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Kushinagar News: हाटा में 100 एकड़ भूमि चिह्नित, होंगे विकास कार्य
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पडरौना। जिले के विकास को गति देने के लिए प्रशासन ने हाटा तहसील के ग्राम पट्टन और सोनबरसा में करीब 100 एकड़ सरकारी भूमि चिह्नित की है। फर्जी इंद्राज हटाकर इसे सरकारी अभिलेखों में दर्ज कराने की कार्रवाई की जा रही है, ताकि भविष्य में शासन की महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं के लिए इसका उपयोग किया जा सके।
शनिवार को डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने दोनों गांवों चिह्नित जमीन का निरीक्षण किया। हाटा एसडीएम योगेश्वर सिंह ने बताया कि पूर्व में एक प्रकरण की जांच में पता चला था कि पट्टन की इस भूमि का अधिकांश भाग भूमिधरी के रूप में प्रयोग किया जा रहा है, जबकि वर्ष 1323 फसली बंदोबस्त के अभिलेखों में दोनों गाटे धूस (सरकारी भूमि) के रूप में दर्ज थे।
वहीं, ग्राम सोनबरसा का गाटा संख्या-156 वर्तमान में खाली है। यह जमीन भी सरकारी अभिलेखों में धूस के नाम से दर्ज है।
मामले की विस्तृत जांच कर फर्जी इंद्राज निरस्त कराने और भूमि को पुनः धूस के रूप में दर्ज कराने की कार्रवाई की जा रही है। डीएम ने निरीक्षण के दौरान भूमि की वर्तमान स्थिति, ड्रोन सर्वे, सीमांकन, अभिलेखीय विवरण एवं उपलब्धता की जानकारी ली।
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उन्होंने भूमि से जुड़े सभी अभिलेखों का परीक्षण कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई समय से पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि शासन स्तर पर प्रस्तावित विकास परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराई जा सके। डीएम ने कहा कि यदि यह भूमि प्रस्तावित परियोजनाओं के लिए उपयुक्त पाई जाती है, तो इससे क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति मिलेगी तथा स्थानीय नागरिकों को रोजगार, आधारभूत सुविधाओं एवं अन्य विकासात्मक योजनाओं का व्यापक लाभ प्राप्त होगा।
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शनिवार को डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने दोनों गांवों चिह्नित जमीन का निरीक्षण किया। हाटा एसडीएम योगेश्वर सिंह ने बताया कि पूर्व में एक प्रकरण की जांच में पता चला था कि पट्टन की इस भूमि का अधिकांश भाग भूमिधरी के रूप में प्रयोग किया जा रहा है, जबकि वर्ष 1323 फसली बंदोबस्त के अभिलेखों में दोनों गाटे धूस (सरकारी भूमि) के रूप में दर्ज थे।
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वहीं, ग्राम सोनबरसा का गाटा संख्या-156 वर्तमान में खाली है। यह जमीन भी सरकारी अभिलेखों में धूस के नाम से दर्ज है।
मामले की विस्तृत जांच कर फर्जी इंद्राज निरस्त कराने और भूमि को पुनः धूस के रूप में दर्ज कराने की कार्रवाई की जा रही है। डीएम ने निरीक्षण के दौरान भूमि की वर्तमान स्थिति, ड्रोन सर्वे, सीमांकन, अभिलेखीय विवरण एवं उपलब्धता की जानकारी ली।
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उन्होंने भूमि से जुड़े सभी अभिलेखों का परीक्षण कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई समय से पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि शासन स्तर पर प्रस्तावित विकास परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराई जा सके। डीएम ने कहा कि यदि यह भूमि प्रस्तावित परियोजनाओं के लिए उपयुक्त पाई जाती है, तो इससे क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति मिलेगी तथा स्थानीय नागरिकों को रोजगार, आधारभूत सुविधाओं एवं अन्य विकासात्मक योजनाओं का व्यापक लाभ प्राप्त होगा।