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Kaushambi News: 451 ग्राम पंचायतों पर 42 करोड़ का बिजली बिल बकाया
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जिले की ग्राम पंचायतों की लापरवाही से बिजली विभाग पर भारी पड़ रही है। 451 ग्राम पंचायतों ने करीब 42 करोड़ रुपये का बिजली बिल अब तक जमा नहीं किया गया है, जिससे विभाग की वसूली व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। वहीं, शहर के कई विभाग भी बिजली के बड़े बकायेदार हैं।
जानकारी के अनुसार गांवों में संचालित विद्यालय, सामुदायिक शौचालय, पंचायत भवन, बरात घर और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं में बिजली का उपयोग किया जा रहा है। इनका बिल भुगतान ग्राम पंचायतों के जिम्मे है, लेकिन लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण बकाया लगातार बढ़ता जा रहा है।
शासन ने वर्ष 2018 के बाद से ही स्पष्ट निर्देश दिए थे कि ग्राम पंचायतें नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान करें, लेकिन उसे दरकिनार कर दिया गया। नतीजतन पंचायतों पर करीब 42 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया हो गया। बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कई बार नोटिस जारी किए गए लेकिन पंचायत स्तर पर भुगतान को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई गई।
अफसरों के मुताबिक अगर समय रहते भुगतान नहीं हुआ तो गांवों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। वहीं, जिम्मेदारों की उदासीनता से सरकारी योजनाओं का संचालन भी प्रभावित होने की आशंका है।
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जिले के बड़े बकायेदार :
सरकारी संस्थान बकाया (रुपये में)
मेडिकल कॉलेज 3,42,63,935
विकास भवन 60,17,629
बाल विकास परियोजना 15,98,271
उपसंभागीय परिवहन 37,66,064
जिला कार्यक्रम 14,32,609
मुख्य चिकित्साधिकारी 36,15,200
स्थानीय अधिसूचना अधिकारी 15,13,949
खनन विभाग 1,43,870
ट्रेजरी कार्यालय मंझनपुर 30,18,897
वन विभाग 17,19,951
महाप्रबंधक जिलाउद्योग 19,96,955
जिला उद्यान अधिकारी 16,11,450
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:: सभी विभागों को जो बिल दिया गया है उसको लेकर वह अपने स्तर से भुगतान कराएं। अगर संभव न हो तो उसके लिए पैरवी करें। जिससे भुगतान मार्च में हो जाए। - आरके कुशवाहा, अधिशाषी अभियंता
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जानकारी के अनुसार गांवों में संचालित विद्यालय, सामुदायिक शौचालय, पंचायत भवन, बरात घर और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं में बिजली का उपयोग किया जा रहा है। इनका बिल भुगतान ग्राम पंचायतों के जिम्मे है, लेकिन लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण बकाया लगातार बढ़ता जा रहा है।
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शासन ने वर्ष 2018 के बाद से ही स्पष्ट निर्देश दिए थे कि ग्राम पंचायतें नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान करें, लेकिन उसे दरकिनार कर दिया गया। नतीजतन पंचायतों पर करीब 42 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया हो गया। बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कई बार नोटिस जारी किए गए लेकिन पंचायत स्तर पर भुगतान को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई गई।
अफसरों के मुताबिक अगर समय रहते भुगतान नहीं हुआ तो गांवों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। वहीं, जिम्मेदारों की उदासीनता से सरकारी योजनाओं का संचालन भी प्रभावित होने की आशंका है।
जिले के बड़े बकायेदार :
सरकारी संस्थान बकाया (रुपये में)
मेडिकल कॉलेज 3,42,63,935
विकास भवन 60,17,629
बाल विकास परियोजना 15,98,271
उपसंभागीय परिवहन 37,66,064
जिला कार्यक्रम 14,32,609
मुख्य चिकित्साधिकारी 36,15,200
स्थानीय अधिसूचना अधिकारी 15,13,949
खनन विभाग 1,43,870
ट्रेजरी कार्यालय मंझनपुर 30,18,897
वन विभाग 17,19,951
महाप्रबंधक जिलाउद्योग 19,96,955
जिला उद्यान अधिकारी 16,11,450
:: सभी विभागों को जो बिल दिया गया है उसको लेकर वह अपने स्तर से भुगतान कराएं। अगर संभव न हो तो उसके लिए पैरवी करें। जिससे भुगतान मार्च में हो जाए। - आरके कुशवाहा, अधिशाषी अभियंता