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Kushinagar News: बांसी में मगरमच्छों का आतंक, गांव वाले सहमे
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 15 Jun 2026 02:08 AM IST
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धोकरहा घाट पर पानी से बाहर आकर धूप लेता मग़र मच्छ।स्रोत-सोशल मीडिया
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दुदही। बांसी नदी में बैकुंठपुर कोठी घाट से लेकर गौरी जगदीश तक इन दिनों मगरमच्छों की बढ़ती मौजूदगी चर्चा का विषय है। नदी किनारे और आसपास के गांवों के लोगों में दहशत है। शनिवार को धोकरहा घाट के पास शाम करीब सात बजे नदी में जाल लगाते समय मगरमच्छ के हमले से 13 वर्षीय पीयूष की माैत से ग्रामीण सहमे हुए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले पांच वर्षों में मगरमच्छों की संख्या और उनकी सक्रियता बढ़ी है। कई बार लोगों और पशुओं पर हमले की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद वन विभाग की ओर से प्रभावी पहल नहीं किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है। एक दिन पूर्व मगरमच्छ ने पीयूष पर हमला कर दिया, इससे उसकी मौत हो गई। रविवार की शाम को पोस्टमार्टम के बाद शव पहुंचा तो परिजनों में चीख-पुकार मच गई। बांसगांव बीनटोली के टार्जन निषाद, बबलू, प्रमोद, प्रिंस ने बताया कि नदी किनारे रहने वाले मगरमच्छ लोगों को देखते ही उनकी ओर बढ़ने लगते हैं। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती है। उनका कहना है कि क्षेत्र में दिखाई देने वाला सबसे बड़ा मगरमच्छ करीब आठ फीट लंबा है, जबकि इसके अलावा दर्जनों छोटे मगरमच्छ भी नदी में मौजूद हैं।
ग्रामीणों का मानना है कि कुछ वर्ष पहले आई बाढ़ के दौरान मगरमच्छ बहकर इस क्षेत्र में पहुंच गए होंगे। उन्होंने वन विभाग से मगरमच्छों के आतंक से राहत दिलाने तथा लोगों के जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार, कई बार मगरमच्छ नदी से निकलकर धूप सेंकने के लिए खेतों तक पहुंच जाते हैं, जिससे किसानों में भी भय बना रहता है।
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ग्रामीणों का कहना है कि पिछले पांच वर्षों में मगरमच्छों की संख्या और उनकी सक्रियता बढ़ी है। कई बार लोगों और पशुओं पर हमले की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद वन विभाग की ओर से प्रभावी पहल नहीं किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है। एक दिन पूर्व मगरमच्छ ने पीयूष पर हमला कर दिया, इससे उसकी मौत हो गई। रविवार की शाम को पोस्टमार्टम के बाद शव पहुंचा तो परिजनों में चीख-पुकार मच गई। बांसगांव बीनटोली के टार्जन निषाद, बबलू, प्रमोद, प्रिंस ने बताया कि नदी किनारे रहने वाले मगरमच्छ लोगों को देखते ही उनकी ओर बढ़ने लगते हैं। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती है। उनका कहना है कि क्षेत्र में दिखाई देने वाला सबसे बड़ा मगरमच्छ करीब आठ फीट लंबा है, जबकि इसके अलावा दर्जनों छोटे मगरमच्छ भी नदी में मौजूद हैं।
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ग्रामीणों का मानना है कि कुछ वर्ष पहले आई बाढ़ के दौरान मगरमच्छ बहकर इस क्षेत्र में पहुंच गए होंगे। उन्होंने वन विभाग से मगरमच्छों के आतंक से राहत दिलाने तथा लोगों के जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार, कई बार मगरमच्छ नदी से निकलकर धूप सेंकने के लिए खेतों तक पहुंच जाते हैं, जिससे किसानों में भी भय बना रहता है।

धोकरहा घाट पर पानी से बाहर आकर धूप लेता मग़र मच्छ।स्रोत-सोशल मीडिया