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Kanpur News: आधा रह गया उत्पादन, घटानी पड़ रही श्रमिकों की संख्या
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Thu, 19 Mar 2026 02:15 AM IST
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रनियां। वैश्विक स्तर पर चल रहे युद्ध और बिगड़ी भू-राजनीतिक परिस्थितियों का असर अब स्थानीय उद्योगों पर साफ दिखने लगा है। कच्चे माल की आपूर्ति बाधित होने से फैक्टरियों का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हालात यह हैं कि पहले की तुलना में उत्पादन आधा रह गया है और ऑर्डर न मिलने से फैक्टरियों में मजदूरों की संख्या भी घटानी पड़ रही है।
उद्यमियों के मुताबिक, पहले जहां दो शिफ्टों में मजदूर पूरी क्षमता के अनुसार काम करते थे वहीं अब यह संख्या नाम मात्र की रह गई है। कच्चे माल की कमी के साथ-साथ बढ़ती महंगाई ने उद्योगों की कमर तोड़ दी है। औद्योगिक क्षेत्र रनियां और जैनपुर में करीब 400 बड़े और छोटे उद्योग संचालित है। इनमें प्लास्टिक, खाद्य पदार्थ, एक्सपोर्ट, डिटर्जेंट आदि का कारोबार फैला हुआ है। उद्यमियों का कहना है कि ईरान, इस्राइल और अमेरिका में करीब 20 से 25 दिनों से चल रहे युद्ध के कारण जिले के हाल बेहाल हैं।
दरअसल, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने से पेट्रोलियम उत्पादों के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसका सीधा असर कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स लागत पर पड़ा है। शिपिंग महंगी होने और उड़ान सेवाएं प्रभावित होने से आयात-निर्यात कारोबार भी सिमट गया है। जिससे निर्यात गतिविधियों में गिरावट आई है। वहीं, फैक्टरियों में इस्तेमाल होने वाला चाइना क्ले पाउडर, जो कपड़ा धोने साबुन में प्रयोग होता है, अब पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पा रहा है। इससे साबुन कारोबारियों तक तैयार माल की आपूर्ति बाधित हो गई है। महंगे कच्चे माल के चलते नए ऑर्डर भी तैयार नहीं हो पा रहे हैं।
इसके अलावा प्लास्टिक दाने की भारी किल्लत ने पैकेजिंग उद्योग को भी झटका दिया है। बाजार में 25 फीसदी आपूर्ति का दावा किया गया था, लेकिन हकीकत में पांच फीसदी भी दाना उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। गेहूं और धान की फसल के सीजन में प्लास्टिक बोरियों की मांग बढ़ती है लेकिन कच्चे माल के अभाव में उत्पादन प्रभावित है। उद्यमियों के मुताबिक प्लास्टिक, खाद्य पदार्थ, एक्सपोर्ट और अन्य कारोबार मिलाकर बीते 20 दिनों में करीब 500 से 600 करोड़ रुपये तक के नुकसान का अनुमान है। यदि जल्द हालात नहीं सुधरे, तो कई फैक्टरियों के बंद होने का खतरा भी बढ़ सकता है।
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बोले उद्यमी
बढ़ती महंगाई से थम गए हैं ऑर्डर
कच्चे माल की कीमतों में उछाल के कारण तैयार उत्पाद महंगे हो गए हैं, जिससे बाजार में मांग घटी है। उद्यमियों के सामने फैक्टरी संचालन तक का संकट खड़ा हो गया है। युद्ध के कारण कच्चा माल नहीं मिल पा रहा है। इससे फैक्टरी में उत्पादन पहले के तरीके से नहीं हो रहा है। ऑर्डर न मिलने से मजदूरों की संख्या कम कर दी है। दोनों शिफ्ट में करीब पांच से छह मजदूरों से काम चलाया जा रहा है। - एसके सिंह, उद्यमी
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पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है। इसके परिणामस्वरूप कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स लागत में भारी बढ़ोतरी हो रही है, जो समग्र रूप से महंगाई को बढ़ावा दे रही है। साथ ही, बढ़ी हुई शिपिंग लागत और बाधित उड़ान सेवाओं के कारण आयातकों और निर्यातकों के बीच प्रत्यक्ष संपर्क कम हो गया है। जिससे निर्यात गतिविधियों में उल्लेखनीय गिरावट आई है। - सुनील पांडेय, उद्यमी
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फैक्टरी में चाइना क्ले पाउडर का प्रयोग कपड़ा धोने साबुन में प्रयोग किया जाता है। कच्चा माल न मिलने से साबुन कारोबारियों तक नहीं पहुंच रहा है। साथ ही कच्चा माल में महंगाई होने के चलते ऑर्डर तैयार नहीं हो पा रहे है। इस समस्या के कारण प्लास्टिक, खाद्य पदार्थ, एक्सपोर्ट और अन्य कारोबारी में करीब 500 से 600 करोड़ रुपये का 20 दिनों में नुकसान का आकलन किया जा सकता है। - सुशील सिंह, उद्यमी
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अप्रैल से लेकर सितंबर तक सीजन रहता है। गेहूं, धान व अन्य पैकिंग के लिए बोरी का प्रयोग होता है लेकिन प्लास्टिक के दाने के बाजार में 25 फीसदी दाना देने की बात कही गई थी। पांच फीसदी भी दाना नहीं मिल पा रहा है। महंगाई के चलते ऑर्डर नहीं मिल रहा है। फैक्टरी संचालित करना अब बड़ा मुश्किल है। - अजय गर्ग उद्यमी
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उद्यमियों के मुताबिक, पहले जहां दो शिफ्टों में मजदूर पूरी क्षमता के अनुसार काम करते थे वहीं अब यह संख्या नाम मात्र की रह गई है। कच्चे माल की कमी के साथ-साथ बढ़ती महंगाई ने उद्योगों की कमर तोड़ दी है। औद्योगिक क्षेत्र रनियां और जैनपुर में करीब 400 बड़े और छोटे उद्योग संचालित है। इनमें प्लास्टिक, खाद्य पदार्थ, एक्सपोर्ट, डिटर्जेंट आदि का कारोबार फैला हुआ है। उद्यमियों का कहना है कि ईरान, इस्राइल और अमेरिका में करीब 20 से 25 दिनों से चल रहे युद्ध के कारण जिले के हाल बेहाल हैं।
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दरअसल, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने से पेट्रोलियम उत्पादों के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसका सीधा असर कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स लागत पर पड़ा है। शिपिंग महंगी होने और उड़ान सेवाएं प्रभावित होने से आयात-निर्यात कारोबार भी सिमट गया है। जिससे निर्यात गतिविधियों में गिरावट आई है। वहीं, फैक्टरियों में इस्तेमाल होने वाला चाइना क्ले पाउडर, जो कपड़ा धोने साबुन में प्रयोग होता है, अब पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पा रहा है। इससे साबुन कारोबारियों तक तैयार माल की आपूर्ति बाधित हो गई है। महंगे कच्चे माल के चलते नए ऑर्डर भी तैयार नहीं हो पा रहे हैं।
इसके अलावा प्लास्टिक दाने की भारी किल्लत ने पैकेजिंग उद्योग को भी झटका दिया है। बाजार में 25 फीसदी आपूर्ति का दावा किया गया था, लेकिन हकीकत में पांच फीसदी भी दाना उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। गेहूं और धान की फसल के सीजन में प्लास्टिक बोरियों की मांग बढ़ती है लेकिन कच्चे माल के अभाव में उत्पादन प्रभावित है। उद्यमियों के मुताबिक प्लास्टिक, खाद्य पदार्थ, एक्सपोर्ट और अन्य कारोबार मिलाकर बीते 20 दिनों में करीब 500 से 600 करोड़ रुपये तक के नुकसान का अनुमान है। यदि जल्द हालात नहीं सुधरे, तो कई फैक्टरियों के बंद होने का खतरा भी बढ़ सकता है।
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बोले उद्यमी
बढ़ती महंगाई से थम गए हैं ऑर्डर
कच्चे माल की कीमतों में उछाल के कारण तैयार उत्पाद महंगे हो गए हैं, जिससे बाजार में मांग घटी है। उद्यमियों के सामने फैक्टरी संचालन तक का संकट खड़ा हो गया है। युद्ध के कारण कच्चा माल नहीं मिल पा रहा है। इससे फैक्टरी में उत्पादन पहले के तरीके से नहीं हो रहा है। ऑर्डर न मिलने से मजदूरों की संख्या कम कर दी है। दोनों शिफ्ट में करीब पांच से छह मजदूरों से काम चलाया जा रहा है। - एसके सिंह, उद्यमी
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पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है। इसके परिणामस्वरूप कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स लागत में भारी बढ़ोतरी हो रही है, जो समग्र रूप से महंगाई को बढ़ावा दे रही है। साथ ही, बढ़ी हुई शिपिंग लागत और बाधित उड़ान सेवाओं के कारण आयातकों और निर्यातकों के बीच प्रत्यक्ष संपर्क कम हो गया है। जिससे निर्यात गतिविधियों में उल्लेखनीय गिरावट आई है। - सुनील पांडेय, उद्यमी
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फैक्टरी में चाइना क्ले पाउडर का प्रयोग कपड़ा धोने साबुन में प्रयोग किया जाता है। कच्चा माल न मिलने से साबुन कारोबारियों तक नहीं पहुंच रहा है। साथ ही कच्चा माल में महंगाई होने के चलते ऑर्डर तैयार नहीं हो पा रहे है। इस समस्या के कारण प्लास्टिक, खाद्य पदार्थ, एक्सपोर्ट और अन्य कारोबारी में करीब 500 से 600 करोड़ रुपये का 20 दिनों में नुकसान का आकलन किया जा सकता है। - सुशील सिंह, उद्यमी
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अप्रैल से लेकर सितंबर तक सीजन रहता है। गेहूं, धान व अन्य पैकिंग के लिए बोरी का प्रयोग होता है लेकिन प्लास्टिक के दाने के बाजार में 25 फीसदी दाना देने की बात कही गई थी। पांच फीसदी भी दाना नहीं मिल पा रहा है। महंगाई के चलते ऑर्डर नहीं मिल रहा है। फैक्टरी संचालित करना अब बड़ा मुश्किल है। - अजय गर्ग उद्यमी