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Lakhimpur Kheri News: रोडवेज बसें तो दौड़ रहीं, पर व्यवस्थाएं पैदल
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 29 Mar 2026 11:29 PM IST
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लखीमपुर रोडवेज स्टैंड का उबड़-खाबड़ परिसर। संवाद
- फोटो : बोद्याश्रम चौराहा पर विवाद के बाद मौजूद पुलिस फोर्स। संवाद
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लखीमपुर खीरी। आबादी और क्षेत्रफल के हिसाब से प्रदेश के सबसे बड़े जिलों में शामिल खीरी में परिवहन व्यवस्था की तस्वीर अब भी बेहद बदहाल है। जिले के कई कस्बों में या तो रोडवेज बस अड्डा है ही नहीं और जहां है भी, वहां पेयजल, शौचालय, यात्री शेड, सुरक्षा और बैठने जैसी बुनियादी सुविधाओं का गंभीर अभाव है।
रविवार को की गई पड़ताल में सामने आया कि जिले के सरकारी बस स्टैंड जर्जर हालत में हैं, जबकि तमाम स्थानों पर यात्री सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करने के लिए महज एक वाटर कूलर है। परिसर ऊबड़-खाबड़ है, जिससे यात्रियों को आने-जाने में दिक्कतें होती हैं और कई बार गिरने की घटनाएं भी होती हैं।
बस स्टेशन परिसर में अवैध रूप से खड़े वाहन समस्या को और बढ़ा रहे हैं। भवन जर्जर हो चुका है और छत का प्लास्टर कई जगह से गिर रहा है, जिससे हादसे का खतरा बना हुआ है। पड़ताल के दौरान यात्री अशोक वर्मा, रामू और नीलम देवी ने बताया कि परिसर इतना खराब है कि चलना मुश्किल हो जाता है। अंदर तक बाइक और चार पहिया वाहन खड़े रहते हैं। बस स्टेशन का भवन भी खस्ताहाल है। एआरएम गीता सिंह ने बताया कि लखीमपुर के पुराने भवन को गिराकर नए बस स्टेशन का निर्माण प्रस्तावित है, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
पलियाकलां में स्थिति और भी खराब है। यहां से दिल्ली, बरेली, शाहजहांपुर, लखनऊ, अजमेर और जयपुर जैसे शहरों के लिए रोडवेज बस सेवा तो है, लेकिन इन बसों के लिए अब तक स्थायी बस अड्डा नहीं बन सका। करीब एक दशक से बस अड्डे की मांग चल रही है, पर अभी तक यात्रियों को राहत नहीं मिली।
बसें स्टेशन रोड और भीरा रोड किनारे खड़ी होती हैं और यात्रियों को सड़क पर ही इंतजार करना पड़ता है। यहां पानी की कोई व्यवस्था नहीं है और यात्रियों को दुकानों से पानी खरीदना पड़ता है। इसके उलट, निजी बस यूनियन परिसर में बड़ा यात्री प्रतीक्षालय है। वहां पानी के लिए वाटर कूलर और इंडिया मार्का हैंडपंप तक लगे हैं। यह तुलना सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।
-- -- गोला में सीसी कैमरों का अभाव-- --
गोला गोकर्णनाथ में रोडवेज डिपो पर सुरक्षा व्यवस्था भी अधूरी मिली। यहां सीसी कैमरे नहीं हैं। डीवीआर पटल लगा है, लेकिन न डीवीआर है और न ही डिस्प्ले। पेयजल के लिए एक वाटर कूलर और एक आरओ युक्त वाटर कूलर मिला, जिनकी टोटियां चालू हालत में हैं। परिसर में नेडा संस्था का शौचालय है, जहां यात्रियों को शुल्क देकर सुविधा मिलती है, लेकिन विभाग या नगर पालिका की ओर से कोई अलग शौचालय नहीं है। यूरिनल खुले में बने हैं। केंद्र प्रभारी कमलेश वर्मा ने बताया कि सीसीटीवी कैमरे और शौचालय का प्रस्ताव पहले ही भेजा जा चुका है।
-- -बिजुआ में भी हालात खराब-- --
बिजुआ क्षेत्र में हालात यह हैं कि बसें रुकती तो हैं, पर बस स्टॉप जैसी कोई सुविधा नहीं है। लखीमपुर-पलिया हाईवे पर दाउदपुर, जहांनपुर, मालपुर, पड़रिया तुला, बिजुआ समेत तमाम क्षेत्रों में न सरकारी और न ही निजी बस स्टॉप की व्यवस्था है। पलिया से लखीमपुर तक किसी भी पड़ाव पर पीने के पानी, शौचालय, टिनशेड या यात्री विश्रामालय जैसी बुनियादी सुविधा नहीं मिली। बेहजम कस्बे में भी बस स्टैंड नहीं है। यहां यात्रियों के बैठने, पानी पीने और रुकने जैसी न्यूनतम सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। इससे यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है।
-- -- मोहम्मदी में सड़क से ही बैठाई जा रहीं सवारियां-- --
मोहम्मदी में रोडवेज भवन का निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन जब तक भवन पूरा नहीं होता, तब तक यात्रियों की दिक्कत बरकरार है। यहां सड़क पर ही बसें खड़ी होकर सवारियां भरती हैं, जिससे जाम की स्थिति बनी रहती है। निघासन क्षेत्र में भी यही हाल है। कस्बे के साथ सिंगाही, बेलरायां और तिकुनिया तक कहीं भी सरकारी या निजी स्थायी बस अड्डा नहीं है। ऐसे में लोगों को खुले में या सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है।
-- -पसगवां में महिला शौचालय का अभाव-- --
पसगवां क्षेत्र के जंगबहादुरगंज में नेशनल हाईवे गुजरता है और दर्जनों बसों का आवागमन होता है, लेकिन यहां न रोडवेज बस अड्डा है, न पेयजल की व्यवस्था और न ही महिलाओं के लिए शौचालय की सुविधा। उचौलिया और अमीरनगर में यात्रियों के लिए यात्री शेड तक नहीं है। उचौलिया में लोग सड़क किनारे खड़े होकर बसों की प्रतीक्षा करते हैं। बारिश और तेज धूप में सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को होती है। अमीरनगर कस्बे में भी स्थिति यही है। हाईवे पर बसें कुछ देर रुकती हैं, सवारियां लेकर निकल जाती हैं, लेकिन यात्रियों के लिए कोई स्थायी इंतजाम नहीं है।
-- -मैलानी में निजी बस स्टैंड का एक कार्यालय-- --
मैलानी में रोडवेज का बस स्टैंड नहीं है। यहां यात्री सड़क किनारे ही बसों का इंतजार करते हैं। हालांकि निजी बस स्टैंड का एक कार्यालय मौजूद है, लेकिन सरकारी स्तर पर कोई समुचित सुविधा नहीं दिखती। बरबर में बस अड्डे पर पीने के पानी की समस्या बनी हुई है। यहां न कोई हैंडपंप है और न नियमित जल व्यवस्था। एक टंकी लगी है, लेकिन उसमें भी पानी निर्धारित समय पर ही आता है। यात्रियों के बैठने की भी कोई समुचित व्यवस्था नहीं मिली। सम्पूर्णानगर में भी कोई स्थायी बस अड्डा नहीं है। यहां लोग दुकानों और सड़क किनारे खड़े होकर बस का इंतजार करते हैं।
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रविवार को की गई पड़ताल में सामने आया कि जिले के सरकारी बस स्टैंड जर्जर हालत में हैं, जबकि तमाम स्थानों पर यात्री सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करने के लिए महज एक वाटर कूलर है। परिसर ऊबड़-खाबड़ है, जिससे यात्रियों को आने-जाने में दिक्कतें होती हैं और कई बार गिरने की घटनाएं भी होती हैं।
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बस स्टेशन परिसर में अवैध रूप से खड़े वाहन समस्या को और बढ़ा रहे हैं। भवन जर्जर हो चुका है और छत का प्लास्टर कई जगह से गिर रहा है, जिससे हादसे का खतरा बना हुआ है। पड़ताल के दौरान यात्री अशोक वर्मा, रामू और नीलम देवी ने बताया कि परिसर इतना खराब है कि चलना मुश्किल हो जाता है। अंदर तक बाइक और चार पहिया वाहन खड़े रहते हैं। बस स्टेशन का भवन भी खस्ताहाल है। एआरएम गीता सिंह ने बताया कि लखीमपुर के पुराने भवन को गिराकर नए बस स्टेशन का निर्माण प्रस्तावित है, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
पलियाकलां में स्थिति और भी खराब है। यहां से दिल्ली, बरेली, शाहजहांपुर, लखनऊ, अजमेर और जयपुर जैसे शहरों के लिए रोडवेज बस सेवा तो है, लेकिन इन बसों के लिए अब तक स्थायी बस अड्डा नहीं बन सका। करीब एक दशक से बस अड्डे की मांग चल रही है, पर अभी तक यात्रियों को राहत नहीं मिली।
बसें स्टेशन रोड और भीरा रोड किनारे खड़ी होती हैं और यात्रियों को सड़क पर ही इंतजार करना पड़ता है। यहां पानी की कोई व्यवस्था नहीं है और यात्रियों को दुकानों से पानी खरीदना पड़ता है। इसके उलट, निजी बस यूनियन परिसर में बड़ा यात्री प्रतीक्षालय है। वहां पानी के लिए वाटर कूलर और इंडिया मार्का हैंडपंप तक लगे हैं। यह तुलना सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।
गोला गोकर्णनाथ में रोडवेज डिपो पर सुरक्षा व्यवस्था भी अधूरी मिली। यहां सीसी कैमरे नहीं हैं। डीवीआर पटल लगा है, लेकिन न डीवीआर है और न ही डिस्प्ले। पेयजल के लिए एक वाटर कूलर और एक आरओ युक्त वाटर कूलर मिला, जिनकी टोटियां चालू हालत में हैं। परिसर में नेडा संस्था का शौचालय है, जहां यात्रियों को शुल्क देकर सुविधा मिलती है, लेकिन विभाग या नगर पालिका की ओर से कोई अलग शौचालय नहीं है। यूरिनल खुले में बने हैं। केंद्र प्रभारी कमलेश वर्मा ने बताया कि सीसीटीवी कैमरे और शौचालय का प्रस्ताव पहले ही भेजा जा चुका है।
बिजुआ क्षेत्र में हालात यह हैं कि बसें रुकती तो हैं, पर बस स्टॉप जैसी कोई सुविधा नहीं है। लखीमपुर-पलिया हाईवे पर दाउदपुर, जहांनपुर, मालपुर, पड़रिया तुला, बिजुआ समेत तमाम क्षेत्रों में न सरकारी और न ही निजी बस स्टॉप की व्यवस्था है। पलिया से लखीमपुर तक किसी भी पड़ाव पर पीने के पानी, शौचालय, टिनशेड या यात्री विश्रामालय जैसी बुनियादी सुविधा नहीं मिली। बेहजम कस्बे में भी बस स्टैंड नहीं है। यहां यात्रियों के बैठने, पानी पीने और रुकने जैसी न्यूनतम सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। इससे यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है।
मोहम्मदी में रोडवेज भवन का निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन जब तक भवन पूरा नहीं होता, तब तक यात्रियों की दिक्कत बरकरार है। यहां सड़क पर ही बसें खड़ी होकर सवारियां भरती हैं, जिससे जाम की स्थिति बनी रहती है। निघासन क्षेत्र में भी यही हाल है। कस्बे के साथ सिंगाही, बेलरायां और तिकुनिया तक कहीं भी सरकारी या निजी स्थायी बस अड्डा नहीं है। ऐसे में लोगों को खुले में या सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है।
पसगवां क्षेत्र के जंगबहादुरगंज में नेशनल हाईवे गुजरता है और दर्जनों बसों का आवागमन होता है, लेकिन यहां न रोडवेज बस अड्डा है, न पेयजल की व्यवस्था और न ही महिलाओं के लिए शौचालय की सुविधा। उचौलिया और अमीरनगर में यात्रियों के लिए यात्री शेड तक नहीं है। उचौलिया में लोग सड़क किनारे खड़े होकर बसों की प्रतीक्षा करते हैं। बारिश और तेज धूप में सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को होती है। अमीरनगर कस्बे में भी स्थिति यही है। हाईवे पर बसें कुछ देर रुकती हैं, सवारियां लेकर निकल जाती हैं, लेकिन यात्रियों के लिए कोई स्थायी इंतजाम नहीं है।
मैलानी में रोडवेज का बस स्टैंड नहीं है। यहां यात्री सड़क किनारे ही बसों का इंतजार करते हैं। हालांकि निजी बस स्टैंड का एक कार्यालय मौजूद है, लेकिन सरकारी स्तर पर कोई समुचित सुविधा नहीं दिखती। बरबर में बस अड्डे पर पीने के पानी की समस्या बनी हुई है। यहां न कोई हैंडपंप है और न नियमित जल व्यवस्था। एक टंकी लगी है, लेकिन उसमें भी पानी निर्धारित समय पर ही आता है। यात्रियों के बैठने की भी कोई समुचित व्यवस्था नहीं मिली। सम्पूर्णानगर में भी कोई स्थायी बस अड्डा नहीं है। यहां लोग दुकानों और सड़क किनारे खड़े होकर बस का इंतजार करते हैं।

लखीमपुर रोडवेज स्टैंड का उबड़-खाबड़ परिसर। संवाद- फोटो : बोद्याश्रम चौराहा पर विवाद के बाद मौजूद पुलिस फोर्स। संवाद

लखीमपुर रोडवेज स्टैंड का उबड़-खाबड़ परिसर। संवाद- फोटो : बोद्याश्रम चौराहा पर विवाद के बाद मौजूद पुलिस फोर्स। संवाद