{"_id":"69dbdde9020ceb6c9407d022","slug":"years-old-high-school-becomes-cattle-shed-instead-of-education-kasganj-news-c-175-1-kas1003-146085-2026-04-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kasganj News: शिक्षा के बजाय पशुओं का बाड़ा बना सालों पुराना हाईस्कूल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kasganj News: शिक्षा के बजाय पशुओं का बाड़ा बना सालों पुराना हाईस्कूल
विज्ञापन
फोटो14गंजडुंडवारा के कादरगंज पुख्ता में उच्च प्राथमिक विद्यालय में बंधे मवेशी । संवाद
विज्ञापन
गंजडुंडवारा। एक ओर जहां स्कूल चलो अभियान और विभिन्न जागरूकता रैलियों के माध्यम से बच्चों के नामांकन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। वहीं, कादरगंज पुख्ता में बना एक हाईस्कूल विद्यालय उपेक्षा की कहानी बयां कर रहा है। सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है।
इस विद्यालय का निर्माण नौवीं और दसवीं के छात्रों को शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से कराया गया था। लगभग दस साल पहले निर्मित यह हाईस्कूल भवन, कभी क्षेत्र के छात्रों के भविष्य को संवारने का केंद्र बनना था। आज अपनी दुर्दशा के कारण पशुओं के बाड़े में तब्दील हो गया है।
शिक्षण कार्य शुरू न होने के कारण वर्तमान में यह भवन जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। दीवारों से प्लास्टर उखड़ने लगा है और कमरों की छतें दरकने लगी हैं। रखरखाव के अभाव में, विद्यालय के खिड़की-दरवाजे भी टूट चुके हैं। इससे यह भवन पूरी तरह से उपेक्षित और बेकार पड़ा हुआ है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस विद्यालय भवन का उपयोग अब स्थानीय ग्रामीण अपने पशुओं को बांधने के लिए कर रहे हैं। वर्तमान में यह सिर्फ पशुओं के लिए एक आश्रय स्थल बन गया है। यह स्थिति न केवल शिक्षा के प्रति सरकारी गंभीरता पर सवाल उठाती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के बुनियादी ढांचे की बदहाली को भी उजागर करती है।
-- -- -- -- -
ग्रामीण राम सिंह शर्मा का कहना है कि जूनियर कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद बच्चों, विशेषकर छात्राओं को आगे की पढ़ाई के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इससे कई बार उनकी शिक्षा बीच में ही छूट जाती है। अगर यह विद्यालय शुरू हो जाए तो छात्राओं को पास में ही शिक्षा मिल सकेगी।
गांव के पूर्व प्रधान सुरेश चंद ने बताया कि यदि यह विद्यालय समय पर चालू हो जाता तो ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं को सबसे अधिक लाभ मिलता। कई अभिभावक सुरक्षा कारणों से बेटियों को दूर पढ़ने नहीं भेजना चाहते हैं। ऐसे में गांव का यह विद्यालय उनके लिए वरदान साबित होता।
उन्होंने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि कई बार शिक्षा विभाग के अधिकारियों से इसकी शिकायत की गई। लेकिन अब तक विद्यालय का संचालन शुरू नहीं हो सका है।
विद्यालय के बंद होने की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि वे इसकी जांच कराएंगे। विद्यालय को जल्द ही चालू कराया जाएगा। - जगदीश प्रसाद शुक्ल, जिला विद्यालय निरीक्षक
Trending Videos
इस विद्यालय का निर्माण नौवीं और दसवीं के छात्रों को शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से कराया गया था। लगभग दस साल पहले निर्मित यह हाईस्कूल भवन, कभी क्षेत्र के छात्रों के भविष्य को संवारने का केंद्र बनना था। आज अपनी दुर्दशा के कारण पशुओं के बाड़े में तब्दील हो गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
शिक्षण कार्य शुरू न होने के कारण वर्तमान में यह भवन जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। दीवारों से प्लास्टर उखड़ने लगा है और कमरों की छतें दरकने लगी हैं। रखरखाव के अभाव में, विद्यालय के खिड़की-दरवाजे भी टूट चुके हैं। इससे यह भवन पूरी तरह से उपेक्षित और बेकार पड़ा हुआ है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस विद्यालय भवन का उपयोग अब स्थानीय ग्रामीण अपने पशुओं को बांधने के लिए कर रहे हैं। वर्तमान में यह सिर्फ पशुओं के लिए एक आश्रय स्थल बन गया है। यह स्थिति न केवल शिक्षा के प्रति सरकारी गंभीरता पर सवाल उठाती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के बुनियादी ढांचे की बदहाली को भी उजागर करती है।
ग्रामीण राम सिंह शर्मा का कहना है कि जूनियर कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद बच्चों, विशेषकर छात्राओं को आगे की पढ़ाई के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इससे कई बार उनकी शिक्षा बीच में ही छूट जाती है। अगर यह विद्यालय शुरू हो जाए तो छात्राओं को पास में ही शिक्षा मिल सकेगी।
गांव के पूर्व प्रधान सुरेश चंद ने बताया कि यदि यह विद्यालय समय पर चालू हो जाता तो ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं को सबसे अधिक लाभ मिलता। कई अभिभावक सुरक्षा कारणों से बेटियों को दूर पढ़ने नहीं भेजना चाहते हैं। ऐसे में गांव का यह विद्यालय उनके लिए वरदान साबित होता।
उन्होंने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि कई बार शिक्षा विभाग के अधिकारियों से इसकी शिकायत की गई। लेकिन अब तक विद्यालय का संचालन शुरू नहीं हो सका है।
विद्यालय के बंद होने की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि वे इसकी जांच कराएंगे। विद्यालय को जल्द ही चालू कराया जाएगा। - जगदीश प्रसाद शुक्ल, जिला विद्यालय निरीक्षक