वृद्धावस्था पेंशन में फर्जीवाड़ा: जिंदा बुजुर्ग भटक रहे, ‘मुर्दे’ मालामाल, 2,177 ‘मुर्दों’ ने लिया पेंशन
कल्याण विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 81,080 लाभार्थियों की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं वो चौंकाने वाले हैं। 2,177 लोग मिले जिनका निधन हो चुका है। मृत्यु के बाद भी उनके खाते में तिमाही तीन हजार रुपये भेजे जा रहे थे। इसी तरह 195 लोग सत्यापन टीम को दर्ज पते पर नहीं मिले। फिर भी इनके खाते में पेंशन की धनराशि जा रही थी। वहीं 109 ऐसे लोग पेंशन उठाते रहे जो मानकों पर खरे नहीं उतरते थे।
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जिले में वृद्धावस्था पेंशन योजना में धांधली का मामला सामने आया है। 2,177 ऐसे लाभार्थी मिले हैं जिनका निधन हो चुका है, लेकिन उनके बैंक खातों में हर महीने एक हजार रुपये की पेंशन भेजी जा रही थी। मरने के बाद भी ‘जिंदा’ दिखाकर सरकारी खजाने पर डाका डाला जा रहा था। भौतिक सत्यापन के शुरुआती चरण में ही यह हकीकत सामने आई है।
जिले में वर्तमान में वृद्धावस्था पेंशन पाने वालों की कुल संख्या 1,51,650 है। इनमें से अब तक 81,080 लाभार्थियों यानी 53.47 प्रतिशत का सत्यापन पूरा हुआ है। इसी सत्यापन में सिस्टम की पोल खुल गई। जिला समाज कल्याण विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 81,080 लाभार्थियों की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं वो चौंकाने वाले हैं।
2,177 लोग मिले जिनका निधन हो चुका है। मृत्यु के बाद भी उनके खाते में तिमाही तीन हजार रुपये भेजे जा रहे थे। इसी तरह 195 लोग सत्यापन टीम को दर्ज पते पर नहीं मिले। फिर भी इनके खाते में पेंशन की धनराशि जा रही थी। वहीं 109 ऐसे लोग पेंशन उठाते रहे जो मानकों पर खरे नहीं उतरते थे।
विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, अभी 70,570 लाभार्थियों का सत्यापन बाकी है। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि फर्जीवाड़े का यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। सत्यापन का काम 15 जून तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि जहां एक तरफ मृतकों के खाते में पेंशन जा रही है, वहीं दूसरी तरफ असली जरूरतमंद बुजुर्ग पेंशन के लिए दफ्तर-दफ्तर धक्के खा रहे हैं। तहसील से लेकर विकास भवन और जिला समाज कल्याण कार्यालय तक वृद्धों की लाइन लगी दिखी। इनका कहना है कि उनकी सुनवाई नहीं हो रही।
जिला समाज कल्याण विभाग के कार्यालय के बाहर मिलीं नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के दुबरहा गांव की 65 वर्षीय कमला देवी ने बताया कि वे पिछले छह माह से वृद्धावस्था पेंशन के लिए ब्लॉक से लेकर जिला स्तर तक चक्कर काट रही हैं। अधिकारियों के सामने गुहार लगाई, आवेदन दिए, लेकिन पेंशन शुरू नहीं हो सकी।
इसी तरह नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के कौआसार गांव के राजदेव ने बताया कि उन्होंने कई बार पेंशन के लिए आवेदन किया लेकिन अब तक उन्हें योजना का लाभ नहीं मिला। आर्थिक तंगी के बावजूद वे सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
सूत्रों के अनुसार, सरकारी पेंशन के मामलों में लाभार्थी चयन से लेकर भुगतान तक दलालों का एक पूरा नेटवर्क सक्रिय रहता है। ये लोग कागजों में हेराफेरी कराकर अपात्रों को पात्र दिखाने में कामयाब हो जाते हैं। हर तिमाही आने वाली पेंशन की पहली किस्त दलाल ही ले लेते हैं।
हालांकि मृतकों के खातों में पेंशन भेजने के इस खुलासे में अभी तक किसी मध्यस्थ का नाम सामने नहीं आया है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस खेल के पीछे दलालों के नेटवर्क की आशंका से इन्कार नहीं कर रहे हैं।
एसएमएस के जरिए दी जाएगी जानकारी
समाज कल्याण विभाग का कहना है कि सत्यापन पूरा होने के बाद पात्र लाभार्थियों को पेंशन भुगतान की स्थिति की जानकारी एसएमएस के जरिए दी जाएगी। जिन लाभार्थियों की फैमिली आईडी ‘एक परिवार-एक पहचान’ योजना के तहत नहीं बनी है, उनकी फैमिली आईडी भी इसी दौरान तैयार कराई जाएगी।
शासन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सभी पेंशनरों की पात्रता की गहन जांच अनिवार्य रूप से करने के निर्देश दिए हैं। यह भी साफ किया है कि यदि सत्यापन के दौरान किसी जीवित और पात्र लाभार्थी की पेंशन रुकती है, तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, फर्जी लाभार्थियों की पहचान करके सरकारी धन के दुरुपयोग पर सख्ती से रोक लगाने की हिदायत दी गई है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सत्यापन के लिए अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बीडीओ और शहरी क्षेत्रों में एसडीएम तथा अधिशासी अधिकारियों की देखरेख में टीमें घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन कर रही हैं। जिला समाज कल्याण विभाग के पोर्टल के अनुसार जिले में 1,51,650 लाभार्थी पंजीकृत हैं।
कसया ब्लॉक के मैनपुर टोला दीनापट्टी निवासी बिंदू राय का निधन करीब चार माह पहले ही हो चुका है। इसके बावजूद उनके खाते में वृद्धावस्था पेंशन की धनराशि जा रही थी। इस बात की जानकारी विभाग को सत्यापन के दौरान हुई।
केस दो:
कप्तानगंज क्षेत्र के लखिमा की मालती देवी की मौत करीब छह माह पहले हो चुकी है। उनकी मौत की सूचना विभाग को न तो परिजनों ने दी और न ही गांव के सचिव ने। इस वजह से निधन के बाद भी उनके खाते में पेंशन की धनराशि जाती रही। सत्यापन के दौरान यह खुलासा हुआ।