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Kaushambi News: कचरे का कारोबार... नौकरी छोड़ी, गांव लौटे और भूसे से कमाया मुनाफा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 25 Mar 2026 12:41 AM IST
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Waste business... Quit job, return to village and make profit from straw
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सरसों और मटर की फसल की कटाई के बाद खेतों में बचा भूसा (अपशिष्ट) अक्सर किसानों के लिए परेशानी बन जाता है। इस भूसे को न ही मवेशी खाते हैं और न ही इसका कोई उपयोग होता है। ऐसे में किसान खेतों में ही इसे जला देते हैं, जो मिट्टी की उर्वरता को घटाता है।
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लेकिन कौशाम्बी के युवा ने नौकरी छोड़कर अपशिष्ट से कारोबार खड़ा किया। वह बायोमास ब्रिकेट तैयार हर महीने एक लाख रुपये कमा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बिक्रेट को कोयले के विकल्प के रूप में बॉयलर और ईंट-भट्ठों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
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कौशाम्बी के छेकवा निवासी अनुराग सिंह ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से वेस्ट मटेरियल मैनेजमेंट में पीएचडी करने के बाद बरेली के इनवर्टिस विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्य किया। हालांकि, उन्होंने एक साल के भीतर ही नौकरी छोड़ दी और घर लौट आए।
कादिरपुर नेवादा के रामधीन सिंह के साथ साझेदारी में करीब एक करोड़ रुपये की लागत से उनके गांव में बायोमास ब्रिकेट प्लांट स्थापित किया। इसके लिए उन्होंने बैंक से 35 लाख रुपये का ऋण भी लिया। इस प्लांट में सरसों-मटर के भूसे समेत सभी प्रकार के कृषि अपशिष्ट को खरीदा जाता है।
मशीनों से बाइंडिंग केमिकल मिलाकर बायोमास ब्रिकेट तैयार किए जाते हैं। वर्तमान में प्लांट में रोजाना करीब 15 से 20 टन बिक्रेट तैयार होते हैं। शुरुआती दौर में कच्चे माल की उपलब्धता और बाजार तैयार करने में चुनौतियां भी आईं। उन्होंने किसानों को जागरूक किया कि भूसा जलाने से मिट्टी के सूक्ष्म तत्व नष्ट हो जाते हैं और पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है।
अब किसान इस भूसे को तीन रुपये प्रति किलो के भाव से प्लांट को बेच रहे हैं। वहीं, फैक्टरी में ऑपरेटर, सुपरवाइजर और क्वालिटी मैनेजर समेत 25 लोग ब्रिकेट की छंटाई और बोरियों में भराई करते हैं। अनुराग का कहना है कि खेत का कचरा अब कमाई का जरिया बन गया है। इससे प्रदूषण पर रोक लग रही है। वह हर महीने करीब एक लाख रुपये की आमदनी कर रहे हैं।
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ईंधन के रूप इस्तेमाल हो रहा ब्रिकेट
खेतों में बेकार समझा जाने वाला भूसा ईंधन के रूप में इस्तेमाल हो रहा है। इससे तैयार ब्रिकेट का इस्तेमाल प्लाईवुड इंडस्ट्री, राइस मिल, केमिकल फैक्टरी, ईंट-भट्ठों पर हो रहा है। जहां भी बॉयलर चलते हैं, वहां इनका उपयोग होता है। नैनी, वाराणसी और अमेठी के त्रिसुंडी औद्योगिक क्षेत्र में इन ब्रिकेट्स की आपूर्ति छह से सात रुपये प्रति किलो के हिसाब से की जा रही है। जिससे उद्योगों को सस्ता और टिकाऊ ईंधन मिल रहा है।
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