UP: कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र से अगड़ी जाति के नेताओं का पत्ता साफ, नई कार्यकारिणी में OBC-SC वर्ग का दबदबा
Kanpur News: भाजपा की नई प्रदेश कार्यकारिणी में कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र से अगड़ी जाति के नेताओं को हटाकर ओबीसी और एससी वर्ग को प्रमुखता दी गई है। यह बदलाव आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सामाजिक समीकरणों को साधने की एक बड़ी कवायद माना जा रहा है।
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भाजपा की नई प्रदेश कार्यकारिणी में कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र से अगड़ी जाति के किसी नेता को स्थान नहीं मिला है। अब तक इस क्षेत्र से एमएलसी मानवेंद्र सिंह, सलिल विश्नोई और राज्य महिला कल्याण निगम की अध्यक्ष कमलावती सिंह प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर थीं। नई सूची में इन सभी को जगह नहीं दी गई है। इनकी जगह संगठन ने ओबीसी और एससी वर्ग को प्राथमिकता दी है।
अनुसूचित जाति वर्ग से शहर के देवेश कोरी को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। ओबीसी वर्ग से औरैया की गीता शाक्य को प्रदेश महामंत्री और जालौन के अनिल यादव को प्रदेश मंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। कानपुर की किरण लोधी निषाद प्रदेश मंत्री बनाई गईं हैं। वहीं मिश्रिख लोकसभा क्षेत्र से सांसद अशोक रावत को अनुसूचित मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है। चर्चा यह है कि अब नई सूची से निराश क्षेत्र के अगड़ी जाति के नेताओं को राष्ट्रीय नेतृत्व से उम्मीद है कि शायद वहां उनके लिए कोई जगह बन सके।
सपा का पीडीए भाजपा की नई कार्यकारिणी में दिखा हावी
भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी को लेकर राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि इसमें समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले का प्रभाव दिखाई दे रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि अन्य पिछड़ा वर्ग के 50 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने नई टीम में ओबीसी और एससी वर्ग को अधिक प्रतिनिधित्व दिया है। पार्टी के अंदर भी यह चर्चा है कि यह रणनीति आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर बनाई गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह सामाजिक समीकरण भाजपा के लिए कितना कारगर साबित होता है।
सपा का झूठ बेनकाब करेंगे, प्रदेश भर के पिछड़ों को संगठित करेंगे
भाजपा पिछड़ा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बनाएगए प्रकाश पाल ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने जो जिम्मेदारी दी है वह उसके लिए आभारी हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग के 50 प्रतिशत से अधिक मतदाता हैं और उन्हें एकजुट करना प्राथमिक लक्ष्य होगा। वे सपा के पीडीए के कथित झूठ को जनता के बीच उजागर करेंगे और यह समझाएंगे कि पिछड़ों, अगड़ों, दलितों, शोषितों और वंचितों का वास्तविक हित भाजपा में ही सुरक्षित है।
कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में कानपुर का दबदबा कम हुआ
भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में एक बड़ा बदलाव यह भी देखने को मिला है कि लंबे समय बाद कानपुर का दबदबा क्षेत्रीय नेतृत्व में कम हुआ है। अब कमान बुंदेलखंड क्षेत्र की ओर स्थानांतरित हो गई है। रामकिशोर साहू से पहले इस क्षेत्र की जिम्मेदारी कानपुर के प्रकाश पाल, मानवेंद्र सिंह और बालचंद्र मिश्रा जैसे नेताओं के पास रही थी।