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Lakhimpur Kheri News: छोटी काशी में आस्था का प्रतीक है बूढ़े बाबा मंदिर

Thu, 06 Aug 2026 11:20 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 06 Aug 2026 11:20 PM IST
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The Old Baba Temple is a symbol of faith in Chhoti Kashi
गोला के पौराणिक शिव मंदिर परिसर में प्राचीन बूढ़े बाबा मंदिर। संवाद
गोला गोकर्णनाथ। छोटी काशी के पौराणिक शिव मंदिर के निकट स्थित मुगलकालीन बूढ़े बाबा मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है। यहां स्थापित खंडित शिवलिंग का आज भी विधि-विधान से पूजन और जलाभिषेक किया जाता है। हालांकि इस बार निर्माणाधीन कॉरिडोर के तहत शिवालय का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है, इसलिए श्रद्धालुओं का प्रवेश अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
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पौराणिक शिव मंदिर के पुजारी दिनेश मिश्र ने बताया कि बूढ़े बाबा मंदिर मुगलकालीन है। मंदिर में स्थापित विशाल शिवलिंग को मुगल बादशाह औरंगजेब ने काटने का प्रयास किया था, जिसके निशान आज भी शिवलिंग पर मौजूद हैं। मान्यता है कि यहां श्रद्धा से की गई हर मनोकामना पूरी होती है।
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लोकमान्यता के अनुसार, औरंगजेब छोटी काशी पहुंचा और कई देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त करने के बाद बूढ़े बाबा मंदिर पहुंचा। उसने शिवलिंग को काटने का प्रयास किया, लेकिन मंदिर के पास स्थित विशाल कैमी वृक्ष से काले भौरों का झुंड उसकी सेना पर टूट पड़ा। इससे औरंगजेब और उसकी सेना को वहां से भागना पड़ा और फिर उसने दोबारा इस स्थान की ओर रुख नहीं किया।
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सावन में श्रद्धालु पौराणिक शिव मंदिर में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के बाद बूढ़े बाबा के दर्शन भी करते हैं। इस बार मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य के चलते श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद है।
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