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Kannauj: उत्पीड़न और भ्रष्टाचार की शिकायत पर सौरिख के खंड शिक्षा अधिकारी निलंबित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज
Published by: Shikha Pandey
Updated Tue, 02 Jun 2026 07:09 PM IST
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सार
प्रधानाध्यापक की शिकायत पर जांच के बाद अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) ने कार्रवाई की। एडी बेसिक कानपुर कार्यालय संबद्ध किया।
निलंबित बीईओ विश्वनाथ पाठक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कन्नौज जिले में भ्रष्टाचार व उत्पीड़न के आरोप में सौरिख ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी विश्वनाथ पाठक को अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) कामताराम पाल ने निलंबित कर दिया। इससे पहले तालग्राम के खंड शिक्षा अधिकारी रमेशचंद्र चौधरी को भी निलंबित किया जा चुका है। सौरिख क्षेत्र की एक प्रधानाध्यापक की शिकायत पर जांच के बाद यह कार्रवाई की गई है। उन्हें भी एडी बेसिक कानपुर कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।
सौरिख ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय पिपरिया की प्रधानाध्यापक कल्पना पाल ने 24 अप्रैल 2026 को शपथ पत्र के साथ उच्चाधिकारियों से बीईओ विश्वनाथ पाठक की लिखित शिकायत की थी। उनका आरोप था कि दिसंबर 2025 में विद्यालय के मरम्मत कार्य के लिए 4,62,796 रुपये का बजट आया था। इस धनराशि को जारी करने और पास कराने के एवज में बीईओ उन पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से 20 प्रतिशत कमीशन (सुविधा शुल्क) देने का दबाव बना रहे थे। उन्होंने रिश्वत देने से साफ मना कर दिया, तो बीईओ ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया। 25 मार्च 2026 को बीईओ एक शिक्षामित्र को साथ लेकर स्कूल पहुंचे और उपस्थिति रजिस्टर सीन कर दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि खंड शिक्षा अधिकारी ने कहा था कि जब तक रुपये नहीं दोगी, ऐसे ही परेशान किया जाएगा। काम चाहे जितना अच्छा कराओ, कमियां निकाली जाएंगीं। उन्होंने इस 20 प्रतिशत कमीशन में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और डीसी का भी हिस्सा होने की बात कही थी। इसके बाद बीआरसी पर बुलाकर बीईओ ने धमकी दी कि आजकल पैसे से किसी भी अधिकारी को खरीदा जा सकता है, मैंने बहुत रुपया कमाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा निदेशालय ने सात मई 2026 को बीईओ विश्वनाथ पाठक से स्पष्टीकरण मांगा था। 16 मई को बीईओ द्वारा दिया गया जवाब पूरी तरह असंतोषजनक और अस्वीकार्य पाया गया।
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सौरिख ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय पिपरिया की प्रधानाध्यापक कल्पना पाल ने 24 अप्रैल 2026 को शपथ पत्र के साथ उच्चाधिकारियों से बीईओ विश्वनाथ पाठक की लिखित शिकायत की थी। उनका आरोप था कि दिसंबर 2025 में विद्यालय के मरम्मत कार्य के लिए 4,62,796 रुपये का बजट आया था। इस धनराशि को जारी करने और पास कराने के एवज में बीईओ उन पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से 20 प्रतिशत कमीशन (सुविधा शुल्क) देने का दबाव बना रहे थे। उन्होंने रिश्वत देने से साफ मना कर दिया, तो बीईओ ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया। 25 मार्च 2026 को बीईओ एक शिक्षामित्र को साथ लेकर स्कूल पहुंचे और उपस्थिति रजिस्टर सीन कर दिया।
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उन्होंने आरोप लगाया कि खंड शिक्षा अधिकारी ने कहा था कि जब तक रुपये नहीं दोगी, ऐसे ही परेशान किया जाएगा। काम चाहे जितना अच्छा कराओ, कमियां निकाली जाएंगीं। उन्होंने इस 20 प्रतिशत कमीशन में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और डीसी का भी हिस्सा होने की बात कही थी। इसके बाद बीआरसी पर बुलाकर बीईओ ने धमकी दी कि आजकल पैसे से किसी भी अधिकारी को खरीदा जा सकता है, मैंने बहुत रुपया कमाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा निदेशालय ने सात मई 2026 को बीईओ विश्वनाथ पाठक से स्पष्टीकरण मांगा था। 16 मई को बीईओ द्वारा दिया गया जवाब पूरी तरह असंतोषजनक और अस्वीकार्य पाया गया।
प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर अपर शिक्षा निदेशक ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच पदेन जांच अधिकारी के रूप में मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक कानपुर मंडल को सौंपी गई है। 15 दिन के अंदर जांच रिपोर्ट मांगी गई है। इसके बाद आरोप पत्र तैयार किया जाएगा। वहीं, निलंबित खंड शिक्षा अधिकारी विश्वनाथ पाठक ने बताया कि कुछ शिक्षक उनके खिलाफ लगातार षड़यंत्र कर रहे थे। उन्हें गलत तरीके से निलंबित किया गया है और इस आदेश के खिलाफ वह कोर्ट की शरण लेंगे।
चार बार सीसीएल निरस्त करने का भी आरोप
प्रधानाध्यापक कल्पना पाल ने आरोप लगाया बीईओ विश्वनाथ पाठक और बीएसए ने मिलकर सोची-समझी रणनीति के तहत उनकी बाल्य देखभाल अवकाश (सीसीएल) को चार बार आवेदन करने के बावजूद निरस्त किया। बीएसए कंट्रोल रूम से सुबह-सुबह स्कूल में फोन करवाकर पहले शिक्षिका को अनुपस्थित दर्शाया जाता था और फिर तकनीकी आधार पर रात को 9:50 बजे छुट्टी निरस्त कर दी जाती थी। 22 अप्रैल 2026 को स्कूल में पूरी टीम के साथ छापा मारकर शिक्षिका को निलंबित करने की धमकी भी दी गई थी। आरोप है कि नवंबर 2025 और फरवरी 2026 में जब प्रधानाध्यापिका छुट्टी या चिकित्सीय अवकाश पर थीं, और उसी दौरान सहायक अध्यापक ने भी आकस्मिक अवकाश लिया, तब बीईओ ने विद्यालय संचालन के लिए किसी अन्य शिक्षक की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की, जिससे स्कूल भगवान भरोसे चलता रहा।
प्रधानाध्यापक कल्पना पाल ने आरोप लगाया बीईओ विश्वनाथ पाठक और बीएसए ने मिलकर सोची-समझी रणनीति के तहत उनकी बाल्य देखभाल अवकाश (सीसीएल) को चार बार आवेदन करने के बावजूद निरस्त किया। बीएसए कंट्रोल रूम से सुबह-सुबह स्कूल में फोन करवाकर पहले शिक्षिका को अनुपस्थित दर्शाया जाता था और फिर तकनीकी आधार पर रात को 9:50 बजे छुट्टी निरस्त कर दी जाती थी। 22 अप्रैल 2026 को स्कूल में पूरी टीम के साथ छापा मारकर शिक्षिका को निलंबित करने की धमकी भी दी गई थी। आरोप है कि नवंबर 2025 और फरवरी 2026 में जब प्रधानाध्यापिका छुट्टी या चिकित्सीय अवकाश पर थीं, और उसी दौरान सहायक अध्यापक ने भी आकस्मिक अवकाश लिया, तब बीईओ ने विद्यालय संचालन के लिए किसी अन्य शिक्षक की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की, जिससे स्कूल भगवान भरोसे चलता रहा।
तालग्राम के बाद अब सौरिख बीईओ पर गिरी गाज
तालग्राम विकास खंड में तैनात बीईओ रमेशचंद्र चौधरी पर बिना मान्यता संचालित राजकुमारी मेवाराम आदर्श विद्यालय को संरक्षण देने और उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने का गंभीर आरोप थे। इसके अलावा अन्य आरोप लगाए गए थे। इन सभी आरोपों को देखते हुए आठ मई 2026 को निलंबित कर दिया गया था। मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) कानपुर कार्यालय में संबद्ध किया गया था।
तालग्राम विकास खंड में तैनात बीईओ रमेशचंद्र चौधरी पर बिना मान्यता संचालित राजकुमारी मेवाराम आदर्श विद्यालय को संरक्षण देने और उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने का गंभीर आरोप थे। इसके अलावा अन्य आरोप लगाए गए थे। इन सभी आरोपों को देखते हुए आठ मई 2026 को निलंबित कर दिया गया था। मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) कानपुर कार्यालय में संबद्ध किया गया था।