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Lakhimpur Kheri News: सरहद पर ‘100 रुपये’ की लकीर, मंडियों में सन्नाटा
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 30 Apr 2026 11:12 PM IST
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शांतनु गुप्ता।
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पलियाकलां/गौरीफंटा। भारत-नेपाल सीमा पर सदियों से चली आ रही आवाजाही और आपसी निर्भरता पर अब एक नई लकीर खिंच गई है। नेपाल में बनी नई बालेन (आरएसपी) सरकार की ओर से राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से लागू किए गए सख्त भंसार (कस्टम) नियमों ने सीमावर्ती इलाकों की रफ्तार थाम दी है।
भारत से 100 रुपये से अधिक का सामान नेपाल ले जाने पर कस्टम शुल्क अनिवार्य करने और कई खाद्य वस्तुओं पर रोक के बाद गौरीफंटा, बनगंवा मंडी सहित सीमा से जुड़े भारतीय बाजारों में सन्नाटा पसर गया है। जो बाजार कभी नेपाली ग्राहकों की भीड़ से गुलजार रहते थे, वहां अब दिनभर दुकानदार खाली बैठे नजर आ रहे हैं।
नई व्यवस्था के तहत नेपाल सरकार ने खाद्य तेल, वनस्पति घी, कोल्ड ड्रिंक, मछली, मीट, मसाले, तंबाकू समेत कुछ अन्य खाद्य पदार्थों के आयात पर रोक लगा दी है। साथ ही पिछले सप्ताह से 100 रुपये से अधिक के सामान पर भंसार शुल्क लागू कर दिया गया है।
सीमा पर तैनात नेपाल एपीएफ के जवान इन नियमों का सख्ती से पालन करा रहे हैं। बॉर्डर पर नोटिस चस्पा किए गए हैं और मुनादी के जरिये नेपाली नागरिकों को भारतीय बाजार से सामान न लाने की चेतावनी दी जा रही है। जब्ती की कार्रवाई के डर से नेपाली ग्राहकों ने मंडियों की ओर आना लगभग बंद कर दिया है।
इसका सीधा असर सीमा पार की उस माइक्रो इकोनॉमी पर पड़ा है, जो दशकों से दोनों देशों के लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों और रिश्तों पर टिकी थी। बनगंवा मंडी में करीब 120 दुकानदार और लगभग 80 फड़ व्यापारी हैं। दुकानदारों और उनके स्टाफ को मिलाकर करीब एक हजार लोग इस व्यापार से जुड़े हैं, जिनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।
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मंडी के अस्तित्व पर फिर संकट
बनगंवा मंडी का इतिहास भी संघर्ष से भरा रहा है। पहले यह मंडी गौरीफंटा में थी, लेकिन जमीन पर वन विभाग के दावे और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वर्ष 2011 में इसे खाली कराना पड़ा। इसके बाद थारू आदिवासी समुदाय ने बनगंवा में जगह देकर इस मंडी को नया जीवन दिया। अब एक बार फिर मंडी अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। मंडी का दैनिक टर्नओवर, जो पहले 70 से 80 लाख रुपये बताया जाता था, घटकर 5 से 6 लाख रुपये रह गया है।
-- -- -सीमा पार करने वालों में आई कर्मी-- --
गौरीफंटा बॉर्डर पर स्थित पुलिस चौकी इंचार्ज एसआई परमीत कुमार ने बताया कि 100 रुपये से अधिक सामान पर भंसार शुल्क लागू होने के बाद बनगंवा मंडी आने वाले नेपाली ग्राहकों की आमद कम हुई है।
एसएसबी बीओपी पर तैनात इंचार्ज के अनुसार, मंडी से खरीदारी कर सामान ले जाने वाले नेपाली लोगों में कमी आई है, जबकि नेपाल से भारतीय शहरों के लिए कामगारों का आवागमन जारी है।
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यह पूरा बाजार नेपाली ग्राहकों के सहारे चलता है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन के नए आदेश के बाद डर के कारण ग्राहक कम हो गए हैं।
-शांतनु गुप्ता, व्यापारी, बनगंवा
भंसार शुल्क के कारण ग्राहक नहीं आ रहे हैं, जिससे मंडी में व्यापार ठप हो गया है। पहले सस्ते सामान के कारण बाजार गुलजार रहता था।
-नितिन गुप्ता, व्यापारी, बनगंवा
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भारत से 100 रुपये से अधिक का सामान नेपाल ले जाने पर कस्टम शुल्क अनिवार्य करने और कई खाद्य वस्तुओं पर रोक के बाद गौरीफंटा, बनगंवा मंडी सहित सीमा से जुड़े भारतीय बाजारों में सन्नाटा पसर गया है। जो बाजार कभी नेपाली ग्राहकों की भीड़ से गुलजार रहते थे, वहां अब दिनभर दुकानदार खाली बैठे नजर आ रहे हैं।
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नई व्यवस्था के तहत नेपाल सरकार ने खाद्य तेल, वनस्पति घी, कोल्ड ड्रिंक, मछली, मीट, मसाले, तंबाकू समेत कुछ अन्य खाद्य पदार्थों के आयात पर रोक लगा दी है। साथ ही पिछले सप्ताह से 100 रुपये से अधिक के सामान पर भंसार शुल्क लागू कर दिया गया है।
सीमा पर तैनात नेपाल एपीएफ के जवान इन नियमों का सख्ती से पालन करा रहे हैं। बॉर्डर पर नोटिस चस्पा किए गए हैं और मुनादी के जरिये नेपाली नागरिकों को भारतीय बाजार से सामान न लाने की चेतावनी दी जा रही है। जब्ती की कार्रवाई के डर से नेपाली ग्राहकों ने मंडियों की ओर आना लगभग बंद कर दिया है।
इसका सीधा असर सीमा पार की उस माइक्रो इकोनॉमी पर पड़ा है, जो दशकों से दोनों देशों के लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों और रिश्तों पर टिकी थी। बनगंवा मंडी में करीब 120 दुकानदार और लगभग 80 फड़ व्यापारी हैं। दुकानदारों और उनके स्टाफ को मिलाकर करीब एक हजार लोग इस व्यापार से जुड़े हैं, जिनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।
मंडी के अस्तित्व पर फिर संकट
बनगंवा मंडी का इतिहास भी संघर्ष से भरा रहा है। पहले यह मंडी गौरीफंटा में थी, लेकिन जमीन पर वन विभाग के दावे और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वर्ष 2011 में इसे खाली कराना पड़ा। इसके बाद थारू आदिवासी समुदाय ने बनगंवा में जगह देकर इस मंडी को नया जीवन दिया। अब एक बार फिर मंडी अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। मंडी का दैनिक टर्नओवर, जो पहले 70 से 80 लाख रुपये बताया जाता था, घटकर 5 से 6 लाख रुपये रह गया है।
गौरीफंटा बॉर्डर पर स्थित पुलिस चौकी इंचार्ज एसआई परमीत कुमार ने बताया कि 100 रुपये से अधिक सामान पर भंसार शुल्क लागू होने के बाद बनगंवा मंडी आने वाले नेपाली ग्राहकों की आमद कम हुई है।
एसएसबी बीओपी पर तैनात इंचार्ज के अनुसार, मंडी से खरीदारी कर सामान ले जाने वाले नेपाली लोगों में कमी आई है, जबकि नेपाल से भारतीय शहरों के लिए कामगारों का आवागमन जारी है।
यह पूरा बाजार नेपाली ग्राहकों के सहारे चलता है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन के नए आदेश के बाद डर के कारण ग्राहक कम हो गए हैं।
-शांतनु गुप्ता, व्यापारी, बनगंवा
भंसार शुल्क के कारण ग्राहक नहीं आ रहे हैं, जिससे मंडी में व्यापार ठप हो गया है। पहले सस्ते सामान के कारण बाजार गुलजार रहता था।
-नितिन गुप्ता, व्यापारी, बनगंवा

शांतनु गुप्ता।

शांतनु गुप्ता।
