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Kushinagar News: डीजे के शोर से नींद हराम...घर के पास से गुजरने पर दहल जाता है दिल
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 23 Feb 2026 02:52 AM IST
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पडरौना शहर के रामकोला रोड पर डीजे बजाकर डांस करते युवा।संवाद
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पडरौना। सहालग के सीजन में डीजे का शोर बढ़ गया है। डीजे की कर्कश आवाज लोगों की नींद हराम कर दे रही है, तो बोर्ड परीक्षार्थियों की तैयारियों में खलल डाल रही है। चिकित्सकों का कहना है कि तेज आवाज में डीजे बजना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे बच्चों, बुजुर्गाें और बीमार लोगों को परेशानी बढ़ रही है। रात में नींद नहीं पूरी हो पाने से सिर में दर्द, बेचैनी की समस्या हो रही है। लेकिन, मस्ती में झूम रहे लोगों पर इसका कोई असर नहीं है। वे तो संचालक पर उच्चतम स्तर पर डीजे बजाने के लिए दबाव डालते हैं।
विषेषज्ञ बताते हैं कि डीजे की आवाज करीब 200 डेसिबल होती है, जबकि 60 डेसिबल से तेज आवाज कान ही नहीं, बल्कि हृदय रोगियों के लिए भी खतरनाक है। शहर में जगह-जगह मैरिज हाल खुले हैं। मांगलिक कार्यक्रम होने पर रात में डीजे बजने पर आसपास के लोगों को मुश्किल होती है। रात में दो बजे के बाद तक डीजे बजने से नींद खराब हो रही है। इससे मैरिज हॉल के आसपास रहने वाले लोगों की रात में नींद पूरी नहीं हो पा रही है, तो वहीं छात्रों को पढ़ाई में समस्या हो रही है। कभी-कभी लोग पुलिस से शिकायत करते हैं। लेकिन पुलिस भी मांगलिक माहौल के चलते सख्ती नहीं बरतती है।
देर रात तक डीजे बजाना अब शौक सा हो गया है। इसकी वजह से आसपास के रहने वालों को कितनी दिक्कत होती है, इससे किसी को मतलब नहीं है। सबसे ज्यादा परेशानी तो उन बुजुर्ग लोगों को होती है, जिन्हें हृदय संबंधी या फिर मानसिक बीमारी है। वे लोग बेचैन हो जाते हैं। शहर में करीब 50 मैरिज हॉल और लॉन हैं, जहां पर मांगलिक कार्यक्रम होते हैं। कुछ जगहों पर अगल-बगल में तीन से चार मैरिज हॉल हैं, जहां लगन के समय एक साथ कार्यक्रम होते हैं। वहां तेज आवाज में देर रात डीजे बजने से लोग परेशान हो जाते हैं।
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60 डेसिबल से अधिक आवाज स्वास्थ्य के लिए हानिकारक
मेडिकल कॉलेज की ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. अमित अग्रहरि ने बताया कि सामान्यतः 60 डेसिबल तक की आवाज ठीक मानी जाती है। इससे ऊपर की आवाज परेशानी का कारण बन सकती है। 30-40 डेसिबल तक की आवाज फुसफुसाहट या शांत कमरे की आवाज के बराबर होती है। इसे सुरक्षित माना जाता है। 60 डेसिबल तक की आवाज सामान्य बातचीत के स्तर के बराबर होती है। इसे भी सुरक्षित माना जाता है, लेकिन इससे ऊपर की आवाज स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं होती है। उन्होंने बताया कि 70 से 80 डेसिबल की आवाजें तेज होती हैं। इस तीव्रता की आवाज लगातार सुनने से व्यक्ति की श्रवण क्षमता को क्षति पहुंचा सकती हैं। 90 डेसिबल से ऊपर की आवाज बहुत तेज होती हैं। यह आवाज सुनने की क्षमता को तुरंत नुकसान पहुंचा सकती है।
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डीजे की तेज आवाज हृदय रोगियों के लिए खतरनाक हो सकती है। तेज आवाज से हृदय गति बढ़ सकती है, जिससे तनाव, चिंता और डर बढ़ सकता है। इससे खून गाढ़ा हो सकता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। -डॉ. संजीव सुमन, प्रभारी चिकित्साधिकारी, पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय, पडरौना।
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डीजे की तेज आवाज से बच्चों पर कई नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। तेज आवाज बच्चों की श्रवण शक्ति काे नुकसान पहुंचा सकती है। नींद में खलल से बच्चों के व्यवहार में भी बदलाव आता है। बच्चों का श्रवण तंत्र बहुत संवेदनशील होता है। तेज आवाज से उनके कानों को नुकसान हो सकता है। इससे आगे चलकर सुनने में समस्याएं आ सकती है। इसके अलावा, तेज आवाज बच्चों में तनाव, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी का कारण बन सकती है। -डॉ. कमलेश वर्मा, बाल रोग विशेषज्ञ।
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सहालग शुरू होते ही कभी परछावन होने, तो कभी बरात आने के चलते रात आठ बजे के बाद सड़क पर डीजे का शोर शुरू हो जाता है। डीजे पर आठ से दस साउंड बॉक्स से गाने बजाय जाते हैं। मेन रोड पर घर होने से डीजे की आवाज घर में गूंजने लगती है। इसके चलते रात करीब 12 बजे तक जागना पड़ता है। -श्रवण गुप्ता, रामकोला रोड।
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सुभाष चौक से करीब 20 मीटर दूरी पर मेन रोड पर घर है। पास में ही दो होटल है, जहां सहालग के दिनों में बुकिंग होती है। वहां शाम रात आठ बजे के बाद से ही डीजे का शोर शुरू हो जाता है। कभी-कभी तो ऐसा लग रहा था कि घर के पास डीजे बज रहा है। रात भर जाग कर सुबह हुआ है। -राजू वर्मा, सुभाष चौक।
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विषेषज्ञ बताते हैं कि डीजे की आवाज करीब 200 डेसिबल होती है, जबकि 60 डेसिबल से तेज आवाज कान ही नहीं, बल्कि हृदय रोगियों के लिए भी खतरनाक है। शहर में जगह-जगह मैरिज हाल खुले हैं। मांगलिक कार्यक्रम होने पर रात में डीजे बजने पर आसपास के लोगों को मुश्किल होती है। रात में दो बजे के बाद तक डीजे बजने से नींद खराब हो रही है। इससे मैरिज हॉल के आसपास रहने वाले लोगों की रात में नींद पूरी नहीं हो पा रही है, तो वहीं छात्रों को पढ़ाई में समस्या हो रही है। कभी-कभी लोग पुलिस से शिकायत करते हैं। लेकिन पुलिस भी मांगलिक माहौल के चलते सख्ती नहीं बरतती है।
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देर रात तक डीजे बजाना अब शौक सा हो गया है। इसकी वजह से आसपास के रहने वालों को कितनी दिक्कत होती है, इससे किसी को मतलब नहीं है। सबसे ज्यादा परेशानी तो उन बुजुर्ग लोगों को होती है, जिन्हें हृदय संबंधी या फिर मानसिक बीमारी है। वे लोग बेचैन हो जाते हैं। शहर में करीब 50 मैरिज हॉल और लॉन हैं, जहां पर मांगलिक कार्यक्रम होते हैं। कुछ जगहों पर अगल-बगल में तीन से चार मैरिज हॉल हैं, जहां लगन के समय एक साथ कार्यक्रम होते हैं। वहां तेज आवाज में देर रात डीजे बजने से लोग परेशान हो जाते हैं।
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60 डेसिबल से अधिक आवाज स्वास्थ्य के लिए हानिकारक
मेडिकल कॉलेज की ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. अमित अग्रहरि ने बताया कि सामान्यतः 60 डेसिबल तक की आवाज ठीक मानी जाती है। इससे ऊपर की आवाज परेशानी का कारण बन सकती है। 30-40 डेसिबल तक की आवाज फुसफुसाहट या शांत कमरे की आवाज के बराबर होती है। इसे सुरक्षित माना जाता है। 60 डेसिबल तक की आवाज सामान्य बातचीत के स्तर के बराबर होती है। इसे भी सुरक्षित माना जाता है, लेकिन इससे ऊपर की आवाज स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं होती है। उन्होंने बताया कि 70 से 80 डेसिबल की आवाजें तेज होती हैं। इस तीव्रता की आवाज लगातार सुनने से व्यक्ति की श्रवण क्षमता को क्षति पहुंचा सकती हैं। 90 डेसिबल से ऊपर की आवाज बहुत तेज होती हैं। यह आवाज सुनने की क्षमता को तुरंत नुकसान पहुंचा सकती है।
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डीजे की तेज आवाज हृदय रोगियों के लिए खतरनाक हो सकती है। तेज आवाज से हृदय गति बढ़ सकती है, जिससे तनाव, चिंता और डर बढ़ सकता है। इससे खून गाढ़ा हो सकता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। -डॉ. संजीव सुमन, प्रभारी चिकित्साधिकारी, पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय, पडरौना।
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डीजे की तेज आवाज से बच्चों पर कई नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। तेज आवाज बच्चों की श्रवण शक्ति काे नुकसान पहुंचा सकती है। नींद में खलल से बच्चों के व्यवहार में भी बदलाव आता है। बच्चों का श्रवण तंत्र बहुत संवेदनशील होता है। तेज आवाज से उनके कानों को नुकसान हो सकता है। इससे आगे चलकर सुनने में समस्याएं आ सकती है। इसके अलावा, तेज आवाज बच्चों में तनाव, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी का कारण बन सकती है। -डॉ. कमलेश वर्मा, बाल रोग विशेषज्ञ।
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सहालग शुरू होते ही कभी परछावन होने, तो कभी बरात आने के चलते रात आठ बजे के बाद सड़क पर डीजे का शोर शुरू हो जाता है। डीजे पर आठ से दस साउंड बॉक्स से गाने बजाय जाते हैं। मेन रोड पर घर होने से डीजे की आवाज घर में गूंजने लगती है। इसके चलते रात करीब 12 बजे तक जागना पड़ता है। -श्रवण गुप्ता, रामकोला रोड।
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सुभाष चौक से करीब 20 मीटर दूरी पर मेन रोड पर घर है। पास में ही दो होटल है, जहां सहालग के दिनों में बुकिंग होती है। वहां शाम रात आठ बजे के बाद से ही डीजे का शोर शुरू हो जाता है। कभी-कभी तो ऐसा लग रहा था कि घर के पास डीजे बज रहा है। रात भर जाग कर सुबह हुआ है। -राजू वर्मा, सुभाष चौक।
