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Kushinagar News: आठ घंटे में 29 सेमी बढ़ी गंडक, चेतावनी बिंदु से 21 सेमी ऊपर
Tue, 14 Jul 2026 01:58 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Tue, 14 Jul 2026 01:58 AM IST
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नरवाजोत में बांध के समीप पहुची गंडक नदी।संवाद
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खड्डा। नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के कारण गंडक नदी चेतावनी बिंदु से 21 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई है। सोमवार को सुबह आठ बजे के बाद नदी के जलस्तर में अचानक तेजी आई। आठ घंटे की भीतर जलस्तर में 29 सेमी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। भैंसहा गेज पर सोमवार को शाम चार बजे नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु 95 मीटर से अधिक 95.21 मीटर दर्ज किया गया। महज आठ घंटे में 29 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। केंद्रीय जल आयोग ने इसमें और बढ़ोतरी की आशंका जताई है।
वाल्मीकिनगर बैराज से छोड़े गए पानी की मात्रा भी दिनभर बढ़ती रही और दोपहर 12 बजे के करीब इसका स्तर 1,06,600 क्यूसेक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। बाद में इसमें कुछ कमी आई लेकिन नदी में पानी का बहाव सामान्य से अधिक बना रहा। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, पिछले दो दिनों में खड्डा क्षेत्र में 88 मिमी बारिश दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बैराज से छोड़ा गया पानी छह-सात घंटे बाद खड्डा क्षेत्र में पहुंचता है। यदि नेपाल में बारिश जारी रहती है, तो जलस्तर में और वृद्धि हो सकती है।
फिलहाल गंडक नदी के तटबंध सुरक्षित हैं। नदी पार के बाढ़ प्रभावित गांवों में पानी नहीं घुसा है। इसके बावजूद तहसील प्रशासन ने एहतियात बरतते हुए लोगों, विशेषकर बच्चों को नदी के किनारे और नदी में जाने से बचने की सलाह दी है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
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इधर, बारिश से छितौनी तटबंध पर बढ़े रेनकट
कई स्थानों पर मरम्मत का काम अधूरा
खड्डा। पिछले दो दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश के बीच छितौनी तटबंध पर कई स्थानों पर रेनकट उभर आए हैं। पहले से मौजूद रेनकट भी और चौड़े हो गए हैं जिससे तटबंध से सटे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते प्रभावी मरम्मत और झाड़ियों की समुचित सफाई नहीं होने से बाढ़ के दौरान जोखिम बढ़ सकता है।
छितौनी तटबंद 14,400 किमी. लंबा है। हर साल इसकी मरम्मत पर बड़ी धनराशि खर्च की जाती है। समय-समय पर मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का कार्य भी कराया जाता है। इसके बावजूद तटबंध दो बार टूट चुका है। विभागीय अभिलेखों के अनुसार इन घटनाओं के पीछे रैट होल और सिपेज प्रमुख कारण रहे थे। जिन स्थानों पर पहले तटबंध टूटा था, वहां इस समय बड़े रेनकट दिखाई दे रहे हैं।
लोगों के मन में डर, बोले-
भैसहा गांव निवासी गोविंद यादव बताते हैं कि बारिश शुरू होते ही तटबंध पर बने रेनकट और चौड़े हो गए हैं। यदि समय रहते इनकी मरम्मत नहीं कराई गई तो लगातार वर्षा की स्थिति में परेशानी बढ़ सकती है। लल्लन चौहान ने कहा कि झाड़ियों की पूरी तरह सफाई कराई जानी चाहिए, ताकि किसी भी संभावित रिसाव या क्षति का समय रहते पता चल सके और तत्काल कार्रवाई की जा सके। लोगों का कहना है कि तटबंध की पटरी पर उगी झाड़ियों और नरकट की सफाई तो कराई गई है लेकिन कई स्थानों पर केवल ऊपरी हिस्सा काटकर औपचारिकता पूरी कर दी गई। नीचे तक झाड़ियां नहीं हटाई गई हैं। यदि बाढ़ के दौरान कहीं सिपेज या रैट होल बनने लगे तो घनी झाड़ियों के कारण समय रहते उसका पता लगाना मुश्किल हो सकता है जिससे बड़ा नुकसान होने की आशंका बनी रहती है।
चिंता न करें, विभाग की निगरानी जारी
छितौनी तटबंध पूरी तरह सुरक्षित है। आवश्यकतानुसार मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का कार्य लगातार कराया जा रहा है। झाड़ियों की सफाई भी समय-समय पर कराई जाती है। लोगों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, विभाग तटबंध की लगातार निगरानी कर रहा है।
-मनोरंजन कुमार, एसडीओ, बाढ़ खंड।
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वाल्मीकिनगर बैराज से छोड़े गए पानी की मात्रा भी दिनभर बढ़ती रही और दोपहर 12 बजे के करीब इसका स्तर 1,06,600 क्यूसेक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। बाद में इसमें कुछ कमी आई लेकिन नदी में पानी का बहाव सामान्य से अधिक बना रहा। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, पिछले दो दिनों में खड्डा क्षेत्र में 88 मिमी बारिश दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बैराज से छोड़ा गया पानी छह-सात घंटे बाद खड्डा क्षेत्र में पहुंचता है। यदि नेपाल में बारिश जारी रहती है, तो जलस्तर में और वृद्धि हो सकती है।
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फिलहाल गंडक नदी के तटबंध सुरक्षित हैं। नदी पार के बाढ़ प्रभावित गांवों में पानी नहीं घुसा है। इसके बावजूद तहसील प्रशासन ने एहतियात बरतते हुए लोगों, विशेषकर बच्चों को नदी के किनारे और नदी में जाने से बचने की सलाह दी है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
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इधर, बारिश से छितौनी तटबंध पर बढ़े रेनकट
कई स्थानों पर मरम्मत का काम अधूरा
खड्डा। पिछले दो दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश के बीच छितौनी तटबंध पर कई स्थानों पर रेनकट उभर आए हैं। पहले से मौजूद रेनकट भी और चौड़े हो गए हैं जिससे तटबंध से सटे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते प्रभावी मरम्मत और झाड़ियों की समुचित सफाई नहीं होने से बाढ़ के दौरान जोखिम बढ़ सकता है।
छितौनी तटबंद 14,400 किमी. लंबा है। हर साल इसकी मरम्मत पर बड़ी धनराशि खर्च की जाती है। समय-समय पर मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का कार्य भी कराया जाता है। इसके बावजूद तटबंध दो बार टूट चुका है। विभागीय अभिलेखों के अनुसार इन घटनाओं के पीछे रैट होल और सिपेज प्रमुख कारण रहे थे। जिन स्थानों पर पहले तटबंध टूटा था, वहां इस समय बड़े रेनकट दिखाई दे रहे हैं।
लोगों के मन में डर, बोले-
भैसहा गांव निवासी गोविंद यादव बताते हैं कि बारिश शुरू होते ही तटबंध पर बने रेनकट और चौड़े हो गए हैं। यदि समय रहते इनकी मरम्मत नहीं कराई गई तो लगातार वर्षा की स्थिति में परेशानी बढ़ सकती है। लल्लन चौहान ने कहा कि झाड़ियों की पूरी तरह सफाई कराई जानी चाहिए, ताकि किसी भी संभावित रिसाव या क्षति का समय रहते पता चल सके और तत्काल कार्रवाई की जा सके। लोगों का कहना है कि तटबंध की पटरी पर उगी झाड़ियों और नरकट की सफाई तो कराई गई है लेकिन कई स्थानों पर केवल ऊपरी हिस्सा काटकर औपचारिकता पूरी कर दी गई। नीचे तक झाड़ियां नहीं हटाई गई हैं। यदि बाढ़ के दौरान कहीं सिपेज या रैट होल बनने लगे तो घनी झाड़ियों के कारण समय रहते उसका पता लगाना मुश्किल हो सकता है जिससे बड़ा नुकसान होने की आशंका बनी रहती है।
चिंता न करें, विभाग की निगरानी जारी
छितौनी तटबंध पूरी तरह सुरक्षित है। आवश्यकतानुसार मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का कार्य लगातार कराया जा रहा है। झाड़ियों की सफाई भी समय-समय पर कराई जाती है। लोगों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, विभाग तटबंध की लगातार निगरानी कर रहा है।
-मनोरंजन कुमार, एसडीओ, बाढ़ खंड।