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Kaushambi News: चूक पड़ी भारी, टूटा इकबाल तो हटे थानेदार और चौकी प्रभारी
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नारा गांव के लालचंद्र सोनकर हत्याकांड ने न केवल एक परिवार की खुशियां उजाड़ दीं, बल्कि पुलिस व्यवस्था की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वारदात के बाद हुई विभागीय समीक्षा में जब यह बात सामने आई कि घटना से चार दिन पहले ही पीड़ित पक्ष ने रंजिश और संभावित विवाद की लिखित शिकायत पुलिस को दी थी लेकिन उस पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इस पर पुलिस अधीक्षक सत्यनारायण ने बिना देर किए सख्त कदम उठाया।
कर्तव्य में लापरवाही बरतने के आरोप में मंझनपुर के प्रभारी निरीक्षक सुनील कुमार सिंह और नारा चौकी प्रभारी सुशील कुमार शुक्ल को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया है। साथ ही, दोनों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
पुलिस अधीक्षक सत्यनारायण ने बताया कि जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि नारा गांव के दो पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था।
पीड़ित पक्ष ने 24 जुलाई को नारा चौकी पहुंचकर लिखित शिकायत दी थी और किसी बड़ी अप्रिय घटना की आशंका जताई थी। इसके बावजूद स्थानीय पुलिस ने न तो दोनों पक्षों को बैठाकर विवाद सुलझाने का प्रयास किया और न ही कोई निवारक कार्रवाई की।
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नतीजा यह रहा कि महज दो दिन बाद, 26 जुलाई को तीजापर चौराहे पर बाइक ठीक कराने पहुंचे लालचंद्र सोनकर पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया गया। गंभीर रूप से घायल लालचंद्र ने 27 जुलाई की सुबह जिला अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
इस सनसनीखेज वारदात के बाद एसपी ने पूरे मामले की बारीकी से समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया पुलिस की लापरवाही सामने आने के बाद इंस्पेक्टर मंझनपुर और चौकी प्रभारी के खिलाफ यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।
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वारदात के बाद हुई विभागीय समीक्षा में जब यह बात सामने आई कि घटना से चार दिन पहले ही पीड़ित पक्ष ने रंजिश और संभावित विवाद की लिखित शिकायत पुलिस को दी थी लेकिन उस पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इस पर पुलिस अधीक्षक सत्यनारायण ने बिना देर किए सख्त कदम उठाया।
कर्तव्य में लापरवाही बरतने के आरोप में मंझनपुर के प्रभारी निरीक्षक सुनील कुमार सिंह और नारा चौकी प्रभारी सुशील कुमार शुक्ल को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया है। साथ ही, दोनों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
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पुलिस अधीक्षक सत्यनारायण ने बताया कि जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि नारा गांव के दो पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था।
पीड़ित पक्ष ने 24 जुलाई को नारा चौकी पहुंचकर लिखित शिकायत दी थी और किसी बड़ी अप्रिय घटना की आशंका जताई थी। इसके बावजूद स्थानीय पुलिस ने न तो दोनों पक्षों को बैठाकर विवाद सुलझाने का प्रयास किया और न ही कोई निवारक कार्रवाई की।
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नतीजा यह रहा कि महज दो दिन बाद, 26 जुलाई को तीजापर चौराहे पर बाइक ठीक कराने पहुंचे लालचंद्र सोनकर पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया गया। गंभीर रूप से घायल लालचंद्र ने 27 जुलाई की सुबह जिला अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
इस सनसनीखेज वारदात के बाद एसपी ने पूरे मामले की बारीकी से समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया पुलिस की लापरवाही सामने आने के बाद इंस्पेक्टर मंझनपुर और चौकी प्रभारी के खिलाफ यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।