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मौसम का कहर: भट्ठी की तरह धधक रहा शहर, बांदा देश में सबसे गर्म, रेड अलर्ट जारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
Published by: Shikha Pandey
Updated Thu, 21 May 2026 12:10 AM IST
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सार
Weather Update: यूपी के बांदा जिले में गर्मी का कहर जारी है। बुधवार को अधिकतम तापमान 48.0 डिग्री रिकार्ड किया गया।
भट्ठी की तरह धधक रहा बांदा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बांदा जिला इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है और यह गर्म टापू बनता जा रहा है। बुधवार को अधिकतम तापमान 48.0 व न्यूनतम 28 डिग्री दर्ज किया गया। दिन के समय सड़कें सुनसान हो रही हैं जबकि लोग रात में अपने काम निपटाने के लिए मजबूर हैं। जिला प्रशासन ने रेड अलर्ट के साथ एडवाइजरी भी जारी की है।
बांदा में गर्मी का प्रकोप इतना भयानक है कि सुबह 10 बजे तक पूरा शहर थम सा जाता है। कई दुकानों के शटर खुले रहते हैं लेकिन शाम से पहले ग्राहक मिलना मुश्किल हो जाता है। अप्रैल से अब तक बिक्री में भारी गिरावट आई है। दोपहर के बाद शहर में सन्नाटा पसर जाता है। इस वर्ष 27 अप्रैल को बांदा का तापमान 47.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था जो उस दिन पूरे भारत में सबसे अधिक था। यह 1951 के बाद अप्रैल महीने का सबसे अधिक तापमान भी था। इससे पहले 2022 और 2026 में बांदा ने 47.4 डिग्री सेल्सियस का रिकॉर्ड बनाया था। मंगलवार को बांदा एक बार फिर देश का सबसे गर्म शहर रहा जहां तापमान 48.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया जो एक नया रिकॉर्ड है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इसके पीछे केवल जलवायु परिवर्तन ही नहीं बल्कि वर्षों से हो रही पर्यावरणीय बर्बादी भी एक प्रमुख कारण है।
स्थानीय लोगों के अनुसार गर्मी ने लोगों के दैनिक जीवन और कामकाज को बुरी तरह प्रभावित किया है। किसान अब दिन की बजाय रात में खेतों में काम करने के लिए मजबूर हैं। ठेकेदारों का कहना है कि मजदूर सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे के बीच काम नहीं कर पा रहे हैं। खाने-पीने की दुकानें भी अब शाम ढलने के बाद ही खुलती हैं। भीषण गर्मी और बढ़े हुए बिजली लोड के कारण बांदा के 44 बिजली उपकेंद्रों पर तैनात कर्मचारी लगातार 1,379 ट्रांसफार्मरों पर पानी डाल रहे हैं। पिछले 45 दिनों में अत्यधिक गर्मी और बिजली की बढ़ी मांग के कारण कई ट्रांसफार्मर खराब हो चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार, बिजली की आपूर्ति लगभग 16 घंटे तक ही चल पा रही है जिससे बिजली ग्रिड पर भारी दबाव बना हुआ है।
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बांदा में गर्मी का प्रकोप इतना भयानक है कि सुबह 10 बजे तक पूरा शहर थम सा जाता है। कई दुकानों के शटर खुले रहते हैं लेकिन शाम से पहले ग्राहक मिलना मुश्किल हो जाता है। अप्रैल से अब तक बिक्री में भारी गिरावट आई है। दोपहर के बाद शहर में सन्नाटा पसर जाता है। इस वर्ष 27 अप्रैल को बांदा का तापमान 47.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था जो उस दिन पूरे भारत में सबसे अधिक था। यह 1951 के बाद अप्रैल महीने का सबसे अधिक तापमान भी था। इससे पहले 2022 और 2026 में बांदा ने 47.4 डिग्री सेल्सियस का रिकॉर्ड बनाया था। मंगलवार को बांदा एक बार फिर देश का सबसे गर्म शहर रहा जहां तापमान 48.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया जो एक नया रिकॉर्ड है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इसके पीछे केवल जलवायु परिवर्तन ही नहीं बल्कि वर्षों से हो रही पर्यावरणीय बर्बादी भी एक प्रमुख कारण है।
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स्थानीय लोगों के अनुसार गर्मी ने लोगों के दैनिक जीवन और कामकाज को बुरी तरह प्रभावित किया है। किसान अब दिन की बजाय रात में खेतों में काम करने के लिए मजबूर हैं। ठेकेदारों का कहना है कि मजदूर सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे के बीच काम नहीं कर पा रहे हैं। खाने-पीने की दुकानें भी अब शाम ढलने के बाद ही खुलती हैं। भीषण गर्मी और बढ़े हुए बिजली लोड के कारण बांदा के 44 बिजली उपकेंद्रों पर तैनात कर्मचारी लगातार 1,379 ट्रांसफार्मरों पर पानी डाल रहे हैं। पिछले 45 दिनों में अत्यधिक गर्मी और बिजली की बढ़ी मांग के कारण कई ट्रांसफार्मर खराब हो चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार, बिजली की आपूर्ति लगभग 16 घंटे तक ही चल पा रही है जिससे बिजली ग्रिड पर भारी दबाव बना हुआ है।
खनन से प्राकृतिक व्यवस्था हो रही नष्ट
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, विंध्य क्षेत्र की लगभग 25% पहाड़ियां या तो खत्म हो चुकी हैं या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक विंध्य क्षेत्र की बलुआ पत्थर वाली पहाड़ियां बारिश का पानी सोखकर भूजल को भरने का काम करती थीं लेकिन लगातार विस्फोट और खनन से प्राकृतिक व्यवस्था नष्ट होती जा रही है। केन नदी, जो बांदा से करीब 100 किलोमीटर बहती है वहां बड़े पैमाने पर मौरंग का खनन हो रहा है। पर्यावरण कार्यकर्ता उमाशंकर पांडे कहते हैं कि अत्यधिक खनन ने नदी की प्राकृतिक रेत खत्म कर दी है जो पानी रोकने और भूजल भरने में मदद करती थी। अब पथरीली सतह बची है जिससे पानी तेजी से बह जाता है और जमीन में कम समाता है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, विंध्य क्षेत्र की लगभग 25% पहाड़ियां या तो खत्म हो चुकी हैं या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक विंध्य क्षेत्र की बलुआ पत्थर वाली पहाड़ियां बारिश का पानी सोखकर भूजल को भरने का काम करती थीं लेकिन लगातार विस्फोट और खनन से प्राकृतिक व्यवस्था नष्ट होती जा रही है। केन नदी, जो बांदा से करीब 100 किलोमीटर बहती है वहां बड़े पैमाने पर मौरंग का खनन हो रहा है। पर्यावरण कार्यकर्ता उमाशंकर पांडे कहते हैं कि अत्यधिक खनन ने नदी की प्राकृतिक रेत खत्म कर दी है जो पानी रोकने और भूजल भरने में मदद करती थी। अब पथरीली सतह बची है जिससे पानी तेजी से बह जाता है और जमीन में कम समाता है।
भूजल स्तर में गिरावट और बंजर भूमि का खतरा
बांदा के गांवों में कुएं हर साल पहले से जल्दी सूखने लगे हैं और बोरवेल लगातार ज्यादा गहरे करने पड़ रहे हैं। 2025 में चार विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं ने शोध में पाया गया कि बांदा का कुल वन क्षेत्र 2005 के 120 वर्ग किलोमीटर से घटकर लगभग 95 वर्ग किलोमीटर रह गया है जो लगभग 15.5 फीसद की कमी है। घने जंगलों में 17.5 फीसद की गिरावट दर्ज हुई है। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अगले दो दशकों में जिले के कुछ हिस्से पूरी तरह बंजर हो सकते हैं। बांदा कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विभाग प्रमुख प्रोफेसर दिनेश साहा बताते हैं कि खनन के कारण नदियां सूख रही हैं और भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। जंगलों की कटाई से जमीन में नमी कम हुई है। पत्थर क्रशर मशीनों की धूल मिट्टी पौधों पर जम रही है। यह सभी कारण मिलकर समस्या को और गंभीर बना रहे हैं।
बांदा के गांवों में कुएं हर साल पहले से जल्दी सूखने लगे हैं और बोरवेल लगातार ज्यादा गहरे करने पड़ रहे हैं। 2025 में चार विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं ने शोध में पाया गया कि बांदा का कुल वन क्षेत्र 2005 के 120 वर्ग किलोमीटर से घटकर लगभग 95 वर्ग किलोमीटर रह गया है जो लगभग 15.5 फीसद की कमी है। घने जंगलों में 17.5 फीसद की गिरावट दर्ज हुई है। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अगले दो दशकों में जिले के कुछ हिस्से पूरी तरह बंजर हो सकते हैं। बांदा कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विभाग प्रमुख प्रोफेसर दिनेश साहा बताते हैं कि खनन के कारण नदियां सूख रही हैं और भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। जंगलों की कटाई से जमीन में नमी कम हुई है। पत्थर क्रशर मशीनों की धूल मिट्टी पौधों पर जम रही है। यह सभी कारण मिलकर समस्या को और गंभीर बना रहे हैं।
गर्मी में घर के बाहर जाने से पहले क्या करें
हाइड्रेशन: घर से निकलने से पहले 1-2 गिलास पानी पीएं। अपने साथ पानी की बोतल रखें।
पहनावा: हल्के रंग के ढीले-ढाले सूती कपड़े पहनें। धूप के चश्मे का प्रयोग करें।
सुरक्षा: टोपी, स्कार्फ या छाते का उपयोग करें। धूप में निकलने से 20 मिनट पहले सनस्क्रीन लगाएं।
समय का ध्यान: सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच सीधे धूप में जाने से बचें।
खान-पान: बाहर जाने से पहले हल्का खाना खाएं।
हाइड्रेशन: घर से निकलने से पहले 1-2 गिलास पानी पीएं। अपने साथ पानी की बोतल रखें।
पहनावा: हल्के रंग के ढीले-ढाले सूती कपड़े पहनें। धूप के चश्मे का प्रयोग करें।
सुरक्षा: टोपी, स्कार्फ या छाते का उपयोग करें। धूप में निकलने से 20 मिनट पहले सनस्क्रीन लगाएं।
समय का ध्यान: सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच सीधे धूप में जाने से बचें।
खान-पान: बाहर जाने से पहले हल्का खाना खाएं।