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Lakhimpur Kheri News: आग से खाक हुए आशियाने, तिरपाल के नीचे जिंदगी

संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Wed, 22 Apr 2026 11:24 PM IST
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Homes gutted by fire, life under tarpaulin
तिरपाल के नीचे जिंदगी। स्रोत: ग्रामीण
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मझगईं। गांव मुन्नापुरवा में मंगलवार दोपहर उठी आग की लपटों ने कुछ ही पलों में कई परिवारों की पूरी दुनिया उजाड़ दी। बिजली की स्पार्किंग से शुरू हुई चिंगारी ने देखते ही देखते 24 घरों को अपनी चपेट में ले लिया और लोगों के सपनों के साथ उनकी जमा-पूंजी भी राख में बदल गई।
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हादसे के वक्त गांव में अफरा-तफरी मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते रहे, लेकिन अपने घरों से कुछ भी नहीं बचा सके। किसी के पास सिर्फ तन पर पहने कपड़े ही बचे, तो किसी की आंखों के सामने सालों की कमाई जलकर खाक हो गई।
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आग की चपेट में आकर रोहित नामक युवक गंभीर रूप से झुलस गया। उसे जिला अस्पताल से प्राथमिक उपचार के बाद लखनऊ रेफर किया गया है। वहीं पीड़ित परिवारों के चेहरे पर दर्द साफ झलक रहा है।
ग्रामीण रक्षपाल ने बताया कि उन्होंने अपने मकान का लिंटर डलवाने के लिए चार लाख रुपये नकद और घर की महिलाओं के सोने-चांदी के जेवर, जिनमें झूलनिया, मटर माला और करधनी शामिल थे, लेकिन अब वहां सिर्फ राख बची है। छत ढालने के लिए मंगाई गई शटरिंग भी आग में जल गई।
सरस कुमार के 60 हजार रुपये नकद और दोनों भाइयों के करीब तीन लाख रुपये के जेवर नष्ट हो गए। प्रेमीलाल की 20 हजार रुपये नकदी और रामनरेश की बाइक भी आग की भेंट चढ़ गई। हर घर में नुकसान की एक अलग कहानी है, लेकिन दर्द सबका एक जैसा है।
हादसे के बाद गांव में देर तक चीख-पुकार गूंजती रही। सूचना पर पहुंचे लेखपाल अभिषेक कुमार और ग्राम प्रधान के पति इकराम अली ने हालात का जायजा लिया। प्रशासन ने पीड़ितों को राहत देते हुए तिरपाल वितरित किए हैं और खाने-पीने की व्यवस्था कराई है।
फिलहाल पूरा गांव खुले आसमान के नीचे तिरपाल के सहारे जिंदगी काटने के लिए मजबूर है। चिलचिलाती धूप में छोटे-छोटे बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा परेशान हैं। जिन घरों में कभी चूल्हा जलता था, वहां अब राख के ढेर और सन्नाटा है।
पीड़ित परिवारों की एक ही मांग है कि उन्हें फिर से बसने का सहारा दिया जाए, ताकि वे अपनी उजड़ी हुई जिंदगी को दोबारा संवार सकें।
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