुहैया कराना और पूरी तैयारी रखना था।
जरूरी उपकरण, इंजेक्शन, दवाएं और अन्य संसाधनों को कराते थे मुहैया
दोनों ओटी टेक्नीशियन हमेशा फ्लाइट से शहर आया करते थे। दवाएं, इंजेक्शन और उपकरणों को किस तरह से तैयार करना है, यह सब जिम्मेदारी दोनों की थी। दवाएं, इंजेक्शन और एंटीबायोटिक भी यही लेकर आया करते थे। पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि गुर्दा प्रत्यारोपण के बाद किडनी के मरीज और डोनर को पर्चे पर लिखे परामर्श यही दिया करते थे। इस पर्चे पर यूरोलॉजी के सर्जन का परामर्श रहता था। दोनों ओटी टेक्नीशियन की जान पहचान एनसीआर क्षेत्र के बड़े दवा और सर्जिकल आइटम की फर्मों से मिली है।
शनिवार और रविवार को होते थे ट्रांसप्लांट
डीसीपी पश्चिमी जोन के मुताबिक ओटी टेक्नीशियन कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार ने बताया है कि दोनों पहले भी आठ से दस बार शहर आ चुके हैं। आहूजा नर्सिंगहोम के अलावा एक बड़े नर्सिंगहोम की जानकारी दी है। दोनों उसका पता नहीं बता सके लेकिन वहां की लोकेशन बताई है। पुलिस दोनों को गुरुवार को कुछ क्षेत्रों पर ले गई थी। जांच में सामने आया है कि शहर में किडनी ट्रांसप्लांट का खेल शनिवार या रविवार को होता था। डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ को हवाई जहाज से शहर लाया जाता था। दोनों लैब टेक्नीशियन एक बार एसी स्लीपर बस से कानपुर आ चुके हैं। केशवपुरम और रावतपुर के होटलों में उन्हें रोका जाता था। इसकी जिम्मेदारी शिवम अग्रवाल की रहती थी।
सीसीटीवी कैमरे में दोनों कारों की फुटेज आ गई
पकड़े गए दोनों ओटी टेक्नीशियन का सीसीटीवी कैमरों और यूपीआई भुगतान से सुराग मिला और हत्थे चढ़ गए। डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी के मुताबिक आहूजा हॉस्पिटल में गुर्दा प्रत्यारोपण के बाद रविवार की रात लगभग तीन बजे दो कारें निकली थीं। हॉस्पिटल के सीसीटीवी कैमरे बंद थे, लेकिन नजदीक के प्रतिष्ठान में लगे सीसीटीवी कैमरे में दोनों कारों की फुटेज आ गई थी। आहूजा हॉस्पिटल से किया कैरेंस कार गाजियाबाद और अर्टिगा लखनऊ के ट्रांसपोर्टनगर के लिए रवाना हुई।