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Lakhimpur Kheri News: 26 साल बाद महाविद्यालय निर्माण की फिर जगी आस
Sun, 12 Jul 2026 11:24 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 12 Jul 2026 11:24 PM IST
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सिंगहा खुर्द में महाविद्यालय निर्माण के लिए प्रस्ताव पर चर्चा करते ग्राम पंचायत के लोग। संवाद
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सिंगाही। ग्राम पंचायत सिंगहा खुर्द में ग्राम समाज की भूमि पर प्रस्तावित महाविद्यालय निर्माण का वर्षों पुराना मामला फिर चर्चा में है। रविवार को परिषद स्कूल परिसर में हुई ग्राम सभा की बैठक में ग्राम समाज की भूमि के संबंध में प्रस्ताव पारित किया गया।
बैठक में बताया गया कि वर्ष 1999 में करीब 8 एकड़ 44 डिसमिल ग्राम समाज की भूमि सरजू किसान महाविद्यालय के निर्माण के लिए प्रस्तावित की गई थी। उस समय सरजू सहकारी चीनी मिल क्षेत्र के किसानों ने गन्ना मूल्य से 10 पैसे प्रति क्विंटल कटौती कराकर महाविद्यालय निर्माण के लिए तीन करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई थी।
बताया गया कि महाविद्यालय का शिलान्यास होना था, लेकिन दूसरी संस्था की ओर से भूमि पर दावा किए जाने से मामला न्यायालय पहुंच गया। कानूनी विवाद के चलते 26 वर्षों तक निर्माण शुरू नहीं हो सका।
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ग्राम प्रधान प्रतिनिधि श्याम मोहन दीक्षित की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रस्ताव रखा गया कि यदि अब तक भूमि का उपयोग महाविद्यालय निर्माण के लिए नहीं हुआ है तो उसे पुनः ग्राम समाज के अधिकार में लिया जाए, ताकि भविष्य में उसी भूमि पर महाविद्यालय का निर्माण कराया जा सके।
ग्राम सभा ने प्रस्ताव पारित कर उसे संबंधित अधिकारियों को अग्रिम कार्रवाई के लिए भेजने का निर्णय लिया। ग्रामीणों ने मांग की कि ग्राम समाज की भूमि का उपयोग केवल शिक्षण संस्थानों तथा अन्य जनहित एवं विकास कार्यों के लिए सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में यशोदानंदन मिश्र, कौशल वर्मा, गया प्रसाद विश्वकर्मा, ज्ञानप्रकाश शुक्ला, डॉ. अनिल गुप्ता, दिनेश गुप्ता, रामस्नेही गुप्ता, अशोक कुमार वर्मा, गुरजीत सिंह, बब्बू समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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बैठक में बताया गया कि वर्ष 1999 में करीब 8 एकड़ 44 डिसमिल ग्राम समाज की भूमि सरजू किसान महाविद्यालय के निर्माण के लिए प्रस्तावित की गई थी। उस समय सरजू सहकारी चीनी मिल क्षेत्र के किसानों ने गन्ना मूल्य से 10 पैसे प्रति क्विंटल कटौती कराकर महाविद्यालय निर्माण के लिए तीन करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई थी।
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बताया गया कि महाविद्यालय का शिलान्यास होना था, लेकिन दूसरी संस्था की ओर से भूमि पर दावा किए जाने से मामला न्यायालय पहुंच गया। कानूनी विवाद के चलते 26 वर्षों तक निर्माण शुरू नहीं हो सका।
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ग्राम प्रधान प्रतिनिधि श्याम मोहन दीक्षित की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रस्ताव रखा गया कि यदि अब तक भूमि का उपयोग महाविद्यालय निर्माण के लिए नहीं हुआ है तो उसे पुनः ग्राम समाज के अधिकार में लिया जाए, ताकि भविष्य में उसी भूमि पर महाविद्यालय का निर्माण कराया जा सके।
ग्राम सभा ने प्रस्ताव पारित कर उसे संबंधित अधिकारियों को अग्रिम कार्रवाई के लिए भेजने का निर्णय लिया। ग्रामीणों ने मांग की कि ग्राम समाज की भूमि का उपयोग केवल शिक्षण संस्थानों तथा अन्य जनहित एवं विकास कार्यों के लिए सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में यशोदानंदन मिश्र, कौशल वर्मा, गया प्रसाद विश्वकर्मा, ज्ञानप्रकाश शुक्ला, डॉ. अनिल गुप्ता, दिनेश गुप्ता, रामस्नेही गुप्ता, अशोक कुमार वर्मा, गुरजीत सिंह, बब्बू समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।