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Kaushambi News: पेन बना रहीं महिलाओं को नहीं मिल रहा बाजार, पैकेजिंग बनी बड़ी बाधा
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Thu, 23 Apr 2026 12:49 AM IST
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कनैली में संगीता देवी के घर पर पेन बनातीं समूह की महिलाएं। स्रोत: स्वयं
- फोटो : टूंडला के सुभाष चौराहे पर राहुल गांधी का प्रतीकात्म पुतला दहन करते भाजपाई संवाद
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कौशाम्बी ब्लॉक के कनैली निवासी संगीता देवी ने पेन बनाना शुरू किया लेकिन संसाधनों की कमी के चलते उनका कारोबार संकट में पड़ गया है। संगीता देवी वर्ष 2022 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और अप्रैल 2023 में उन्हें घर पर ही दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने अपने समूह की 10 महिलाओं के साथ मिलकर पेन बनाना शुरू किया।
शुरुआत में विभाग की ओर से स्याही और अन्य कच्चा माल उपलब्ध कराया गया, लेकिन बाद में उन्हें प्रयागराज से खुद ही सामग्री खरीदनी पड़ी। संगीता का कहना है कि उनके द्वारा बनाए गए पेन गुणवत्ता के मामले में बाजार में उपलब्ध पेन से किसी भी तरह कम नहीं हैं, फिर भी उन्हें उचित बाजार नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने बताया कि बाजार में पहले से मौजूद पेन की पैकेजिंग आकर्षक होती है, जबकि उनके पास ऐसी सुविधाएं नहीं हैं। इसी कारण ग्राहक उनके उत्पादों की ओर कम आकर्षित हो रहे हैं। संगीता देवी ने बताया कि समूह के माध्यम से लोन लेकर यह कारोबार शुरू किया गया था, लेकिन बिक्री न होने के कारण आय नहीं हो पा रही है।
हालात ऐसे हो गए हैं कि लोन की किस्त चुकाना भी मुश्किल है। बढ़ते आर्थिक दबाव के बीच संगीता और उनकी साथी महिलाओं ने संबंधित विभाग से लोन माफी की मांग की है, ताकि वे इस कार्य को जारी रख सकें और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकें।
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शुरुआत में विभाग की ओर से स्याही और अन्य कच्चा माल उपलब्ध कराया गया, लेकिन बाद में उन्हें प्रयागराज से खुद ही सामग्री खरीदनी पड़ी। संगीता का कहना है कि उनके द्वारा बनाए गए पेन गुणवत्ता के मामले में बाजार में उपलब्ध पेन से किसी भी तरह कम नहीं हैं, फिर भी उन्हें उचित बाजार नहीं मिल पा रहा है।
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उन्होंने बताया कि बाजार में पहले से मौजूद पेन की पैकेजिंग आकर्षक होती है, जबकि उनके पास ऐसी सुविधाएं नहीं हैं। इसी कारण ग्राहक उनके उत्पादों की ओर कम आकर्षित हो रहे हैं। संगीता देवी ने बताया कि समूह के माध्यम से लोन लेकर यह कारोबार शुरू किया गया था, लेकिन बिक्री न होने के कारण आय नहीं हो पा रही है।
हालात ऐसे हो गए हैं कि लोन की किस्त चुकाना भी मुश्किल है। बढ़ते आर्थिक दबाव के बीच संगीता और उनकी साथी महिलाओं ने संबंधित विभाग से लोन माफी की मांग की है, ताकि वे इस कार्य को जारी रख सकें और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकें।

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