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Kushinagar News: 125 निजी अस्पतालों के सूचीबद्ध चिकित्सकों की जांची जाएगी डिग्री

Sun, 09 Aug 2026 01:18 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 09 Aug 2026 01:18 AM IST
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Degrees of empanelled doctors of 125 private hospitals to be checked
बस्ती। भरोसे से खिलवाड़ कर मरीज के उपचार में लापरवाही कर जान जोखिम में डालने वाले अस्पतालों पर सख्ती शुरू हो गई है। निजी अस्पतालों में चिकित्सकों के नाम, पंजीकरण संख्या, डिग्री समेत अन्य सभी जानकारी अब फिर से ली जाएगी।
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यदि इसमें विभाग को गुमराह करके पंजीकरण और नवीनीकरण करा लिए तो संबंधित अस्पताल का लाइसेंस निलंबित होगा और संचालक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा। इसके लिए विभाग ने जांच टीम बना दी है।
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निजी अस्पतालों में मरीजों के भरोसे से खिलवाड़ हो रहा है। इनमें बोर्ड पर सेवाएं देने वाले चिकित्सकों के नाम दर्ज नहीं किए गए हैं। इससे मरीजों का इलाज कौन कर रहा है, इसका पता नहीं चलता। स्वास्थ्य विभाग भी अस्पतालों का निरीक्षण नहीं कर रहा था, जिसका फायदा बिचौलिए उठा रहे थे, अब तीन माह के भीतर हुए नौ से अधिक मौत प्रकरण को विभाग स्वत: संज्ञान लेकर और प्रशासन व शासन की सख्ती के बाद सभी पंजीकृत 125 से अधिक अस्पतालों के साथ पैथाेलॉजी, क्लीनिक, एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड की जांच शुरू होगी।
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इसके लिए कई टीम बनाई गई है जो गोपनीय तरीके से पहुंचकर जांच कर सीधे सीएमओ को रिपोर्ट करेगी। स्वास्थ्य विभाग के यहां करीब 125 निजी अस्पताल, 30 से अधिक क्लीनिक, 67 पैथाेलॉजी और 118 अल्ट्रासाउंड और 50 एक्स-रे सेंटर पंजीकृत हैं।
इसमें अस्पताल, रेडियो डायग्नोस्टिक सेंटर, पैथोलॉजी लैब समेत अन्य हैं। बीते दिनों कई अस्पतालों में मरीज की मौत होने पर हंगामे हुए। स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच करने पहुंची तो मरीज का इलाज किसने किया, इसकी भी पता नहीं कर पाई। मरीज के पर्चाें पर डॉक्टर के हस्ताक्षर और नाम नहीं थे।
इस पर सभी अस्पतालों को बोर्ड पर चिकित्सकों की टीम के नाम, उनकी शैक्षणिक योग्यता, विशेषज्ञता, नेशनल मेडिकल कमीशन में पंजीकरण संख्या समेत अन्य जानकारी दर्ज करनी थी। रिसेप्शन, चिकित्सक के चैंबर और अस्पताल के प्रवेश गेट पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाना था, जिससे सेवाएं देने वाले चिकित्सक को चिह्नित और अस्पताल में मौजूदगी का भी रिकाॅर्ड रहे।

फोटो-वीडियो और एप के जरिये स्वास्थ्य विभाग को भी देनी थी। इसका सभी चिकित्सकीय संस्थानों में अमल में नहीं लाया गया है। इससे मरीजों के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है।
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