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Kushinagar News: 68 किमी सीमा पर तस्करी का नया खेल, पहले डंप फिर मौका देखकर पार

Thu, 13 Aug 2026 10:49 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Thu, 13 Aug 2026 10:49 PM IST
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New smuggling game on the 68 km border, first dump and then cross after seeing the opportunity
- ककरहवा से लोटन तक पांच बड़े पॉइंट, माल के हिसाब से बदला तस्करी का नेटवर्क
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- तुरंत सीमा पार कराने के बजाय सुरक्षित ठिकानों पर माल डंप करने का बढ़ा चलन
- छोटी-छोटी खेप में होती है आवाजाही
- खाद, पेट्रोल-डीजल, कॉस्मेटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर नशीले पदार्थ तक के लिए अलग-अलग कैरियर और रास्ते
- एसएसबी की सख्ती बढ़ने पर तस्करों ने बदला तरीका, सीमा चौकियों से बचने के लिए अनधिकृत रास्तों का इस्तेमाल
सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल की करीब 68 किलोमीटर लंबी खुली सीमा पर तस्करी का तरीका लगातार बदल रहा है। सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी और कार्रवाई बढ़ने के बाद अब तस्करों ने तत्काल माल को सीमा पार कराने के बजाय ‘डंप-फिर-पार’ मॉडल अपना लिया है। सीमा के आसपास सुरक्षित ठिकानों पर पहले माल जमा किया जाता है और निगरानी कमजोर पड़ने या मौका मिलने पर छोटी-छोटी खेपों में इसे नेपाल या भारत की ओर भेजा जाता है। इससे एक साथ बड़ी मात्रा में माल पकड़े जाने का खतरा कम हो जाता है।
जिले में ककरहवा, खुनुवा, अलीगढ़वा, बढ़नी और लोटन ऐसे प्रमुख सीमा बिंदु हैं जहां तस्करी का पैटर्न माल और स्थानीय भौगोलिक स्थिति के हिसाब से अलग-अलग दिखाई देता है। सीमा क्षेत्र में रोजाना होने वाली आवाजाही और कई स्थानों पर पगडंडियों व अनधिकृत रास्तों की मौजूदगी तस्करों के लिए चुनौती के साथ मौका भी बनती है।
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जानकार बताते हैं कि सीमा पार होने वाले सामान की प्रकृति के अनुसार तस्करी का नेटवर्क भी अलग है। खाद, पेट्रोल-डीजल, कॉस्मेटिक्स और दैनिक उपयोग की वस्तुओं को छोटे वाहनों, बाइक या पैदल कैरियर के जरिये सीमा पार कराने की कोशिश होती है। इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे अपेक्षाकृत महंगे सामान के लिए अलग नेटवर्क सक्रिय रहता है। नशीले पदार्थों की तस्करी में भी कैरियर और संपर्कों की अलग शृंखला इस्तेमाल किए जाने की आशंका रहती है।
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एक खेप नहीं, कई ठिकानों से धीरे-धीरे होती है सप्लाई
तस्करी के इस बदले मॉडल में सबसे पहले सीमा के आसपास के गांवों या सुरक्षित स्थानों पर सामान पहुंचाया जाता है। इसके बाद उसे जरूरत के मुताबिक छोटी खेप में आगे भेजा जाता है। इससे सुरक्षा एजेंसियों की नजर में आने की संभावना कम होती है। कई मामलों में बाइक और पैदल कैरियर का इस्तेमाल किए जाने से तस्करों की पहचान और मुख्य नेटवर्क तक पहुंचना चुनौती बन जाती है।
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कार्रवाई बढ़ी तो बदले रास्ते
सीमा पर एसएसबी और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की लगातार कार्रवाई के बाद तस्करों ने मुख्य मार्गों से दूरी बनाकर अनधिकृत रास्तों का इस्तेमाल बढ़ाया है। हाल के मामलों में नेपाल से भारत आने वाले लोगों के पास नकदी, रसायन और अन्य सामान बरामद होने से भी सीमा पार सक्रिय नेटवर्क की तस्वीर सामने आती रही है। सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब केवल सामान पकड़ने की चुनौती नहीं बल्कि डंपिंग पॉइंट, कैरियर और मुख्य संचालकों की कड़ी जोड़ने की चुनौती भी है।

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पांच पॉइंट, पांच अलग पैटर्न
- ककरहवा : पैदल और छोटे वाहनों से आवाजाही पर नजर।
- खुनुवा : रोजमर्रा के सामान और छोटी खेपों की आवाजाही।
- अलीगढ़वा : अनधिकृत रास्तों की चुनौती।
- बढ़नी : आवागमन अधिक होने से निगरानी जरूरी।
- लोटन : सीमा से जुड़े ग्रामीण रास्तों का इस्तेमाल तस्करी में चुनौती।

भारत-नेपाल सीमा पर तस्करी रोकने के लिए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां लगातार समन्वय के साथ कार्रवाई कर रही हैं। तस्करी के तरीके में बदलाव को देखते हुए सीमा से जुड़े रास्तों, संदिग्ध गतिविधियों और कैरियर पर विशेष नजर रखी जा रही है। किसी भी तरह की तस्करी में संलिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. अभिषेक महाजन, एसपी
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