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Kaushambi News: शोषण की शिकार बेटियों का सहारा बनी रानी लक्ष्मीबाई आत्मसम्मान योजना
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शोषण और अत्याचार की शिकार बेटियों के पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन के लिए सरकार की रानी लक्ष्मीबाई आत्मसम्मान योजना बड़ा सहारा बन रही है। बीते 10 वर्षों में जिले की करीब 90 किशोरियों को इस योजना का लाभ मिल चुका है। योजना में बेटियों को दो लाख से लेकर सात लाख तक की मदद मिलती है।
रानी लक्ष्मीबाई आत्मसम्मान योजना में दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट की पीड़िताओं और दहेज हत्या जैसी घटनाओं में प्रभावित बच्चों की मदद की जाती है। योजना के तहत पीड़ित बालिकाओं को आर्थिक सहायता देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जाता है।
एसपी राजेश कुमार ने बताया कि जो भी प्राथमिकी थानों में दर्ज होती है। उसकी गंभीरता के आधार पर कार्यालय से रिपोर्ट तैयार कर जिला प्रोबेशन कार्यालय को भेजी जाती है। जिला प्रोबेशन विभाग संबंधित प्रकरण की पत्रावली तैयार कर शासन को भेजता है। शासन स्तर से स्वीकृति मिलने के बाद लाभार्थी को सहायता राशि प्रदान की जाती है।
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-- पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर विभाग अपने स्तर पर सत्यापन करता है। इसके बाद पत्रावली शासन को भेजी जाती है। इस योजना का उद्देश्य पीड़िताओं को सामाजिक व मानसिक रूप से मजूबती प्रदान की जाती है ताकि वह कठिन परिस्थितियों से उबरकर सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें। - नीरज कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी।
एक नजर में योजना
- पीड़िताओं को नहीं करनी होती पैरवी।
-- - पुलिस व जिला प्रोबेशन विभाग मिलकर करता है मदद।
-- - शासन स्तर पर स्वत: मिलने लगती है धनराशि।
-- - पॉक्सो, दुष्कर्म व दहेज हत्या से प्रभावित बच्चों को मिलती है मदद।
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रानी लक्ष्मीबाई आत्मसम्मान योजना में दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट की पीड़िताओं और दहेज हत्या जैसी घटनाओं में प्रभावित बच्चों की मदद की जाती है। योजना के तहत पीड़ित बालिकाओं को आर्थिक सहायता देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जाता है।
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एसपी राजेश कुमार ने बताया कि जो भी प्राथमिकी थानों में दर्ज होती है। उसकी गंभीरता के आधार पर कार्यालय से रिपोर्ट तैयार कर जिला प्रोबेशन कार्यालय को भेजी जाती है। जिला प्रोबेशन विभाग संबंधित प्रकरण की पत्रावली तैयार कर शासन को भेजता है। शासन स्तर से स्वीकृति मिलने के बाद लाभार्थी को सहायता राशि प्रदान की जाती है।
एक नजर में योजना
- पीड़िताओं को नहीं करनी होती पैरवी।