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Lakhimpur Kheri News: सीएलएफ के खजाने में सेंध का हिसाब तैयार
Sat, 08 Aug 2026 11:16 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 08 Aug 2026 11:16 PM IST
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लखीमपुर खीरी। निघासन ब्लॉक के बेलरायां स्थित आदर्श प्रेरणा संकुल स्तरीय संघ (सीएलएफ) में रकम के लेनदेन और ऋण वितरण में गड़बड़ी के आरोपों की जांच पूरी हो गई है। जांच कमेटी सोमवार को रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपेगी। जिला विकास अधिकारी गजेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, जांच में गड़बड़ी सामने आई है। अब मामले में आगे की कार्रवाई जिलाधिकारी स्तर से होगी।
ग्राम संगठन की अमिरता देवी, साबना, रामदेवी, शांति देवी, संगीता, सुधा देवी, सुमन, पूनम, सीता आदि महिलाओं ने मुख्यमंत्री और डीएम से सीएलएफ पदाधिकारियों पर गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि चुनिंदा ग्राम संगठनों को लाखों रुपये का ऋण दिया गया, जबकि कई समूहों के साथ भेदभाव किया गया।
शिकायत के अनुसार, ग्राम संगठन खुशी को 35 लाख, करुणा को 14.42 लाख, गायत्री को 15 लाख और साधना को 23.03 लाख रुपये समेत करीब 22 संगठनों को लाखों रुपये का भुगतान किया गया। इसके अलावा रुकसार के खाते में 90 लाख, लक्ष्मी के खाते में 14 लाख और मनोरमा के खाते में नौ लाख रुपये भेजे जाने का आरोप है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कुछ ऐसे ग्राम संगठनों को भी पैसा दिया गया, जो संबंधित सीएलएफ से जुड़े नहीं हैं। रोजगार के नाम पर दिए गए ऋण का अधिकांश हिस्सा निजी खर्च में लगाने का भी आरोप लगाया गया।
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शिकायत में उपायुक्त स्वत: रोजगार जितेंद्र कुमार मिश्रा पर भी गड़बड़ी करने वालों को बचाने का आरोप लगाया गया था। डीएम अंजनी कुमार सिंह ने उपायुक्त को बुलाकर मामले की जानकारी ली थी। इसके बाद जिला विकास अधिकारी गजेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की गई।
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आरोपों के बाद बदले गए पदाधिकारी
आदर्श प्रेरणा सीएलएफ बेलरायां के जिन पदाधिकारियों पर आरोप लगे थे, उन्हें हटाकर दूसरी महिला पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी जा चुकी है। सीएलएफ पदाधिकारियों को दो वर्ष में बदलने का नियम बताया गया है, जबकि शिकायत के अनुसार संबंधित पदाधिकारी करीब 10 वर्ष से काम कर रही थीं। शिकायत के बाद उन्हें बदला गया।
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सीएलएफ पदाधिकारियों पर लगे आरोपों की जांच पूरी हो चुकी है। जांच में गड़बड़ी भी सामने आई है। सोमवार को जिलाधिकारी को जांच रिपोर्ट सौंपी जाएगी। जिलाधिकारी स्तर से ही मामले में कार्रवाई की जाएगी।
-गजेंद्र प्रताप सिंह, जिला विकास अधिकारी
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ग्राम संगठन की अमिरता देवी, साबना, रामदेवी, शांति देवी, संगीता, सुधा देवी, सुमन, पूनम, सीता आदि महिलाओं ने मुख्यमंत्री और डीएम से सीएलएफ पदाधिकारियों पर गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि चुनिंदा ग्राम संगठनों को लाखों रुपये का ऋण दिया गया, जबकि कई समूहों के साथ भेदभाव किया गया।
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शिकायत के अनुसार, ग्राम संगठन खुशी को 35 लाख, करुणा को 14.42 लाख, गायत्री को 15 लाख और साधना को 23.03 लाख रुपये समेत करीब 22 संगठनों को लाखों रुपये का भुगतान किया गया। इसके अलावा रुकसार के खाते में 90 लाख, लक्ष्मी के खाते में 14 लाख और मनोरमा के खाते में नौ लाख रुपये भेजे जाने का आरोप है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कुछ ऐसे ग्राम संगठनों को भी पैसा दिया गया, जो संबंधित सीएलएफ से जुड़े नहीं हैं। रोजगार के नाम पर दिए गए ऋण का अधिकांश हिस्सा निजी खर्च में लगाने का भी आरोप लगाया गया।
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शिकायत में उपायुक्त स्वत: रोजगार जितेंद्र कुमार मिश्रा पर भी गड़बड़ी करने वालों को बचाने का आरोप लगाया गया था। डीएम अंजनी कुमार सिंह ने उपायुक्त को बुलाकर मामले की जानकारी ली थी। इसके बाद जिला विकास अधिकारी गजेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की गई।
आरोपों के बाद बदले गए पदाधिकारी
आदर्श प्रेरणा सीएलएफ बेलरायां के जिन पदाधिकारियों पर आरोप लगे थे, उन्हें हटाकर दूसरी महिला पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी जा चुकी है। सीएलएफ पदाधिकारियों को दो वर्ष में बदलने का नियम बताया गया है, जबकि शिकायत के अनुसार संबंधित पदाधिकारी करीब 10 वर्ष से काम कर रही थीं। शिकायत के बाद उन्हें बदला गया।
सीएलएफ पदाधिकारियों पर लगे आरोपों की जांच पूरी हो चुकी है। जांच में गड़बड़ी भी सामने आई है। सोमवार को जिलाधिकारी को जांच रिपोर्ट सौंपी जाएगी। जिलाधिकारी स्तर से ही मामले में कार्रवाई की जाएगी।
-गजेंद्र प्रताप सिंह, जिला विकास अधिकारी