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Kushinagar News: सरकारी मदद की राह में कागजी अड़चन
Sat, 11 Jul 2026 02:24 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sat, 11 Jul 2026 02:24 AM IST
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सुकरौली। 17 जून को लापता होने के बाद 23 जून को कंकाल मिलने से चर्चा में आए सफाईकर्मी योगेश प्रकरण में अब परिवार की सबसे बड़ी लड़ाई सरकारी सहायता पाने की बन गई है। पिता को खो चुके पांच मासूमों के सामने अब जीवनयापन के साथ-साथ जरूरी दस्तावेज जुटाने की चुनौती है। सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए जन्म प्रमाण पत्र आवश्यक है, लेकिन ब्लाक स्तर पर सहयोग नही होने से यही दस्तावेज परिवार के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन गया है।
योगेश के परिवार में अभिभावक के रूप में उनके बुजुर्ग पिता रामप्यारे बचे हैं। बढ़ती उम्र और सीमित सामर्थ्य के कारण उनके लिए तहसील और ब्लॉक के चक्कर लगाना आसान नहीं है। बेटियां सोना, सृष्टि, किरण और अंबिका तथा बेटा कृष्णा सरकारी सहायता की उम्मीद लगाए बैठे हैं लेकिन जन्म प्रमाण पत्र न होने से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। परिवार की मदद के लिए आगे आए सहयोगी श्रीराम आवश्यक कागजात तैयार कराने और संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने में जुटे हैं। इसके बावजूद दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने में देरी से परिवार की चिंता बढ़ती जा रही है।
परिजनों का कहना है कि कई जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार अधिकारी संवेदना व्यक्त करने घर पहुंचे, आश्वासन भी दिए, लेकिन बच्चों के जरूरी दस्तावेज जल्द बनवाने की दिशा में अब तक कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब किसी परिवार पर ऐसी विपत्ति आती है तो प्रशासन को संवेदनशीलता दिखाते हुए आवश्यक दस्तावेज प्राथमिकता के आधार पर तैयार कराने चाहिए, ताकि पीड़ित परिवार को समय पर सरकारी सहायता मिल सके।
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तहसीलदार जया राय ने बताया कि प्रशासन पीड़ित परिवार के साथ पूरी संवेदनशीलता के साथ खड़ा है। तहसील स्तर से जो भी आवश्यक कार्रवाई की जानी है, उसे प्राथमिकता के आधार पर कराया जा रहा है। बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी होते ही आगे की प्रक्रिया तेजी से पूरी कराकर परिवार को शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा।
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योगेश के परिवार में अभिभावक के रूप में उनके बुजुर्ग पिता रामप्यारे बचे हैं। बढ़ती उम्र और सीमित सामर्थ्य के कारण उनके लिए तहसील और ब्लॉक के चक्कर लगाना आसान नहीं है। बेटियां सोना, सृष्टि, किरण और अंबिका तथा बेटा कृष्णा सरकारी सहायता की उम्मीद लगाए बैठे हैं लेकिन जन्म प्रमाण पत्र न होने से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। परिवार की मदद के लिए आगे आए सहयोगी श्रीराम आवश्यक कागजात तैयार कराने और संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने में जुटे हैं। इसके बावजूद दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने में देरी से परिवार की चिंता बढ़ती जा रही है।
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परिजनों का कहना है कि कई जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार अधिकारी संवेदना व्यक्त करने घर पहुंचे, आश्वासन भी दिए, लेकिन बच्चों के जरूरी दस्तावेज जल्द बनवाने की दिशा में अब तक कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब किसी परिवार पर ऐसी विपत्ति आती है तो प्रशासन को संवेदनशीलता दिखाते हुए आवश्यक दस्तावेज प्राथमिकता के आधार पर तैयार कराने चाहिए, ताकि पीड़ित परिवार को समय पर सरकारी सहायता मिल सके।
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तहसीलदार जया राय ने बताया कि प्रशासन पीड़ित परिवार के साथ पूरी संवेदनशीलता के साथ खड़ा है। तहसील स्तर से जो भी आवश्यक कार्रवाई की जानी है, उसे प्राथमिकता के आधार पर कराया जा रहा है। बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी होते ही आगे की प्रक्रिया तेजी से पूरी कराकर परिवार को शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा।