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Kushinagar News: जेल में 80 वर्षीय बंदी की मौत, इलाज में लापरवाही का आरोप
Fri, 07 Aug 2026 02:42 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Fri, 07 Aug 2026 02:42 AM IST
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बनकटा बाजार। देवरिया जिला कारागार में बंद 80 वर्षीय विचाराधीन हकीक अंसारी की बृहस्पतिवार दोपहर इलाज के दौरान मौत हो गई। जेल प्रशासन के अनुसार, तबीयत बिगड़ने पर उन्हें महर्षि देवराहा बाबा मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। वहीं, मृतक के परिजनों ने जेल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
हकीक अंसारी पटहेरवा थाना क्षेत्र के भटवा गांव के निवासी थे। वह वर्ष 2023 से धोखाधड़ी, कूटरचना और जमीन विवाद से जुड़े मामले में अपने भाई रफीक अंसारी के साथ देवरिया जिला कारागार में निरुद्ध थे। पुलिस के अनुसार, दोनों भाइयों पर पहले बेची गई जमीन को दोबारा दूसरे व्यक्ति के नाम कर देने का आरोप है। शिकायतकर्ता ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने और सरकारी अभिलेखों में हेरफेर का भी आरोप लगाया था। इसी मामले में गिरफ्तारी के बाद न्यायालय के आदेश पर उन्हें जेल भेजा गया था।
हकीक अंसारी के बेटे मेराज ने आरोप लगाया कि उनके पिता उच्च रक्तचाप और मधुमेह के मरीज थे और नियमित दवाओं पर निर्भर थे। परिवार की ओर से कई बार दवाएं जेल पहुंचाई गईं लेकिन जेल प्रशासन ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि समय पर बेहतर इलाज मिलता तो उनकी जान बच सकती थी।
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हकीक अंसारी पटहेरवा थाना क्षेत्र के भटवा गांव के निवासी थे। वह वर्ष 2023 से धोखाधड़ी, कूटरचना और जमीन विवाद से जुड़े मामले में अपने भाई रफीक अंसारी के साथ देवरिया जिला कारागार में निरुद्ध थे। पुलिस के अनुसार, दोनों भाइयों पर पहले बेची गई जमीन को दोबारा दूसरे व्यक्ति के नाम कर देने का आरोप है। शिकायतकर्ता ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने और सरकारी अभिलेखों में हेरफेर का भी आरोप लगाया था। इसी मामले में गिरफ्तारी के बाद न्यायालय के आदेश पर उन्हें जेल भेजा गया था।
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हकीक अंसारी के बेटे मेराज ने आरोप लगाया कि उनके पिता उच्च रक्तचाप और मधुमेह के मरीज थे और नियमित दवाओं पर निर्भर थे। परिवार की ओर से कई बार दवाएं जेल पहुंचाई गईं लेकिन जेल प्रशासन ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि समय पर बेहतर इलाज मिलता तो उनकी जान बच सकती थी।
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