हाथरस हादसा: पैतृक गांव के आश्रम में शरण लेने पहुंचे साकार हरि उर्फ भोले बाबा, 12 वर्षों बाद आई यहां की याद
साकार हरि उर्फ भोले बाबा कासगंज में पैतृक गांव स्थित आश्रम पहुंचे। गांव में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।
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उत्तर प्रदेश के कासगंज में साकार हरि उर्फ भोले बाबा अपने पैतृक गांव बहादुरनगर स्थित आश्रम पहुंचे हैं। यहां पर भोले बाबा के साथ उनके अधिवक्ता एपी सिंह के आने की भी खबर है। गांव में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। आश्रम के बाहर सेवादारों का भी कड़ा पहरा है।
साकार हरि विश्व उर्फ भोले बाबा ने अपना पहला आश्रम अपने पैतृक गांव बहादुर नगर में वर्ष 1999 में स्थापित किया था। इसके बाद अन्य आश्रम बनाने का सिलसिला शुरू हुआ, लेकिन अपने पैतृक गांव के आश्रम में बाबा पिछले करीब 12 वर्षों से नहीं पहुंचे थे। बुधवार को वह अचानक अपने पैतृक गांव स्थित आश्रम में अपने अधिवक्ता के साथ पहुंचे और सीधे अंदर चले गए।
उन्होंने मीडिया से भी बात नहीं की और भक्तों से उनकी मुलाकात भी नहीं हो सकी। इससे उनके अनुयायियों को मायूसी हुई। वहीं उनके अधिवक्ता ने मीडिया से बातचीत की। इस दौरान उनके दर्शनों के लिए काफी संख्या में अनुयायी मौजूद रहे।
हाथरस स्थित सिकंदराराऊ हादसे के बाद भोले बाबा बुधवार को पहली बार इस आश्रम में पहुंचे, लेकिन भक्तों से नहीं मिले। बाबा के आश्रम पर आने की जानकारी मिलते ही भक्तों का तांता आश्रम पर लग गया। उन्होंने काफी देर तक बाबा से मुलाकात का इंतजार किया लेकिन उन्हें बाबा के दर्शन नहीं हो सके।
इससे मायूस होकर भक्त वापस लौट गए। बता दें कि सिकंदराराऊ हादसे के बाद बाबा देशभर की सुर्खियों में आ गए। बाबा पर तमाम आरोप लगे। बुधवार को आश्रम पहुंचे भोले बाबा के साथ उनके अधिवक्ता एपी सिंह भी थे।
अधिवक्ता एपी सिंह ने यहां भक्तों से यह अपील की कि वे अपने घर जाएं। कानून का सम्मान करना हमारी प्राथमिकता है। इसके बाद भी पूरे दिन भक्त आश्रम पर डटे रहे। महिला भक्त भी बड़ी संख्या में पहुंची थीं। जो एक स्थान पर बैठकर भजन कीर्तन करती नजर आईं। बाबा के आश्रम पर काफी सख्ती का माहौल बना हुआ था।
2023 में रजिस्ट्री कार्यालय आए थे भोले बाबा
भोले बाबा विगत 12 वर्षों से पटियाली स्थित अपने पैतृक गांव बहादुर नगर स्थित आश्रम नहीं पहुंचे थे। हालांकि भोले बाबा पिछले वर्ष 2023 में पटियाली स्थित रजिस्ट्री दफ्तर में अपने काम से आए थे, लेकिन इस दौरान भी वह आश्रम नहीं पहुंचे थे।