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Lakhimpur Kheri News: जिला अस्पताल की ओपीडी में बढ़ी जांच लिख दो की जिद
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 18 Jun 2026 12:00 AM IST
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जिला अस्पताल में मरीज की जांच करते फिजिशियन डॉ. शिखर बाजपेयी। संवाद
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लखीमपुर खीरी। जिला अस्पताल की ओपीडी में इन दिनों एक नई प्रवृत्ति देखने को मिल रही है। कई मरीज बीमारी की जांच और उपचार का निर्णय चिकित्सक पर छोड़ने के बजाय सीधे अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे या पैथोलॉजी जांच लिखने की मांग कर रहे हैं। इससे डॉक्टरों को मरीजों को समझाने में अतिरिक्त समय देना पड़ रहा है और ओपीडी में अनावश्यक बहस की स्थिति बन रही है।
चिकित्सकों के अनुसार, पहले मरीज अपनी समस्या बताते थे और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार लेते थे, लेकिन अब कई लोग इंटरनेट या झोलाछाप की सलाह के आधार पर सीधे जांच कराने की मांग लेकर पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल के जीरियाटिक फिजिशियन डॉ. शिखर बाजपेयी ने बताया कि अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे और पैथोलॉजी जैसी जांचें मरीज की स्थिति देखकर लिखी जाती हैं। बिना आवश्यकता जांच कराने से समय और संसाधनों की बर्बादी होती है। ओपीडी में आए दिन ऐसे मरीज आते हैं, जो जांच के लिए दबाव बनाते हैं। उन्हें समझाने में काफी समय लगता है। उन्होंने लोगों से चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही जांच और उपचार कराने की अपील की।
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केस-1: पेट दर्द से ज्यादा अल्ट्रासाउंड की चिंता
शहर निवासी 32 वर्षीय युवक पेट में हल्के दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचा। चिकित्सकीय परीक्षण में कोई गंभीर समस्या नहीं मिली, लेकिन वह लगातार अल्ट्रासाउंड लिखने की मांग करता रहा। डॉक्टर ने पहले दवा और आवश्यक उपचार की सलाह दी, तब जाकर मामला शांत हुआ।
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केस-2: झोलाछाप की सलाह पर जांच की जिद
25 वर्षीय युवक पैरों में दर्द की शिकायत लेकर ओपीडी पहुंचा। परीक्षण के दौरान डॉक्टर ने सामान्य मांसपेशीय दर्द की संभावना बताई, लेकिन युवक गांव के एक झोलाछाप की सलाह का हवाला देते हुए जांच कराने की जिद पर अड़ा रहा। बाद में चिकित्सक द्वारा बीमारी और उपचार की जानकारी देने पर वह दवा लेकर घर लौट गया।
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निशुल्क जांच भी बढ़ा रही रुझान
विशेषज्ञों का कहना है कि कई मरीज पहले झोलाछाप से इलाज कराते हैं। जब वहां से जांच कराने की सलाह मिलती है तो वे सीधे जिला अस्पताल पहुंच जाते हैं। चूंकि सरकारी अस्पतालों में जांच निशुल्क होती है, इसलिए भी कई लोग बिना चिकित्सकीय आवश्यकता जांच कराने की मांग करने लगते हैं।
चिकित्सकों के अनुसार, पहले मरीज अपनी समस्या बताते थे और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार लेते थे, लेकिन अब कई लोग इंटरनेट या झोलाछाप की सलाह के आधार पर सीधे जांच कराने की मांग लेकर पहुंच रहे हैं।
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जिला अस्पताल के जीरियाटिक फिजिशियन डॉ. शिखर बाजपेयी ने बताया कि अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे और पैथोलॉजी जैसी जांचें मरीज की स्थिति देखकर लिखी जाती हैं। बिना आवश्यकता जांच कराने से समय और संसाधनों की बर्बादी होती है। ओपीडी में आए दिन ऐसे मरीज आते हैं, जो जांच के लिए दबाव बनाते हैं। उन्हें समझाने में काफी समय लगता है। उन्होंने लोगों से चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही जांच और उपचार कराने की अपील की।
केस-1: पेट दर्द से ज्यादा अल्ट्रासाउंड की चिंता
शहर निवासी 32 वर्षीय युवक पेट में हल्के दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचा। चिकित्सकीय परीक्षण में कोई गंभीर समस्या नहीं मिली, लेकिन वह लगातार अल्ट्रासाउंड लिखने की मांग करता रहा। डॉक्टर ने पहले दवा और आवश्यक उपचार की सलाह दी, तब जाकर मामला शांत हुआ।
केस-2: झोलाछाप की सलाह पर जांच की जिद
25 वर्षीय युवक पैरों में दर्द की शिकायत लेकर ओपीडी पहुंचा। परीक्षण के दौरान डॉक्टर ने सामान्य मांसपेशीय दर्द की संभावना बताई, लेकिन युवक गांव के एक झोलाछाप की सलाह का हवाला देते हुए जांच कराने की जिद पर अड़ा रहा। बाद में चिकित्सक द्वारा बीमारी और उपचार की जानकारी देने पर वह दवा लेकर घर लौट गया।
निशुल्क जांच भी बढ़ा रही रुझान
विशेषज्ञों का कहना है कि कई मरीज पहले झोलाछाप से इलाज कराते हैं। जब वहां से जांच कराने की सलाह मिलती है तो वे सीधे जिला अस्पताल पहुंच जाते हैं। चूंकि सरकारी अस्पतालों में जांच निशुल्क होती है, इसलिए भी कई लोग बिना चिकित्सकीय आवश्यकता जांच कराने की मांग करने लगते हैं।