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Kaushambi News: कच्चा मकान ढहने से थम गई पांच वर्षीय मासूम की सांसें

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jul 2026 01:44 AM IST
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Five-year-old child loses life as mud house collapses.
बारिश के बीच जर्जर कच्चा मकान पांच वर्षीय मासूम प्रिया के लिए काल बन गया। जमुनापुर गांव में खपरैल का मकान अचानक भरभराकर गिर पड़ा। जान बचाने की अफरा-तफरी में परिवार के अन्य सदस्य तो बाहर निकल आए, लेकिन मासूम घर के भीतर ही फंस गई।
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करीब 20 मिनट तक चले राहत प्रयासों के बाद जब उसे मलबे से बाहर निकाला गया, तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। इस दर्दनाक हादसे के बाद परिवार में कोहराम मच गया।
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सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। हालांकि, हादसे के कई घंटे बीत जाने के बाद भी मौके पर जिम्मेदार अधिकारियों के नहीं पहुंचने से ग्रामीणों में गहरा आक्रोश देखने को मिला।
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जमुनापुर निवासी पंकज निषाद अपनी पत्नी और चार बच्चों के साथ इसी कच्चे खपरैल मकान में रह रहे थे। मंगलवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे अचानक तेज आवाज के साथ मकान ढहने लगा। परिवार के लोग जान बचाने के लिए बाहर भागे, लेकिन उनकी पांच वर्षीय बेटी प्रिया मलबे की चपेट में आ गई। परिजनों और ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद उसे बाहर निकाला, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
महेवाघाट थानाध्यक्ष धीरेंद्र सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। उधर, ग्रामीणों का आरोप है कि घटना के काफी देर बाद भी प्रशासन का कोई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा और केवल एक राजस्व कर्मी ने ही स्थिति का जायजा लिया।

इस संबंध में राजस्व निरीक्षक केशव लाल ने बताया कि व्यस्तता के चलते वह खुद नहीं जा सके थे, इसलिए उन्होंने राजस्व कर्मी को मौके पर भेजा था।
पक्का आवास मिलता तो शायद बच जाती प्रिया की जान
महेवाघाट। मासूम की मौत के बाद आवास योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठने लगे हैं। मृतका के पिता पंकज निषाद का कहना है कि उन्होंने कई बार ब्लॉक और जिला स्तर पर पक्का आवास दिलाने की गुहार लगाई, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। यदि समय रहते पक्का मकान मिल गया होता तो शायद उनकी बेटी आज जिंदा होती। संवाद
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