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Kaushambi News: अव्यवस्थित अस्पताल, डॉक्टर तो कहीं उपकरण नहीं
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सैनी कोतवाली परिसर में बने मेडिकल भवन में स्थापित मिशन शक्ति। संवाद
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30 जुलाई से सावन शुरू हो रहा है। कांवड़ यात्रा के दौरान कानपुर-प्रयागराज हाईवे पर कांवड़ियों और भारी वाहनों का दबाव बढ़ेगा। इसके बाद भी हाईवे के किनारे बनाए गए पांच अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाएं दुरुस्त नहीं हैं।
किसी सीएचसी में डॉक्टरों की संख्या कम है तो कहीं पूरे उपकरण नहीं हैं। वहीं, महाकुंभ में बनाए गए अस्थायी अस्पताल भी बंद कर दिए गए हैं। इससे कांवड़ियों का सफर मुश्किल भरा हो सकता है।
जिले में मूरतगंज, आलमचंद, सिराथू, ट्रॉमा सेंटर कछुआ और अजुहा सीएचसी में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत खस्ताहाल है। संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल में सामने आया कि करोड़ों रुपये की लागत से बने नरसिंहपुर कछुआ ट्रॉमा सेंटर में 10 डॉक्टरों के सापेक्ष केवल पांच चिकित्सक तैनात हैं।
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एक्सरे मशीन होने के बाद भी जांच शुरू नहीं हुई। ऑक्सीजन, सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड जैसी सुविधाएं यहां उपलब्ध नहीं हैं। कर्मचारियों के रहने की व्यवस्था न होने से इमरजेंसी सेवाएं भी प्रभावित होती हैं। ऐसे में गंभीर मरीजों को मेडिकल कॉलेज मंझनपुर या प्रयागराज रेफर करना पड़ता है।
वहीं, दो वर्ष पहले प्रयागराज महाकुंभ के दौरान सैनी और कोखराज के थानों के आसपास बनाए गए अस्थायी अस्पताल अब बंद पड़े हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सावन में हजारों कांवड़िये इसी मार्ग से गुजरेंगे लेकिन यहां स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप हैं।
थाने में बने भवन में संचालित हो रहा मिशन शक्ति केंद्र
महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं के इलाज के लिए सैनी थाना परिसर के अंदर एक अस्थायी अस्पताल शुरू किया गया था। अब इस जगह पर मिशन शक्ति केंद्र चल रहा है। लोगों का कहना है कि अस्थायी अस्पताल को श्रद्धालुओं के लिए खोला गया था ताकि कोई हादसे हो जाए तो तत्काल स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
सीएचसी में एक्सरे मशीन पर संचालन अनियमित
वर्तमान में मूरतगंज और आलमचंद सीएचसी में एक्सरे मशीन है लेकिन उसका नियमित संचालित नहीं होता है। दोनों सीएचसी में विशेषज्ञ चिकित्सकों के कई पद खाली हैं। सिराथू सीएचसी और ट्रॉमा सेंटर नरसिंहपुर कछुआ में भी संसाधनों की कमी है। अजुहा सीएचसी में स्थिति कमोबेश यही है। उचित उपचार न मिलने से मरीजों को मेडिकल कॉलेज या प्रयागराज रेफर किया जाता है।
वर्जन
सरकार ने कांवड़ यात्रा को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं, लेकिन जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर अभी तक व्यापक तैयारी नजर नहीं आ रही है। अगर कोई बड़ी दुर्घटना हो गई तो कांवड़ियों के साथ अन्य लोगों को दिक्कत होगी।
-- -- हरिमोहन पांडे, सिराथू
कांवड़ यात्रा को देखते हुए महाकुंभ के दौरान बनाए गए अस्पतालों का संचालन दोबारा शुरू किया जाना चाहिए। साथ ही ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टरों और जांच सुविधाओं की कमी तत्काल दूर की जाए ताकि इलाज मिल सके। - फूलचंद विश्वकर्मा, उदिहिन खुर्द
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कांवड़ यात्रा को लेकर हाईवे से जुड़े सभी अस्पतालों को अलर्ट कर दिया गया है। अस्पतालों में चिकित्सकीय स्टाफ, पर्याप्त दवाएं, ऑक्सीजन, इमरजेंसी बेड की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। दुर्घटना या आपात स्थिति में घायलों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह तैयार है। डॉ. संजय कुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।
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हाईवे के किनारे बने पांच प्रमुख अस्पताल
मूरतगंज सीएचसी
आलमचंद सीएचसी
सिराथू सीएचसी
ट्रॉमा सेंटर कछुआ
अजुहा सीएचसी
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किसी सीएचसी में डॉक्टरों की संख्या कम है तो कहीं पूरे उपकरण नहीं हैं। वहीं, महाकुंभ में बनाए गए अस्थायी अस्पताल भी बंद कर दिए गए हैं। इससे कांवड़ियों का सफर मुश्किल भरा हो सकता है।
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जिले में मूरतगंज, आलमचंद, सिराथू, ट्रॉमा सेंटर कछुआ और अजुहा सीएचसी में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत खस्ताहाल है। संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल में सामने आया कि करोड़ों रुपये की लागत से बने नरसिंहपुर कछुआ ट्रॉमा सेंटर में 10 डॉक्टरों के सापेक्ष केवल पांच चिकित्सक तैनात हैं।
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एक्सरे मशीन होने के बाद भी जांच शुरू नहीं हुई। ऑक्सीजन, सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड जैसी सुविधाएं यहां उपलब्ध नहीं हैं। कर्मचारियों के रहने की व्यवस्था न होने से इमरजेंसी सेवाएं भी प्रभावित होती हैं। ऐसे में गंभीर मरीजों को मेडिकल कॉलेज मंझनपुर या प्रयागराज रेफर करना पड़ता है।
वहीं, दो वर्ष पहले प्रयागराज महाकुंभ के दौरान सैनी और कोखराज के थानों के आसपास बनाए गए अस्थायी अस्पताल अब बंद पड़े हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सावन में हजारों कांवड़िये इसी मार्ग से गुजरेंगे लेकिन यहां स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप हैं।
थाने में बने भवन में संचालित हो रहा मिशन शक्ति केंद्र
महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं के इलाज के लिए सैनी थाना परिसर के अंदर एक अस्थायी अस्पताल शुरू किया गया था। अब इस जगह पर मिशन शक्ति केंद्र चल रहा है। लोगों का कहना है कि अस्थायी अस्पताल को श्रद्धालुओं के लिए खोला गया था ताकि कोई हादसे हो जाए तो तत्काल स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
सीएचसी में एक्सरे मशीन पर संचालन अनियमित
वर्तमान में मूरतगंज और आलमचंद सीएचसी में एक्सरे मशीन है लेकिन उसका नियमित संचालित नहीं होता है। दोनों सीएचसी में विशेषज्ञ चिकित्सकों के कई पद खाली हैं। सिराथू सीएचसी और ट्रॉमा सेंटर नरसिंहपुर कछुआ में भी संसाधनों की कमी है। अजुहा सीएचसी में स्थिति कमोबेश यही है। उचित उपचार न मिलने से मरीजों को मेडिकल कॉलेज या प्रयागराज रेफर किया जाता है।
वर्जन
सरकार ने कांवड़ यात्रा को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं, लेकिन जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर अभी तक व्यापक तैयारी नजर नहीं आ रही है। अगर कोई बड़ी दुर्घटना हो गई तो कांवड़ियों के साथ अन्य लोगों को दिक्कत होगी।
कांवड़ यात्रा को देखते हुए महाकुंभ के दौरान बनाए गए अस्पतालों का संचालन दोबारा शुरू किया जाना चाहिए। साथ ही ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टरों और जांच सुविधाओं की कमी तत्काल दूर की जाए ताकि इलाज मिल सके। - फूलचंद विश्वकर्मा, उदिहिन खुर्द
कांवड़ यात्रा को लेकर हाईवे से जुड़े सभी अस्पतालों को अलर्ट कर दिया गया है। अस्पतालों में चिकित्सकीय स्टाफ, पर्याप्त दवाएं, ऑक्सीजन, इमरजेंसी बेड की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। दुर्घटना या आपात स्थिति में घायलों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह तैयार है। डॉ. संजय कुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।
हाईवे के किनारे बने पांच प्रमुख अस्पताल
मूरतगंज सीएचसी
आलमचंद सीएचसी
सिराथू सीएचसी
ट्रॉमा सेंटर कछुआ
अजुहा सीएचसी

सैनी कोतवाली परिसर में बने मेडिकल भवन में स्थापित मिशन शक्ति। संवाद

सैनी कोतवाली परिसर में बने मेडिकल भवन में स्थापित मिशन शक्ति। संवाद

सैनी कोतवाली परिसर में बने मेडिकल भवन में स्थापित मिशन शक्ति। संवाद