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Lakhimpur Kheri News: आस्था और सुरक्षा के बीच उलझा सवाल

Thu, 30 Jul 2026 11:17 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Thu, 30 Jul 2026 11:17 PM IST
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A question caught between faith and security
जालिमनगर घाट पर कटान करती घाघरा नदी। संवाद
धौरहरा। जालिमनगर पुल स्थित सरयू (घाघरा) घाट पर सावन में स्नान और कांवड़ जल भरने पर प्रशासन की रोक को लेकर क्षेत्र में आस्था और सुरक्षा के बीच बहस तेज हो गई है। एक ओर प्रशासन बढ़ते भू-कटान और संभावित दुर्घटनाओं का हवाला देकर प्रतिबंध को आवश्यक बता रहा है। वहीं, श्रद्धालु और स्थानीय लोग इसे सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा से जुड़ा विषय मानते हुए नदी से ही जल भरने की अनुमति देने की मांग कर रहे हैं।
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जालिमनगर सरयू घाट धौरहरा क्षेत्र का प्रमुख आस्था केंद्र है। सावन मास के दौरान दूर-दराज से हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचकर स्नान करते हैं और घाघरा नदी का पवित्र जल लेकर गोला गोकर्णनाथ (छोटी काशी) सहित कफारा के श्री लीलानाथ मंदिर, लिलौटीनाथ मंदिर, मथना, देवकली और जंगलीनाथ समेत विभिन्न शिवालयों में जलाभिषेक के लिए रवाना होते हैं। कई कांवड़िये करीब 150 किलोमीटर की पदयात्रा कर अपनी धार्मिक यात्रा पूरी करते हैं।
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जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने 27 जुलाई को नदी में बढ़ते जलस्तर और तेज भू-कटान को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुरक्षा के मद्देनजर घाट पर स्नान और जल भरने पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद एसडीएम राशि कृष्णा के निर्देशन में घाटों पर टीन की बैरिकेडिंग कर चेतावनी बोर्ड लगाए गए तथा पुलिस बल तैनात कर दिया गया। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन ने वैकल्पिक कुंड भी तैयार कराया है।
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हालांकि किसान नेता पवन पाठक, कुछ संतों और स्थानीय लोगों ने इस व्यवस्था का विरोध किया है। उनका कहना है कि वैकल्पिक कुंड में स्नान और जल भरना धार्मिक परंपरा का विकल्प नहीं हो सकता।
श्रद्धालुओं का कहना है कि नदी स्नान का अपना पौराणिक और धार्मिक महत्व है, इसलिए सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम कर सीमित और सुरक्षित स्थान से स्नान एवं जल भरने की अनुमति दी जानी चाहिए।
विधायक को भी सुननी पड़ी नाराजगी
-विरोध के दौरान धौरहरा विधायक विनोद शंकर अवस्थी ने प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों और किसान नेता से वार्ता कर सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें समझाने का प्रयास किया। इस दौरान लोगों ने अपनी नाराजगी भी जताई। विधायक ने भरोसा दिलाया कि जहां नदी की स्थिति अपेक्षाकृत सुरक्षित होगी, वहां प्रशासन से बैरिकेडिंग और अन्य सुरक्षा प्रबंध कराकर स्नान एवं जल भरने की अनुमति दिलाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि जालिमनगर में स्थायी पक्का घाट बनवाने के लिए मुख्यमंत्री को पुनः पत्र भेजा गया है।
सुरक्षा को लेकर प्रशासन भी सतर्क
-एसडीएम राशि कृष्णा का कहना है कि पिछले वर्षों में डूबने की घटनाओं और इस वर्ष तेज भू-कटान के कारण नदी का स्वरूप काफी खतरनाक हो गया है। कई अस्थायी घाट नदी में समा चुके हैं और गहराई भी बढ़ गई है। ऐसे में किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए एहतियाती कदम उठाए गए हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
टोंटियां लगा स्नान कराएगा प्रशासन
- सूचना पर एडीएम नरेंद्र बहादुर और अपर पुलिस अधीक्षक पवन गौतम मौके पर पहुंचे और लोगों से वार्ता करने के बाद तहसीलदार आदित्य विशाल और एसडीएम राशि कृष्णा ईओ नगर पंचायत धौरहरा गौरव सिंह कोनिर्देश दिया कि महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग स्नान गृह बनाएं, नदी का जल पाइप लाइन बिछा कर टोंटियों से कांवड़ियों को उपलब्ध कराएं। प्रशासन ने टोंटियां लगाने का काम शुरू कर दिया है।

वर्जन-
नदी की गहराई और घाटों के कटान होने से दुर्घटनाओं की संभावना है, इसलिए पवित्र नदी का जल पाइप लाइन के जरिये स्नान और कांवड़ के लिए टोटियों से उपलब्ध कराने के लिए काम शुरू कराया गया है। नदी में एहतियातन स्नान करने की मनाही है।
नरेंद्र बहादुर एडीएम लखीमपुर
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