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Lakhimpur Kheri News: डेढ़ करोड़ की कटानरोधी परियोजना का 30 मीटर हिस्सा घाघरा में समाया
Wed, 22 Jul 2026 12:06 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 22 Jul 2026 12:06 AM IST
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धौरहरा क्षेत्र ं भदईपुरवा परियोजना का कटान करती घाघरा नदी। संवाद
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धौरहरा। भदईपुरवा गांव के पास करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से चार वर्ष पूर्व बनी कटानरोधी परियोजना का लगभग 30 मीटर हिस्सा घाघरा नदी में समा गया। इससे भदईपुरवा गांव और आसपास की कृषि भूमि पर कटान का खतरा बढ़ गया है।
तेज बहाव के कारण बचाव कार्य में दिक्कत आ रही है। अब वायर क्रेट (लोहे के जाल) में ईंट के रोड़े भरकर नदी किनारे डालकर कटान रोकने का प्रयास किया जाएगा।ग्रामीणों के अनुसार, सरैया से मिर्जापुर गांव तक घाघरा नदी के कटान से सुरक्षा के लिए चार वर्ष पूर्व परियोजना का निर्माण कराया गया था, लेकिन नदी के लगातार तेज होते बहाव से इसका एक हिस्सा कटकर नदी में बह गया।
ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते प्रभावी बचाव कार्य नहीं हुआ तो कटान आबादी तक पहुंच सकता है। भदईपुरवा के लोगों ने प्रशासन से तत्काल अतिरिक्त कटानरोधी उपाय कराने की मांग की है। उनका कहना है कि हर वर्ष घाघरा का कटान बढ़ रहा है और अब सुरक्षा के लिए बनाई गई परियोजना का क्षतिग्रस्त होना चिंता का विषय है।
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वहीं, जालिमनगर पुल के पास ऐतिहासिक शिव मंदिर की ओर भी नदी तेजी से कटान करती बढ़ रही है। यहां अब तक कोई बचाव कार्य शुरू नहीं हो सका है।
अधिशासी अभियंता अजय कुमार ने बताया कि बहाव अधिक होने से बचाव कार्य में दिक्कत आ रही है। चार साल पुरानी भदईपुरवा परियोजना पर जूनियर इंजीनियर रविंद्र कुमार की देखरेख में बचाव कार्य शुरू कराया जा रहा है। इसके लिए ईंट के रोड़े मंगाए गए हैं, जिन्हें वायर क्रेट (लोहे के जाल) में भरकर नदी किनारे डाला जाएगा। इससे नदी के बहाव को नियंत्रित करने और आगे के कटान को रोकने का प्रयास किया जाएगा।
तहसीलदार आदित्य विशाल ने बताया कि परियोजना का करीब 30 मीटर हिस्सा नदी में कट चुका है। बाढ़ खंड की टीम बचाव कार्य के लिए पहुंच गई है। जल्द कार्य शुरू होगा।
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तेज बहाव के कारण बचाव कार्य में दिक्कत आ रही है। अब वायर क्रेट (लोहे के जाल) में ईंट के रोड़े भरकर नदी किनारे डालकर कटान रोकने का प्रयास किया जाएगा।ग्रामीणों के अनुसार, सरैया से मिर्जापुर गांव तक घाघरा नदी के कटान से सुरक्षा के लिए चार वर्ष पूर्व परियोजना का निर्माण कराया गया था, लेकिन नदी के लगातार तेज होते बहाव से इसका एक हिस्सा कटकर नदी में बह गया।
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ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते प्रभावी बचाव कार्य नहीं हुआ तो कटान आबादी तक पहुंच सकता है। भदईपुरवा के लोगों ने प्रशासन से तत्काल अतिरिक्त कटानरोधी उपाय कराने की मांग की है। उनका कहना है कि हर वर्ष घाघरा का कटान बढ़ रहा है और अब सुरक्षा के लिए बनाई गई परियोजना का क्षतिग्रस्त होना चिंता का विषय है।
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वहीं, जालिमनगर पुल के पास ऐतिहासिक शिव मंदिर की ओर भी नदी तेजी से कटान करती बढ़ रही है। यहां अब तक कोई बचाव कार्य शुरू नहीं हो सका है।
अधिशासी अभियंता अजय कुमार ने बताया कि बहाव अधिक होने से बचाव कार्य में दिक्कत आ रही है। चार साल पुरानी भदईपुरवा परियोजना पर जूनियर इंजीनियर रविंद्र कुमार की देखरेख में बचाव कार्य शुरू कराया जा रहा है। इसके लिए ईंट के रोड़े मंगाए गए हैं, जिन्हें वायर क्रेट (लोहे के जाल) में भरकर नदी किनारे डाला जाएगा। इससे नदी के बहाव को नियंत्रित करने और आगे के कटान को रोकने का प्रयास किया जाएगा।
तहसीलदार आदित्य विशाल ने बताया कि परियोजना का करीब 30 मीटर हिस्सा नदी में कट चुका है। बाढ़ खंड की टीम बचाव कार्य के लिए पहुंच गई है। जल्द कार्य शुरू होगा।