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UP: फिर चर्चा में मरचहवा नरसंहार, 14 हत्याओं का वह खूनी दिन, लाइन में खड़ाकर बरसाई थीं अंधाधुंध गोलियां

Fri, 14 Aug 2026 05:33 PM IST
Akash Dubey संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Published by: Akash Dubey Updated Fri, 14 Aug 2026 05:33 PM IST
सार

पूर्व दस्यु सरगना वासुदेव यादव के पुत्र का शव मिला। इससे 1989 का मरचहवा कांड फिर चर्चा में है। वासुदेव कई खूनी वारदात में शामिल था, उसे उम्रकैद हुई थी।

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Marchahwa massacre back in the spotlight
मरचहवा नरसंहार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पूर्व दस्यु सरगना वासुदेव यादव के पुत्र का शव मिलने के बाद मरचहवा कांड फिर चर्चा में है। 31 मार्च 1989 को पंचायत के बहाने ग्रामीणों को एक जगह बुलाया गया और कतार में खड़ा कर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। इस खूनी वारदात में 14 ग्रामीणों की मौत हो गई थी।

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मरचहवा नरसंहार उस दौर में सीमावर्ती यूपी-बिहार के दियारा क्षेत्र में सक्रिय दस्यु गिरोहों के आतंक की भयावह तस्वीर था। घटना की जांच में बिहार के कुख्यात दस्यु वासुदेव यादव उर्फ तिवारी का नाम मुख्य आरोपी के तौर पर सामने आया था। वासुदेव को बाद में उम्रकैद की सजा हुई थी और 2025 में पटना हाईकोर्ट ने बीमारी के आधार पर उसे जमानत दी थी। 

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पचरुखिया कांड में दो थानेदार और चार सिपाही हुए थे शहीद इसके अलावा वर्ष 1994 में 29 अगस्त की रात जंगल सदस्यु बेचू मास्टर और रामप्यारे कुशवाहा उर्फ सिपाही कुबरेस्थान थाना क्षेत्र के पचरुखिया गांव के तत्कालीन प्रधान राधाकृष्ण गुप्त के घर डकैती की सूचना पुलिस को मिली। तत्कालीन एसपी बुद्ध चंद के निर्देश पर पुलिस टीम पचरुखिया पहुंची। नाविक भुखल को बुलाकर पुलिस टीम बांसी नदी उस पार पहुंची लेकिन जंगल दस्यु से सामना नहीं हुआ। एक टीम सीओ के नेतृत्व में नदी इस पार नाव से लौट आई थी, दूसरी टीम उसी डेंगी से लौट रही थी।

डाकुओं ने बांसी नदी के बीच में पहुंची दूसरी पुलिस टीम पर गोलियां बरसाने लगे। नाविक भुखल और सिपाही विश्वनाथ यादव को गोली लग गई और डेंगी पलट गई। इस डेंगी पर सवार पुलिसकर्मी नदी में गिर गए थे। डाकुओं ने पुलिस टीम पर करीब 40 राउंड फायरिंग की थी।

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एसओ तरयासुजान अनिल पांडेय, एसओ कुबेरस्थान एसओ राजेंद्र यादव, सिपाही सिपाही नागेंद्र पांडेय, खेदन सिंह, विश्वनाथ यादव, परशुराम गुप्त शहीद हो गए, जबकि दरोगा अंगद राय, सिपाही लालजी यादव, श्यामाशंकर राय व अनिल सिंह सुरक्षित बच निकले थे। डाकुओं के हमले में नाविक भुखल भी मारा गया था। घटना के बाद डीजीपी मौके पर पहुंचे और मुठभेड़ की जानकारी ली थी। इस घटना में भी जंगल पार्टी का दस्यु सरगना वासुदेव यादव का नाम सामने आया था।

1995 में भी खूनी वारदात, वासुदेव को हुई थी उम्रकैद
वासुदेव यादव उर्फ तिवारी से जुड़ी एक और बड़ी घटना 3 जून 1995 की है। बिहार के पश्चिमी चंपारण के चौतरवा थाना क्षेत्र के बगहवा रेता में दस्यु गिरोह ने दूसरे दस्यु सरगना राधा यादव के पिता इंद्रदेव यादव की हत्या कर दी थी। इस मामले में वासुदेव को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। बगहा एडीजे प्रथम की अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी। जेल में ही उसे लकवा मार गया था, जिसके आधार पर पटना हाईकोर्ट ने जमानत मंजूर की।

दस्यु गिरोह का नाम आते दहशत में आ जाता था इलाका
मरचहवा कांड के बाद गंडक के दियारा और जंगल क्षेत्र पुलिस-प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती थे। सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय दस्यु गिरोहों की वजह से ग्रामीणों में दहशत का माहौल था। इसी दौर में वासुदेव यादव उर्फ तिवारी का नाम भी कुख्यात दस्यु के तौर पर सामने आया था। जांच में साधु के वेश में घूमने वाले गिरोह के सरगना की पहचान वासुदेव यादव के रूप में होने की बात सामने आई थी। उसके खिलाफ कई गंभीर मुकदमे दर्ज हुए।

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