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सरकारी बैंक शाखाओं में नई करेंसी सप्लाई में इस तरह हो रही हेरफेर, पढ़ें ये खास रिपोर्ट

Tue, 18 Sep 2018 03:14 PM IST
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर Updated Tue, 18 Sep 2018 03:14 PM IST
सार

- सरकारी बैंक शाखाओं में भेजी जा रही पुरानी करेंसी, प्राइवेट बैंकों में आसानी से उपलब्ध हैं नए नोट
- एसबीआई की कई शाखाओं की रैंडम जांच में सामने आया करेंसी सप्लाई करने वाली एजेंसी का खेल
- एजेंसी की ओर से जारी टीआर एडवाइस में दिखाए जाते हैं नए नोट पर बैंक पहुंचते हैं पुराने

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डेमो पिक
सरकारी बैंक शाखाओं में करेंसी सप्लाई करने वाली एजेंसी नई करेंसी सप्लाई करने में हेरफेर कर रही है। एसबीआई की कई शाखाओं में रैंडम जांच के दौरान यह खुलासा हुआ है। जांच में पता चला कि बैंकों में आने वाली ट्रांसपोर्ट रेस्पांडर (टीआर) एडवाइस में तो नए नोट सप्लाई की जानकारी होती है जबकि फिजिकली वैरीफिकेशन में पुराने नोट मिलते हैं। वहीं जानकारों का कहना है कि प्राइवेट बैंकों को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसा किया जा रहा है जो गलत है। इसकी जांच होनी चाहिए।


दरअसल बैंकों को आउट सोर्स करेंसी एजेंसी के माध्यम से प्रतिदिन विभिन्न शाखाओं में करेंसी पहुंचानी होती है। सरकारी बैंकों में कैश रिटेनशन लिमिट के तहत 10 लाख रुपये तक ही शाखा में रखना होता है। इससे ज्यादा करेंसी होने पर उसे लौटाना पड़ता है। सूत्रों ने बताया कि करेंसी सप्लाई करने वाली एजेंसी करेंसी जारी करने से पहले एक कंप्यूटराइज्ड टीआर एडवाइस सभी बैंक शाखाओं में भेजती है।
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इसमें भेजे जाने वाले नोटों का जिक्र  रहता है। सूत्रों ने बताया कि इस एडवाइस में नोट भेजने के साथ करेंसी की भी जानकारी रहती है। मसलन दो हजार के कितने नोट हैं, पांच सौ के कितने या फिर सौ या दो सौ के कितने नए नोट हैं। सूत्रों ने बताया कि सितंबर के पहले सप्ताह में कई शाखाओं में नए नोट (सौ का नया नोट) न आने पर रैंडम जांच की गई तो इस गड़बड़ी की जानकारी मिली। बैंक शाखाओं के सूत्रों का कहना है कि नई करेंसी न मिलने की शिकायत की गई है। 

चल रहा है खेल

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सूत्रों ने बताया कि एसबीआई की बिजनेस शाखाओं से यदि नई करेंसी जारी होने, बैंक की शाखाओं में पहुंचने की जांच कराई जाए तो पूरा खेल पकड़ में आ जाएगा। प्राइवेट बैंकों को लाभ पहुंचाने के लिए यह खेल किया जा रहा है। इसमें एजेंसी से जुड़े लोग शामिल हो सकते हैं।
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इसलिए बैंक नहीं लौटाते पुरानी करेंसी

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बैंक के सूत्रों ने बताया कि करेंसी आने की प्रक्रिया में लंबा समय लगता है। बैंक में स्टाफ भी बेहद कम है। ऐसे में जब एजेंसी करेंसी भेजती है तो पुरानी करेंसी आने के बाद भी बैंक ग्राहकों की मांग को देखते हुए इस करेंसी को नहीं लौटाते हैं। सूत्रों ने बताया कि सौ का नया नोट आए काफी समय बीत गया है।

एजेंसी से प्रतिदिन भेजी जाने वाली करेंसी में नया नोट भेजने के लिए कहा जाता है। लेकिन आज तक एसबीआई की बड़ी-बड़ी शाखाओं तक में नया नोट नहीं आया है। पुराने सौ के नोट ही भेजे जा रहे हैं। जबकि प्राइवेट बैंकों में आसानी से नए नोट उपभोक्ताओं को उपलब्ध हो जा रहे हैं।
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