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Kushinagar News: नवरात्र के चौथे दिन भक्तों ने की मां कूष्मांडा की पूजा
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 23 Mar 2026 01:25 AM IST
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सेवरही मे चैत्र नवरात्र मे पूजा करते श्रद्धालु। संवाद
- फोटो : Samvad
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पडरौना। नवरात्र के चौथे दिन रविवार को शहर समेत जिले के सभी देवी मंदिरों में मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की गई। मां कूष्मांडा को सृष्टि की रचयिता (आदिशक्ति) माना जाता है। उनकी 8 भुजाएं होने के कारण उन्हें ''अष्टभुजा देवी'' भी कहते हैं। भक्तों ने पीले वस्त्र धारण कर माता को मालपुआ और पीले फूल अर्पित किए और सुख-समृद्धि की कामना की।
शहर के बुढि़या माई मंदिर, साहगंज स्थित दुर्गा मंदिर, लखराव दुर्गा मंदिर, खरवार स्थित दुर्गा मंदिर, कसया क्षेत्र के मैनपुर दुर्गा मंदिर और कुलकुल देवी मंदिर में शनिवार को सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। वहां भक्तों ने कपूर, अगरबत्ती, धूप जलाए और नारियल तोड़कर पूजन किया। घरों में स्थापित कलश का पूजन कर मालपुआ का भोग लगाया गया और पीले फूल अर्पित कर परिवार की उन्नति की कामना की गई।
पंडित हरिओम मिश्र ने बताया कि मान्यता है कि मां कुष्मांडा की पूजा से रोग, कष्ट और शोक दूर होते हैं। इस दिन सुबह स्नान कर मां कूष्मांडा को पीले फूल, गेंदा, और कुमड़ा (कद्दू) का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। उन्होंने बताया कि मां कूष्मांडा को ऊर्जा और स्वास्थ्य की देवी माना जाता है। उनके आशीर्वाद से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आलस्य-भय दूर होते हैं। मां कूष्मांडा का संबंध सूर्य ग्रह से है, इसलिए उनकी पूजा से कुंडली में सूर्य दोष का निवारण होता है।
तमकुहीरोड संवाद के अनुसार, चैत्र नवरात्र के चौथे दिन रविवार को सेवरही क्षेत्र के दुर्गा मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। श्रद्धालुओं ने माता के जयघोष के साथ देवी के चौथे स्वरूप की पूजा अर्चना की। शहर के राम जानकी मंदिर पुरानी पुलिस चौकी चौराहा, मिलिया माता दुर्गा मंदिर मालवीय नगर, सिंह भवानी दुर्गा मंंदिर गांधी नगर, जलपा माता मंदिर कतौरा, छतुवनिया माता मंदिर अवदान टोला, बेलवा माता मंदिर आजाद नगर, काली माता मंदिर अंबेडकर नगर में पूजा-अर्चना की गई। गुलरिया माता मंदिर महाबीर नगर, बसई देवी भवानी मंदिर जगदीशपुर, सोना भवानी मंदिर ठकरहा, अष्ठभुजी भवानी मंदिर ब्रह्मपुर, पिंडी माता मंदिर जानकी नगर, बैराट माता मंदिर राजपुर बगहा में भी भक्तों की भीड़ रही। डीह भवानी मंदिर दवनहा के साथ रकबा दुलमा पट्टी, बभनौली, पिरोजहा, पिपराघाट, जंगली पट्टी, जवही दयाल, विरवट कोन्हवलिया, अहिरौलीदान सहित सभी देवी मंदिरों में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। भक्तों ने विधि विधान से पूजा अर्चना की और दुर्गा चालीसा व दुर्गा सप्तशती का पाठ किया।
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शहर के बुढि़या माई मंदिर, साहगंज स्थित दुर्गा मंदिर, लखराव दुर्गा मंदिर, खरवार स्थित दुर्गा मंदिर, कसया क्षेत्र के मैनपुर दुर्गा मंदिर और कुलकुल देवी मंदिर में शनिवार को सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। वहां भक्तों ने कपूर, अगरबत्ती, धूप जलाए और नारियल तोड़कर पूजन किया। घरों में स्थापित कलश का पूजन कर मालपुआ का भोग लगाया गया और पीले फूल अर्पित कर परिवार की उन्नति की कामना की गई।
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पंडित हरिओम मिश्र ने बताया कि मान्यता है कि मां कुष्मांडा की पूजा से रोग, कष्ट और शोक दूर होते हैं। इस दिन सुबह स्नान कर मां कूष्मांडा को पीले फूल, गेंदा, और कुमड़ा (कद्दू) का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। उन्होंने बताया कि मां कूष्मांडा को ऊर्जा और स्वास्थ्य की देवी माना जाता है। उनके आशीर्वाद से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आलस्य-भय दूर होते हैं। मां कूष्मांडा का संबंध सूर्य ग्रह से है, इसलिए उनकी पूजा से कुंडली में सूर्य दोष का निवारण होता है।
तमकुहीरोड संवाद के अनुसार, चैत्र नवरात्र के चौथे दिन रविवार को सेवरही क्षेत्र के दुर्गा मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। श्रद्धालुओं ने माता के जयघोष के साथ देवी के चौथे स्वरूप की पूजा अर्चना की। शहर के राम जानकी मंदिर पुरानी पुलिस चौकी चौराहा, मिलिया माता दुर्गा मंदिर मालवीय नगर, सिंह भवानी दुर्गा मंंदिर गांधी नगर, जलपा माता मंदिर कतौरा, छतुवनिया माता मंदिर अवदान टोला, बेलवा माता मंदिर आजाद नगर, काली माता मंदिर अंबेडकर नगर में पूजा-अर्चना की गई। गुलरिया माता मंदिर महाबीर नगर, बसई देवी भवानी मंदिर जगदीशपुर, सोना भवानी मंदिर ठकरहा, अष्ठभुजी भवानी मंदिर ब्रह्मपुर, पिंडी माता मंदिर जानकी नगर, बैराट माता मंदिर राजपुर बगहा में भी भक्तों की भीड़ रही। डीह भवानी मंदिर दवनहा के साथ रकबा दुलमा पट्टी, बभनौली, पिरोजहा, पिपराघाट, जंगली पट्टी, जवही दयाल, विरवट कोन्हवलिया, अहिरौलीदान सहित सभी देवी मंदिरों में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। भक्तों ने विधि विधान से पूजा अर्चना की और दुर्गा चालीसा व दुर्गा सप्तशती का पाठ किया।