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Kushinagar News: सिधरिया नाले में मिले लापता बच्चियों के शव
Sun, 02 Aug 2026 02:26 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 02 Aug 2026 02:26 AM IST
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दुबौली गांव में तीनों बहनों की शव मिलने के बाद घटना की जानकारी लेती पुलिस।स्रोत-सोशल मीडिया
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मंसाछापर। नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के दुबौली गांव के समीप सिधरिया ड्रेन में शुक्रवार शाम हुए हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। एक ही परिवार की तीन मासूम बहनें तेज बहाव में समा गईं। देर रात तक तलाशी अभियान चलाया गया। करीब 12 घंटे बाद शनिवार की सुबह तीनों बहनों के शव उतराए मिले। शव मिलते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
गांव के शंभू की बेटियां सपना (10) व छोटी (8) और रंजीत की बेटी कुंजन (12) शुक्रवार की शाम खेत से घास काटकर लौट रही थीं। बभनौली गांव के पास सिधरिया ड्रेन की पुलिया पर खड़ी थीं। इसी दौरान एक बच्ची का संतुलन बिगड़ गया और वह नीचे गिर गई। उसे बचाने के प्रयास में दोनों बच्चियां भी पुलिया से नीचे तेज बहाव वाले ड्रेन में जा गिरीं। पास में मौजूद सपना का छोटा भाई कल्लू यह सब देखता रह गया।
उसने शोर मचाया तो आसपास के लोग दौड़ पड़े लेकिन तब तक तीनों बच्चियां नहर (ड्रेन) में लापता हो चुकी थीं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंच गए। सदर एसडीएम राजीव निगम, तहसीलदार अभिषेक मिश्र, क्षेत्राधिकारी वीरेंद्र सिंह, सदर विधायक मनीष जायसवाल सहित कई अधिकारी देर रात तक मौके पर डटे रहे। एसडीआरएफ और पुलिस ने स्थानीय ग्रामीणों की मदद से लगातार सर्च अभियान चलाया लेकिन तेज बहाव, गहराई और पानी में उगे खरपतवार के कारण सफलता नहीं मिली।
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शनिवार सुबह होते ही ग्रामीण फिर ड्रेन में उतर गए। करीब एक घंटे की तलाश के बाद तीनों बच्चियों के शव पानी में उतराए दिखे। लोगों ने शवों को बाहर निकाला। एक साथ तीनों शव देखकर मौके पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। सपना और छोटी के पिता शंभू राजमिस्त्री हैं। कुंजन के पिता रंजीत मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। तीनों बच्चियों की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव में कई घरों में शनिवार को चूल्हा नहीं जला हर ओर सिर्फ मातम का माहौल रहा।
निजी विद्यालय में पढ़ती थीं : सपना, छोटी उर्फ शिवानी और कुंजन गांव के बगल के मठिया चौराहे पर एक निजी विद्यालय में पढ़ती थीं। तीनों अपने भाई कल्लू के साथ प्रतिदिन स्कूल जाती-आती थीं। सपना सातवीं, छोटी उर्फ शिवानी छठी और कुंजन चौथी कक्षा में पढ़ती थी। सपना अपने भाई बहनों में तीसरी, छोटी चौथी और कुंजन दूसरे नंबर की थी।
भाई कल्लू की आंखों के सामने बह गईं तीनों बहनें : शुक्रवार की शाम का वह मंजर शायद ही कभी कल्लू की आंखों से ओझल हो सकेगा। वह अपनी बहनों के साथ खेत से लौट रहा था। पुलिया पर खड़े होने के दौरान एक का संतुलन बिगड़ा और वह ड्रेन में गिर गई। उसे बचाने में दूसरी और फिर तीसरी भी तेज बहाव में समा गई। कल्लू बदहवास होकर मदद के लिए चिल्लाता रहा लेकिन कुछ ही पलों में तीनों बहनें आंखों से ओझल हो गईं। उसकी चीखें सुनकर ग्रामीण दौड़े मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
शुक्रवार शाम तीनों बच्चियां रोज की तरह खेत की ओर घास काटने गई थीं। किसी ने नहीं सोचा था कि यह उनकी जिंदगी की आखिरी शाम होगी। परिवार के लोग देर तक उनके लौटने का इंतजार करते रहे। हादसे की खबर मिलते ही खुशियों से भरा आंगन मातम में बदल गया। पूरी रात परिजन ड्रेन किनारे टकटकी लगाए बैठे रहे। शनिवार सुबह जब तीनों के शव गांव लाए गए तो हर आंख नम हो गई। जिस आंगन में बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां सिर्फ विलाप सुनाई दे रहा था।
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गांव के शंभू की बेटियां सपना (10) व छोटी (8) और रंजीत की बेटी कुंजन (12) शुक्रवार की शाम खेत से घास काटकर लौट रही थीं। बभनौली गांव के पास सिधरिया ड्रेन की पुलिया पर खड़ी थीं। इसी दौरान एक बच्ची का संतुलन बिगड़ गया और वह नीचे गिर गई। उसे बचाने के प्रयास में दोनों बच्चियां भी पुलिया से नीचे तेज बहाव वाले ड्रेन में जा गिरीं। पास में मौजूद सपना का छोटा भाई कल्लू यह सब देखता रह गया।
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उसने शोर मचाया तो आसपास के लोग दौड़ पड़े लेकिन तब तक तीनों बच्चियां नहर (ड्रेन) में लापता हो चुकी थीं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंच गए। सदर एसडीएम राजीव निगम, तहसीलदार अभिषेक मिश्र, क्षेत्राधिकारी वीरेंद्र सिंह, सदर विधायक मनीष जायसवाल सहित कई अधिकारी देर रात तक मौके पर डटे रहे। एसडीआरएफ और पुलिस ने स्थानीय ग्रामीणों की मदद से लगातार सर्च अभियान चलाया लेकिन तेज बहाव, गहराई और पानी में उगे खरपतवार के कारण सफलता नहीं मिली।
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शनिवार सुबह होते ही ग्रामीण फिर ड्रेन में उतर गए। करीब एक घंटे की तलाश के बाद तीनों बच्चियों के शव पानी में उतराए दिखे। लोगों ने शवों को बाहर निकाला। एक साथ तीनों शव देखकर मौके पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। सपना और छोटी के पिता शंभू राजमिस्त्री हैं। कुंजन के पिता रंजीत मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। तीनों बच्चियों की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव में कई घरों में शनिवार को चूल्हा नहीं जला हर ओर सिर्फ मातम का माहौल रहा।
निजी विद्यालय में पढ़ती थीं : सपना, छोटी उर्फ शिवानी और कुंजन गांव के बगल के मठिया चौराहे पर एक निजी विद्यालय में पढ़ती थीं। तीनों अपने भाई कल्लू के साथ प्रतिदिन स्कूल जाती-आती थीं। सपना सातवीं, छोटी उर्फ शिवानी छठी और कुंजन चौथी कक्षा में पढ़ती थी। सपना अपने भाई बहनों में तीसरी, छोटी चौथी और कुंजन दूसरे नंबर की थी।
भाई कल्लू की आंखों के सामने बह गईं तीनों बहनें : शुक्रवार की शाम का वह मंजर शायद ही कभी कल्लू की आंखों से ओझल हो सकेगा। वह अपनी बहनों के साथ खेत से लौट रहा था। पुलिया पर खड़े होने के दौरान एक का संतुलन बिगड़ा और वह ड्रेन में गिर गई। उसे बचाने में दूसरी और फिर तीसरी भी तेज बहाव में समा गई। कल्लू बदहवास होकर मदद के लिए चिल्लाता रहा लेकिन कुछ ही पलों में तीनों बहनें आंखों से ओझल हो गईं। उसकी चीखें सुनकर ग्रामीण दौड़े मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
शुक्रवार शाम तीनों बच्चियां रोज की तरह खेत की ओर घास काटने गई थीं। किसी ने नहीं सोचा था कि यह उनकी जिंदगी की आखिरी शाम होगी। परिवार के लोग देर तक उनके लौटने का इंतजार करते रहे। हादसे की खबर मिलते ही खुशियों से भरा आंगन मातम में बदल गया। पूरी रात परिजन ड्रेन किनारे टकटकी लगाए बैठे रहे। शनिवार सुबह जब तीनों के शव गांव लाए गए तो हर आंख नम हो गई। जिस आंगन में बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां सिर्फ विलाप सुनाई दे रहा था।