{"_id":"6a55498c7716bf90680a1aef","slug":"video-of-school-closing-early-goes-viral-kushinagar-news-c-205-1-sgkp1019-163648-2026-07-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kushinagar News: घर का इकलौता चिराग बुझने से भगवानपुर बुजुर्ग गांव में मातम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kushinagar News: घर का इकलौता चिराग बुझने से भगवानपुर बुजुर्ग गांव में मातम
Tue, 14 Jul 2026 01:54 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Tue, 14 Jul 2026 01:54 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाटा/अहिरौली बाजार। भगवानपुर बुजुर्ग में उमेश कुमार के घर का इकलौता चिराग बुझने से परिवार में मातम पसरा हुआ है। जिस घर के आंगन में कुछ दिनों पहले तक मासूम की किलकारियां गूंजती थीं, वहां का हर कोना सिसक रहा है।
अपने लाडले बेटे की मौत से मां रेखा देवी गहरे सदमे में हैं। बदहवास होकर बस अपने बेटे को ही पुकार रही हैं। घर में रखी सौरभ की स्कूल ड्रेस, किताबें और बैग देखकर वह बार-बार बिलख पड़ती हैं। उन्हें ढांढ़स बंधाने में आसपास की महिलाओं की आंखें भी डबडबा जा रही हैं।
इस घटना से परदेस में रहकर परिवार के बेहतर भविष्य का सपना बुन रहे पिता उमेश कुमार पर तो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। बेटे की तबीयत खराब होने की खबर मिलते ही वह सब कुछ छोड़कर दुबई से तुरंत स्वदेश रवाना हो गए थे, लेकिन किस्मत ने उन्हें बेटे से मिलने का मौका नहीं दिया। उन्हें अपने ही हाथों से इकलौते बेटे की चिता को मुखाग्नि देनी पड़ी। इस घटना ने सौरभ की बहन अंशिका को भी पूरी तरह झकझोर दिया है। अंशिका भी उसी स्कूल में पढ़ती है, जहां उसका छोटा भाई पढ़ता था।
विज्ञापन
घटना वाले दिन अंशिका ही घायल अवस्था में भाई सौरभ को संभालकर घर लेकर पहुंची थी। उसकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं और उसके दिल में यह मलाल है कि यदि समय रहते उसके भाई को इलाज मिल जाता, तो शायद उसकी जान बच जाती।
अब भाई के बिना दोबारा स्कूल जाने से वह सिहर उठती है। अंतिम संस्कार के बाद भी परिवार को सांत्वना देने के लिए लोग आ रहे हैं। पूरे गांव में शोक का माहौल है और हर आने-जाने वाले की आंख नम हैं।
ग्रामीणों में इस बात को लेकर आक्रोश है कि यदि स्कूल प्रबंधन की ओर से तत्परता दिखाते हुए मासूम को तुरंत उपचार की व्यवस्था दी गई होती, तो आज एक मां की गोंद सूनी होने से बच जाती और एक बहन से उसका लाडला भाई नहीं छिनता।
विज्ञापन
अपने लाडले बेटे की मौत से मां रेखा देवी गहरे सदमे में हैं। बदहवास होकर बस अपने बेटे को ही पुकार रही हैं। घर में रखी सौरभ की स्कूल ड्रेस, किताबें और बैग देखकर वह बार-बार बिलख पड़ती हैं। उन्हें ढांढ़स बंधाने में आसपास की महिलाओं की आंखें भी डबडबा जा रही हैं।
विज्ञापन
इस घटना से परदेस में रहकर परिवार के बेहतर भविष्य का सपना बुन रहे पिता उमेश कुमार पर तो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। बेटे की तबीयत खराब होने की खबर मिलते ही वह सब कुछ छोड़कर दुबई से तुरंत स्वदेश रवाना हो गए थे, लेकिन किस्मत ने उन्हें बेटे से मिलने का मौका नहीं दिया। उन्हें अपने ही हाथों से इकलौते बेटे की चिता को मुखाग्नि देनी पड़ी। इस घटना ने सौरभ की बहन अंशिका को भी पूरी तरह झकझोर दिया है। अंशिका भी उसी स्कूल में पढ़ती है, जहां उसका छोटा भाई पढ़ता था।
विज्ञापन
घटना वाले दिन अंशिका ही घायल अवस्था में भाई सौरभ को संभालकर घर लेकर पहुंची थी। उसकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं और उसके दिल में यह मलाल है कि यदि समय रहते उसके भाई को इलाज मिल जाता, तो शायद उसकी जान बच जाती।
अब भाई के बिना दोबारा स्कूल जाने से वह सिहर उठती है। अंतिम संस्कार के बाद भी परिवार को सांत्वना देने के लिए लोग आ रहे हैं। पूरे गांव में शोक का माहौल है और हर आने-जाने वाले की आंख नम हैं।
ग्रामीणों में इस बात को लेकर आक्रोश है कि यदि स्कूल प्रबंधन की ओर से तत्परता दिखाते हुए मासूम को तुरंत उपचार की व्यवस्था दी गई होती, तो आज एक मां की गोंद सूनी होने से बच जाती और एक बहन से उसका लाडला भाई नहीं छिनता।