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UP के मंदिर में पुजारी का कत्ल: नासिक के पंचवटी आश्रम में 45 साल तक रहे थे महंत, शिष्या के बयान से उलझी कहानी

अमर उजाला नेटवर्क, बांदा Published by: Sharukh Khan Updated Mon, 22 Jun 2026 01:14 PM IST
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सार

यूपी के बांदा जिले में पुजारी के सिर में लाठी से ताबड़तोड़ वार कर हत्या करने का मामला सामने आया है। पूछताछ में शिष्या बार-बार बयान बदल रही है। पुलिस ने शिष्या और उसके मामा को हिरासत में लिया है। 

Priest murdered at Tridev Temple in Banda of UP
banda murder - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

बांदा शहर कोतवाली क्षेत्र के तिंदवारा गांव में त्रिदेव-शनि देव मंदिर की छत पर पुजारी बालब्रह्मचारी सच्चिदानंद महाराज (68) के सिर पर लाठी से ताबड़तोड़ वार कर हत्या कर दी गई। पुजारी से कुछ दूरी पर सो रही उनकी शिष्या ने शोर मचाया तो हमलावर मौके से भाग निकले। वारदात में शिष्या और उसके मामा की भूमिका संदिग्ध मानकर पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाने के साथ लाठी बरामद की है। वहीं हत्या के पीछे की वजह अब तक साफ नहीं हो सकी है।


तिंदवारा गांव में त्रिदेव-शनि देव का मंदिर आबादी से दूर स्थित है। बीते 10 साल से गांव के ही बालब्रह्मचारी सच्चिदानंद महाराज मंदिर की देखरेख और पुजारी का काम करते थे। उनकी शिष्या 25 वर्षीय रोशनी सिंह राजपूत ने पुलिस को बताया कि शनिवार की रात करीब 1:30 बजे मंदिर में घुसे हमलावरों ने सोते समय पुजारी के सिर पर लाठी से ताबड़तोड़ वार कर उन्हें लहूलुहान कर दिया।
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वह उनसे कुछ दूरी पर सोई थी। उनकी चीख सुनकर उसने शोर मचाया। शोर सुनकर मंदिर से 40 मीटर की दूरी पर जानवरों के बाड़े में सो रहे पुजारी के छोटे भाई चिंतामणि की नींद खुली। वह दौड़कर मंदिर आए और बेहोश पुजारी को लेकर रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज गए। इमरजेंसी में प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने पुजारी को कानपुर के लिए रेफर किया।

 

परिजन उन्हें कानपुर न ले जाकर प्राइवेट अस्पताल ले गए, वहां पुजारी ने दम तोड़ दिया। भाई चिंतामणि ने कोतवाली में अज्ञात हमलावर के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस ने आशंका जताई है कि शिष्या से मिलने उसका कोई करीबी आया होगा और पुजारी ने देख लिया होगा। भेद खुल जाने के डर से उसी ने पुजारी पर जानलेवा हमला किया है।
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प्रारंभिक जांच में पुजारी की शिष्या और उसके बांदा कोतवाली क्षेत्र निवासी मामा की भूमिका संदिग्ध है। दोनों हिरासत में हैं। शिष्या पूछताछ में बार-बार बयान बदल रही है। पुजारी और उनकी शिष्या के बारे में विस्तार से पता लगाकर घटना की जांच गहराई से की जा रही है। पुलिस जल्द ही घटना का खुलासा करेगी। - पलाश बंसल, पुलिस अधीक्षक, बांदा।

नासिक के पंचवटी आश्रम में 45 साल तक रहे थे महंत
बांदा के तिंदवारा गांव निवासी सच्चिदानंद महाराज बाल ब्रह्मचारी थे। उन्होंने बचपन में वैराग्य धारण कर लिया था। छोटे भाई चिंतामणि नामदेव ने बताया कि महाराज 45 साल तक नासिक के पंचवटी में महंत की गद्दी पर रहे थे। 10 साल से अपने पैतृक गांव तिंदवारा में आकर त्रिदेव मंदिर को अपना ठिकाना बनाया था। चिंतामणि नामदेव ने बताया कि वह तीन भाई और दो बहनें हैं। सबसे बड़े अशोक नामदेव, फिर सच्चिदानंद, और उनके बाद वह हैं। उनके पास नौ बीघा पैतृक जमीन है। बड़े भाई अशोक और चिंतामणि का परिवार गांव के अंदर आबादी में रहता है। उन्होंने रंजिश से इन्कार किया है। 

 

खुलासे के लिए लगाई गईं पुलिस की चार टीम
पुजारी की हत्या के मामले में सीओ सिटी मेविस टॉक ने बताया कि घटना के खुलासे के लिए चार टीमों को लगाया गया है। घटनास्थल की फॉरेंसिक टीम, डॉग स्क्वायड की टीम ने जांच कर मौके से तकनीकी व महत्वपूर्ण साक्ष्य का संकलन किया है। पुजारी के शरीर पर चोटों के निशान मिले हैं। 

 

तीन घंटे बाद दी सूचना, पांच घंटे में पहुंची पुलिस
सच्चिदानंद महाराज की हत्या की जानकारी पुलिस को सुबह चार बजे हुई। परिजन और प्राइवेट अस्पताल के स्टाफ ने घटना की जानकारी वारदात के तीन घंटे गुजरने के बाद दी। पुजारी के भाई चिंतामणि ने बताया कि महाराज को रात करीब दो बजे लहूलुहान हॉल में वह रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज ले गए थे। वहां डॉक्टरों ने महाराज के सिर पर चार गहरे घाव देखकर और खून काफी बह जाने के कारण कानपुर के लिए रेफर कर दिया था।

वह प्राइवेट अस्पताल ले गए। महाराज की मौत पर अस्पताल के स्टाफ व परिजनों ने डायल-112 पर फोन कर पुलिस को सूचना दी। तब पुलिस अस्पताल और फिर घटनास्थल पहुंची। यह कवायद करते-करते पुलिस को रविवार के सुबह नौ बज गए।
 
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