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UP: दरिंदगी के निशां देखकर डॉक्टर भी हो गए थे विचलित... शरीर पर 18 चोटें, हाथ भी टूटा; बांदा के हैवान को फांसी

अमर उजाला नेटवर्क, बांदा Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 07 Jan 2026 10:49 AM IST
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सार

बांदा जिला सत्र विशेष न्यायालय (पॉक्सो) ने एक जघन्य अपराध के मामले में 24 वर्षीय अमित रैकवार को मौत की सजा सुनाई है। उस पर छह साल की बच्ची दुष्कर्म और हैवानियत का आरोप सिद्ध हुआ। मंगलवार सुबह न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने 46 पन्नों का फैसला सुनाते हुए कहा, दोषी को मरते दम तक फंदे से लटका कर रखा जाए। इसके बाद उन्होंने कलम की निब तोड़ दी।

UP News Even doctors were disturbed by signs of brutality What happened when in Banda Harassment case
banda harassment case - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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बांदा के कालिंजर थाना इलाके के एक गांव में छह साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना ने मेडिकल करने वाले डॉक्टरों को भी झकझोर दिया था। उस समय पर जिला महिला अस्पताल में तैनात डॉ. प्रिया सिंह, बच्ची के मेडिकल करने वाले पैनल में शामिल थीं। उनके बयान ने न्यायालय में दोषी को सजा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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डॉ. प्रिया ने कोर्ट को बताया था कि बच्ची के शरीर में 18 चोटें मिली थीं। उसके नाजुक अंग पर गंभीर चोटें थीं। डॉ. कुमार ने गवाही दी थी कि बच्ची का बायां हाथ टूटा था। कुल मिलाकर बालिका के साथ हैवानियत की हदें पार की गईं थीं। अंत में कानपुर मेडिकल कॉलेज की डॉ. श्रद्धा वर्मा ने अपनी देखरेख में बालिका की तीन सर्जरी की थीं। 
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बालिका का अब भी कानपुर हैलट में इलाज चल रहा है। वह अपने परिजनों के साथ समय-समय पर हैलट आती जाती है। अन्य गवाहों में गांव के स्कूल के अध्यापक की गवाही उसकी उम्र को लेकर कराई गई थी। इनके अलावा पीड़िता के पिता, खुद पीड़िता और पीड़िता की मां की गवाही भी महत्वपूर्ण रही।
 

सजा दिलाने में अहम रहे वैज्ञानिक साक्ष्य
दरिंदे को सजा दिलाने में वैज्ञानिक साक्ष्यों की भी अहम भूमिका रही। पुलिस ने पीड़िता के खून से सने कपड़े व दोषी का डीएनए का सैंपल मैच कराया था। दोनों का सैंपल मिलने पर सजा दिलाने में वैज्ञानिक साक्ष्य की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। 
 

दोषी के घर सन्नाटा, मजदूरी करता है परिवार
कालिंजर थाना क्षेत्र में रहने वाली नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या के मामले में विशेष सत्र पॉक्सो अदालत ने आरोपी अमित रैकवार को मौत की सजा सुनाई है। यह घटना 5 जुलाई 2025 को दोपहर 3:30 बजे गांव में हुई थी। अमित रैकवार चार भाइयों में तीसरे नंबर पर था। उसके पिता के नाम दो बीघा जमीन है और मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। परिवार के अन्य सदस्य भी मजदूरी करके ही जीवन यापन करते हैं। इस सजा के बाद दोषी के घर में सजा के बाद सन्नाटा पसरा रहा। 
 

भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत 56 दिनों में ट्रायल पूरा कर दुष्कर्म के आरोपी को दोषी सिद्ध कर मृत्युदंड की सजा सुनाया जाना जल्द न्याय की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। 

कब-क्या हुआ
25 जुलाई 2025 कालिंजर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी दोषी अमित ने छह वर्षीय बालिका को बहला फुसला कर घर ले जाकर किया दुष्कर्म। बालिका को इलाज के लिए जिला अस्पताल भेजा गया। वहां से रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज रेफर।
 

26 जुलाई 2025 पुलिस ने कालिंजर के
गुढ़ाकला गांव के गुढ़ा मंदिर रोड पुलिया से दोषी को मुठभेड़ के बाद किया गिरफ्तार।
 

27 जुलाई 2025
पीडियाट्रिक सर्जन न होने की वजह से रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज से बालिका को कानपुर हैलट रेफर में किया गया भर्ती।
घटना के 20 दिनों के अंदर पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में किया प्रेषित।
मुकदमा ट्रायल में पांच जनवरी 2026- को न्यायालय ने दोषसिद्ध पाते हुए मृत्युदंड व 25,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।

यह कहा न्यायाधीश ने
ऐसे जघन्य अपराधी को कम सजा देने का मतलब पीड़िता के साथ अन्याय करना है। साथ ही डीएम को यह आदेशित किया गया है कि प्रमुख सचिव के माध्यम से पीड़िता का बेहतर उपचार कराया जाए। ऐसे अपराध समाज की नींव को कमजोर करते हैं और इन्हें किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। स्थानीय निवासियों ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है और पीड़ित परिवार ने न्याय मिलने पर राहत की सांस ली है, हालांकि बच्ची की जिंदगी हमेशा के लिए बदल चुकी है।-प्रदीप कुमार मिश्रा, न्यायाधीश

'मरते दम तक फंदे पर लटकाओ', जज ने दुष्कर्म के दोषी को सुनाई मौत की सजा
बांदा जिला सत्र विशेष न्यायालय (पॉक्सो) ने एक जघन्य अपराध के मामले में 24 वर्षीय अमित रैकवार को मौत की सजा सुनाई है। उस पर छह साल की बच्ची दुष्कर्म और हैवानियत का आरोप सिद्ध हुआ। मंगलवार सुबह न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने 46 पन्नों का फैसला सुनाते हुए कहा, दोषी को मरते दम तक फंदे से लटका कर रखा जाए। इसके बाद उन्होंने कलम की निब तोड़ दी। न्यायाधीश ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे जघन्य अपराध करने वालों के लिए समाज में कोई स्थान नहीं है।
 

यह सनसनीखेज घटना 25 जुलाई 2025 को कालिंजर थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई थी। दोषी अमित रैकवार स्कूल से लौट रही छह साल की बच्ची को फुसलाकर अपने घर ले गया था। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी ने बच्ची को गुटखा मंगाने के बहाने रोका और फिर घर ले जाकर दरिंदगी की सारी हदें पार कर दीं।

दुष्कर्म के दौरान बच्ची के शरीर पर दांतों से काटने के कई निशान पाए गए और मेडिकल जांच में पता चला कि पीड़िता के शरीर में कई जगहों पर गंभीर चोटें थीं। पुलिस ने वारदात के बाद ही देर रात अमित रैकवार को मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर लिया। तीन दिन बाद पुलिस ने उसे जेल भेजा था।
 

सात अक्तूबर 2025 को कालिंजर पुलिस ने न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें पॉक्सो एक्ट की धारा छह और भारतीय नवीन दंड संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए। 12 नवंबर को आरोप तय होने के बाद मुकदमा शुरू हुआ।

कुल 56 दिनों तक चली सुनवाई के दौरान 10 गवाह पेश किए गए। इनमें पीड़िता का इलाज करने वाले तीन डॉक्टरों का पैनल, फॉरेंसिक, डीएनए, मेडिकल रिपोर्ट और बीएनएसएस की धारा 180 व 183 के तहत दर्ज बयान शामिल थे। इन सभी सबूतों ने आरोपी को पुख्ता तौर पर दोषी साबित किया।

सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि आरोपी ने मासूम को पहले बहलाया, फिर घर में ले जाकर दुष्कर्म किया। अधिवक्ता ने इस मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर श्रेणी में बताते हुए मौत की सजा को ही न्यायोचित बताया। बचाव पक्ष ने सबूतों की कमी का हवाला दिया लेकिन, अदालत ने उनकी दलीलों को खारिज कर दिया।
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